मुंबई में पहली ‘महाभारत कथा’ संपन्न

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न्यूज स्टैंड18 नेटवर्क
मुंबई।
देश के 40 करोड़ वनवासी समाज के उत्थान के लिए समर्पित संस्था एकल श्रीहरि वनवासी विकास ट्रस्ट द्वारा मुंबई में पहली बार महाभारत कथा गोरेगांव (प) बांगुर नगर स्थित विष्णु पार्क में धर्मराज्याभिषेक के साथ संपन्न हुई।
19 से 25 दिसंबर तक चली कथा का उद्घाटन महामण्डलेश्वर स्वामी विद्यानंद सरस्वती ने किया जबकि वीरेंद्र याज्ञिक ने कथा के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। संस्था के मुंबई अध्यक्ष विजय जी. केडिया ने कथा व्यास गोविन्ददेव गिरिजी महाराज व स्वामी विद्यानंद सरस्वती का स्वागत करते हुये कथा के विभिन्न प्रसंगों व सेवाओं के यजमानों और दानदाताओं का परिचय कराते हुये मुंबई में संस्था के कार्यों का ब्यौरा पेश किया। राष्ट्रीय संरक्षक सत्यनारायण काबरा ने अपने संबोधन में रहस्योद्घाटन किया कि मुंबई के कथा इतिहास में पहली बार महाभारत कथा हो रही है। इससे पहले कभी भी महाभारत कथा नहीं हुई। क्योंकि गलत किंवदंतियों के चलते लोग महाभारत कथा कराने से डरते थे। कथाव्यास ने महाभारत कथा के पहले दिन महाभारत उपक्रम ययाति कथा शकुंतला-भरत उपाख्यान, भीष्म चरित्र और दूसरे दिन पाण्डव जन्म, श्री कृष्ण जन्मोत्सव, अगले दिन लाक्षागृह प्रसंग, द्रौपदी स्वयंवर, अर्जुन की तीर्थयात्रा के बाद चौथे दिन पाण्डव राजसूय यज्ञ, शकुनि चरित्र, पाण्डव वनवास, नव-दमयंति उपाख्यान पर व्यासपीठ ने प्रकाश डाला। पांचवें दिन सत्यवान सावित्री, अर्जुन का पराक्रम, अभिमन्यु-उत्तरा विवाह पर चर्चा के बाद छठे दिन संजय चरित्र, विदुर नीति, कृष्ण की शांतियात्रा, भगवद्गीता उपदेश पर कथा ने विश्राम लिया। अंतिम दिन युद्धारंभ, दुष्टासंहार लीला, धर्मराज्यभिषेक प्रसंग के साथ कथा ने विराम लिया। इसके बाद वीरेन्द्र याज्ञिक व श्यामा रंगा द्वारा तुलसी अर्चन किया गया।

इस दरम्यान श्री हरि रथ का लोकार्पण भी किया गया। इस अवसर पर गोपाल कंदोई, नारायण करवा, सुरेंद्र विकल सहित संस्था के पदाधिकारी व बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे। इस धार्मिक आयोजन की मुख्य यजमान श्रीमती वर्षा पवन मल्लावत थे। कथा का सीधा प्रसारण भक्ति सागर चैनल पर किया गया। कथा स्थल पर सिद्धि विनायक, सालासर बालाजी, राधाकृष्ण व शाकंबरी देवी मन्दिरों की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं।

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