Free ration scheme: मुफ्त राशन योजना पर सवाल हैं सूरजदेई

उत्तर प्रदेश लेख

अजय भट्टाचार्य
हाल
ही में केंद्र सरकार (central government) ने मुफ्त राशन योजना को दिसंबर तक बढ़ा दिया है। किसी भी सत्ता प्रतिष्ठान के लिए जनहित सर्वोपरि होता है। कोरोना संकट के समय देश की आधी से ज्यादा आबादी पर आये रोजगार के संकट ने भुखमरी का मंजर खड़ा कर दिया था जिससे उबरने के लिए केंद्र सरकार ने मुफ्त राशन योजना शुरू की थी। इस मुफ्त राशन ने उत्तर प्रदेश (uttar Pradesh) में योगी सरकार की दोबारा ताजपोशी सुनिश्चित की और जो अब इस योजना को दिसंबर तक विस्तार दिया गया है उससे गुजरात (Gujarat) और हिमाचल (Himachal) प्रदेश में खेला होगा। केंद्र सरकार देश की 80 करोड़ जनसंख्या को मुफ्त राशन देने का दावा कर भले अपनी पीठ थपथपाये मगर यह सवाल भी खड़ा रहेगा कि सरकार की किन नीतियों के चलते 80 करोड़ लोग खाने का सामान तक खरीदने की हालत में नहीं हैं। इसे उपलब्धि माना जाये या कुछ और, यह समय तय करेगा। मगर यहाँ जिस तस्वीर को आप देख रहे हैं, वह दो दिन पहले उत्तर प्रदेश के अख़बारों में एक खबर के साथ चस्पां थी। यह तस्वीर ही केंद्र की मुफ्त राशन योजना को आईना दिखाने के लिए काफी है।
लखनऊ (lucknow) की मोहनलालगंज (mohanlalGanj) तहसील में आयोजित समाधान दिवस कार्यक्रम में 90 साल की सूरजदेई (surjdei) भी पहुंचीं थीं। अधिकारियों और लोगों की भीड़ देखकर वे कुछ सहम गई। फिर किसी की मदद से उस कमरे के अंदर गईं जहाँ जनता की आवाज/समस्याएं सुनी जा रही थीं। उन्‍होंने सहमते हुए लखनऊ के जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार से एक बोरी अनाज देने की अपील की। भावुक अपील पर जिलाधिकारी ने उन्‍हें एक साल का राशन दे दिया। खबर छपी, जिलाधिकारी की जय-जयकार हुई, मगर किसी पत्रकार ने यह जहमत नहीं उठाई कि सूरजदेई तक प्रधानमंत्री मुफ्त राशन क्यों नहीं पहुंचा?
स्‍थानीय लोगों के अनुसार 90 वर्षीय सूरजदेई मोहनलालगंज तहसील में आयोजित समाधान दिवस में पहुंची थीं। उन्‍हें डरा हुआ देखकर एक शख्‍स उन्‍हें जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार के पास लेकर पहुंचा। सूरजदेई ने रोते हुए जिलाधिकारी से कहा, ‘साहेब पति हमार खतम होइगे हैं, लरिकवा कुछ करति नाई है. अब घर पर खाए के लिए कुछ नहीं है। कबो गांव वाले देति हैं तो कबो पानी पीकै राति मा अइसेहे सो जाइत है।’ सूरजदेई की बात सुनकर जिलाधिकारी सहि‍त सभी भावुक हो गए। जिलाधिकारी ने सूरजदेई का हाथ पकड़कर उन्‍हें चुप कराया। साथ ही, उन्‍होंने पहले पानी के एक बोतल देकर उन्‍हें शांत कराया। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने तत्काल सूरजदेई के खाने का बंदोबस्त करा दिया। मातहतों को भेजकर तत्काल सूरजदेई के घर सालभर का राशन भिजवा दिया। इस संबंध में जानकारी दी गई है कि सम्पूर्ण समाधान दिवस में जनसुनवाई के दौरान 90 वर्ष की सरजूदेई की राशन न मिलने सम्बंधित शिकायत का जिलाधिकारी के निर्देश पर तुरंत संज्ञान लिया गया। तत्काल 5 कुंटल गेहूं और 2 कुंटल चावल उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गए। गंगवार वृद्धजनों के सम्मान दिवस पर जरुर अपना फर्ज पूरा किया लेकिन यह प्रश्न तो उनको भी अपने मातहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े अधिकारीयों/कर्मचारियों से पूछना चाहिये कि अब तक सूरजदेई तक सरकारी मुफ्त राशन क्यों नहीं पहुंचा!

Leave a Reply

Your email address will not be published.