योगी सरकार में बढ़ता असंतोष

उत्तर प्रदेश मुंबई

अजय भट्टाचार्य
उत्तर
प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ उनके कैबिनेट मंत्रियों से लेकर विधायकों तक का असंतोष किश्तों में फूट रहा है। राज्य मंत्री दिनेश खटीक के कथित इस्तीफे के बाद एक और विधायक का पत्र वायरल हो रहा है। उपमुख्यमंत्री सुब्रत पाठक अलग नाराज चल रहे हैं। एक अन्य मंत्री जितिन प्रसाद भी नाराज हैं और अपना दुखड़ा लेकर दिल्ली पहुंचे मगर आलाकमान के पास उनके लिए वक्त की इतनी कमी थी कि जितिन प्रसाद को बिना किसी बड़े नेता से मिले वापस लौटना पड़ा। पाठक का मसला अलग है। उनके विभाग में इतने तबादले कर दिए गये कि खुद योगी को दखल देना पड़ा और एक जाँच बिठा दी। मजा यह है कि इन तबादलों की खबर खुद पाठक को भी नहीं थी! ताजा मामला उन्नाव के सफीपुर विधानसभा के भाजपा विधायक बंबा लाल दिवाकर का है। विधायक ने अधिशासी अभियंता अवनीश चंद्र अनुरागी पर असंसदीय भाषा के प्रयोग कर अपमानित करने का आरोप लगाया है। विधायक ने जिलाधिकारी को लिखे पत्र में अधिशासी अभियंता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पत्र में विधायक ने कहा, ‘क्षेत्र में लोगों की बार-बार शिकायत आ रही थी कि ट्रांसफार्मर खराब हो रहे हैं। इसके लिए मैंने अधिशासी अभिंयता को फोनकिया तो उन्होंने कई घंटों तक मेरे फोन का जवाब नहीं दिया। जब उन्होंने मेरा फोन उठाया तो कहा कि क्या आप बिजली की समस्या के लिए ही विधायक बने हैं? साथ ही अधिकारी ने कहा कि मैं कोई लाइनमैन थोड़ी हूं जो आप मुझे बार-बार कॉल कर रहे हैं। अधिशासी अभियंता ने मेरे अधिकारों का हनन किया है। जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया है, वो अनुचित है। इसके लिए अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। अधिशासी अभियंता ने जनप्रतिनिधि के साथ असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया है। साथ ही वह अपने दायित्वों का निर्वहन करने में अक्षम प्रतीत हो रहे हैं। ऐसे में जनहित से जुड़े काम करने में दिक्कत हो रही है। इससे एक दिन पहले योगी सरकार में जल संसाधन राज्य मंत्री दिनेश खटीक ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और देश के गृह मंत्री अमित शाह को अपना इस्तीफा भेजा था।. उन्होंने ये कहते हुए पद छोड़ा कि “वह दलित हैं, इसलिए उन्हें नजरअंदाज किया गया है. अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि “मैं दलित समाज से हूं. इसलिए मेरी अनदेखी की गई। नमामि गंगा और हर घर जल योजना में नियमों की अनदेखी हो रही है। तबादलों नियुक्तियों में भ्रष्टाचार हो रहा है। मैं दलित समाज से हूं, इसलिए मेरी बात नहीं सुनी जाती। मेरी अनदेखी से दलित समाज आहत है। मेरा कोई मंत्री के तौर पर अस्तित्व नहीं है। मेरे लिए राज्यमंत्री के तौर पर काम करना दलित समाज के लिए बेकार है। न मुझे बैठक में बुलाया जाता है न ही मुझे मेरे मंत्रालय में हो रहे कार्यों के बारे में बताया जाता है। मैं आहत होकर अपना त्यागपत्र दे रहा हूं।“ बुधवार देर शाम जेपी नड्डा और दिनेश खटीक के बीच मुलाकात हुई। इस दौरान दिनेश खटीक ने इस्तीफे की वजह सरकार में की जा रही अनदेखी को बताया है। दिनेश खटीक ने दलित विरोधी राजनीति का भी आरोप लगाया है।
इधर सरकार में इस बार उपमुख्यमंत्री बनते ही सुब्रत पाठक नायक फिल्म के अभिनेता अनिल कपूर की भूमिका में आ गए और मीडिया कर्मियों को साथ ले अस्पतालों में ताबड़तोड़ छापेमारी की। सूबे के दवा आपूर्ति निगम के गोदाम में करोड़ों रुपये की एक्सपायर दवाईयाँ पकड़ीं। चिकित्सा विभाग में हज़ारों अव्यवस्थाओं और धांधलियों को उजागर किया। नेता विरोधी दल को मुद्दा मिल गया। उन्होंने सत्तापक्ष को विधानसभा में घेर लिया कि पाँच साल से आपकी ही सरकार थी इसमें इतनी अव्यवस्थाएँ क्यों थीं ? क्या इसी वजह से कोरोना काल में असँख्य मौतें हुईं? करोंङो रुपयों की दवाइयां एक्सपायर कैसे हुईं? क्या अब तक जनता एक्पायर दवाइयाँ खा रही थी? चूँकि ये अव्यवस्थाएँ सरकार के उपमुख्यमंत्री जी ने ही उजागर की थीं तो मुख्यमंत्री को कोई जवाब देते भी नहीं बना। अब विधानसभा सत्र के बाद किसी ने पाठक को ठीक से समझाया, “पण्डित जी यह भाजपा है यहाँ रातों रात मुख्यमंत्री बदल दिए जाते हैं आप तो फिर भी उप हैं।” बस फिर क्या था तब से पाठक रहस्यमय ढंग से बिल्कुल शाँत हैं। अब न कोई औचक निरीक्षण, न हीं कोई जाँच….न लाइन में लगकर अस्पतालों की जांच, न कोई अव्यवस्थाएँ पकड़ना।

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