Gujarat election 2022: नीचता की नूरा कुश्ती

राजनीति लेख

अजय भट्टाचार्य
राजनीति
में नूरा कुश्ती कोई नई बात नहीं है। गुजरात में जिस तरह आम आदमी पार्टी चुनाव की तैयारी में लगी है उससे उसे फायदा हो न हो मगर भाजपा को फायदा जरुर मिलेगा। क्योंकि इस बार गुजरात में भाजपा की हालत खराब है इसलिए बहुत ही सधे हुए ढंग से ‘आप’ ने गुजरात में प्रवेश किया। मीडिया में भी आप का जलवा दिखने लगा। खबरों से कांग्रेस बिलकुल गायब है। ऐसी धारणा बनाई जा रही है (जिसमें गोदी मीडिया भी अपने आका-काका की सेवा में जुटा है) कि गुजरात में आप ही भाजपा को टक्कर दे रही है। पार्टी के मुखिया लगातार मुफ्त बिजली आदि की घोषणाएं किये जा रहे हैं। यह सब कसरत इसलिए है कि भाजपा से नाराज वोटर कांग्रेस की तरफ न चला जाये। यह दांव काम नहीं आया तो एक मंत्री से बौद्ध धर्म की प्रतिज्ञाएँ पढवा दीं ताकि भाजपा के हिंदुत्व को धार मिले। इसी कड़ी में अब गुजरात प्रदेश इकाई के अध्यक्ष गोपाल इटालिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘नीच’ कहते नजर आ रहे हैं। जाहिर है भाजपा इसे बड़ा मुद्दा बनाकर भुनाने के लिए आगे बढ़ेगी और बढ़ भी रही है। भाजपा के फायर ब्रांड प्रवक्ता संबित पात्रा ने साफ तौर पर कहा कि अरविंद केजरीवाल और मणि शंकर अय्यर में कोई अंतर नहीं है। मणि शंकर अय्यर ने भी कई बार नरेंद्र मोदी के लिए इसी शब्द का प्रयोग किया है। गुजरात चुनाव से पहले भाजपा इस मुद्दे को जबरदस्त तरीके से उठाएगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संबित पात्रा ने कहा कि जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग आम आदमी पार्टी ने माननीय प्रधानमंत्री जी के लिए किया है, इससे स्पष्ट हो जाता है कि आम आदमी पार्टी किस प्रकार की पार्टी है, किस प्रकार की इनकी मंशा है, उसे उजागर करता है। गोपाल इटालिया, जो आप के गुजरात के अध्यक्ष हैं, एक वीडियो में कई बार प्रधानमंत्री के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं, यह आम आदमी पार्टी की मानसिकता को दर्शाता है। आज ये कहना गलत नहीं होगा कि मणिशंकर अय्यर और अरविंद केजरीवाल में कोई अंतर नहीं है। दोनों की भाषा का स्तर, दोनों की राजनीति करने का तरीका एक जैसा ही है। अपन भी राजनीति में इस तरह की भाषा का कतई समर्थन नहीं करते मगर साथ ही यह भी प्रश्न उठता है कि राजनीति में गटर की भाषा का सबसे ज्यादा प्रयोग कौन करता है? शब्दों की मर्यादा को निचले स्तर पर किसने लाकर खड़ा किया ? संबित पत्र को यह सवाल अपनी पार्टी के मुंहफट नेताओं जिनमें मोदी भी शामिल हैं, से पूछना चाहिये। जर्सी गाय, बार बाला, कांग्रेस की विधवा जैसे शब्द विपक्षी पार्टी की नेत्री के लिए बोलना नीचता है कि नहीं ? पूर्व प्रधानमंत्री के बाथरूम तक झाँकने की भोंडी कोशिश नीचता है कि नहीं! बहरहाल गुजरात के अखाड़े में अभी इस तरह की बयानबाजी और देखने को मिलेगी। केजरीवाल एंड कंपनी भी उसी सिद्धांत पर आगे बढ़ रही है जिस पर चलकर भाजपा सत्ता के शीर्ष पर/तक पहुंची है। वह है झूठ का इतना प्रचार करो कि सच लगने लगे। भाजपा और मोदी ने झूठा गुजरात मॉडल बेचा अब अरविंद केजरीवाल दिल्ली और पंजाब का झूठा मॉडल बेच रहे है। नीचता का इससे बड़ा मुआबला और क्या हो सकता है।

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