शिंदे सरकार में गुजरात के ‘अच्छे दिन’, एक लाख युवा रोजगार से वंचित

मुंबई

न्यूज स्टैंड18 नेटवर्क
मुंबई।
पिछले तीन महीने में चार बड़े प्रोजेक्ट महाराष्ट्र के हाथ से निकल गए। इन सभी परियोजनाओं की कुल लागत करीब 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये है। दिलचस्प बात यह है कि शिवसेना से बगावत कर भाजपा समर्थन से सरकार बनाने वाले एकनाथ शिंदे के कार्यकाल में यह सब हुआ है। राज्य में सत्ता हस्तांतरण के बाद चार महत्वपूर्ण परियोजनाएं महाराष्ट्र से दूसरे राज्यों में चली गईं।
जिसके चलते राज्य में एक लाख नौकरियों के अवसर भी छिन गए हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकते थे। गुरुवार को टाटा-एयरबस ने घोषणा की कि उनका 22,000 करोड़ रुपये का विमान निर्माण संयंत्र वडोदरा, गुजरात में स्थापित किया जाएगा। यह चौथा प्रोजेक्ट है जो पिछले तीन महीने में महाराष्ट्र के हाथ से निकल गया है। राज्य के उद्योग मंत्री उदय सामंत के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पहले नागपुर के मिहान में इस परियोजना की स्थापना के संबंध में दावा किया था। इस परियोजना के माध्यम से राज्य में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 6000 लोगों को रोजगार मिला होता।
इसी तरह 1.54 लाख करोड़ रुपये की वेदांत-फॉक्सकॉन परियोजना भी पिछले महीने महाराष्ट्र के हाथ से निकल गई। कंपनी की सेमीकंडक्टर निर्माण परियोजना को महाराष्ट्र के तालेगांव के औद्योगिक निगम क्षेत्र में स्थापित किया जाना था। इसके लिए जगह भी तय की गई थी। लेकिन अचानक सितंबर के महीने में कंपनी ने गुजरात की राज्य सरकार के साथ धोलेरा में इस परियोजना को स्थापित करने के लिए एक समझौता किया। इस परियोजना से राज्य में लगभग एक लाख रोजगार सृजित हुए होते।
इसी तरह दवा निर्माण क्षेत्र की विभिन्न कंपनियों को शामिल करने वाली ड्रग पार्क परियोजनाओं के लिए महाराष्ट्र राज्य एक महत्वपूर्ण राज्य था। यह प्रोजेक्ट करीब तीन हजार करोड़ रुपए का था। इससे प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से 50 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके लिए महाराष्ट्र सरकार रत्नागिरी में रोहा और मुरुड के बीच जगह मुहैया कराने की कोशिश कर रही थी। दोनों तहसीलों में कुल पांच हजार एकड़ जमीन पर विचार किया जा रहा था। लेकिन 1 सितंबर को केंद्र सरकार ने इसके लिए हिमाचल प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश को मंजूरी दे दी।
पिछले हफ्ते केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र सरकार से 424 करोड़ के चिकित्सा उपकरण निर्माण परियोजना को खारिज कर दिया। इस परियोजना को औरंगाबाद के औरिक सिटी में स्थापित किया जाना था। लेकिन अब इसे तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में स्थानांतरित कर दिया गया है। इससे पहले 2020 में महा विकास अघाड़ी सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दी थी। इससे तीन हजार लोगों को रोजगार मिलने वाला था।

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