हसनत जमीओ खिसालही(अच्छी हैं आपकी तमाम खसलतें) सल्लू अलैहि व आलही

लेख

रईस खान
पैग़म्बरे
इस्लाम हज़रत मुहम्मद ( सल्ल० ) के वंशज हज़रत इबराहीम थे । हज़रत इबराहीम का समय 2160 से 1985 ई ० पूर्व है । चार हज़ार वर्ष पूर्व वे अपने देश इराक़ से निकले और अपने छोटे पुत्र इस्माईल को हिजाज़ ( अरब ) के एक निर्जन स्थान ( मक्का ) में बसा दिया । हज़रत इस्माईल बड़े हुए तो उन्होंने जुरहुम समुदाय की एक सुचरित्र कन्या से विवाह कर लिया । उनके द्वारा इस रेगिस्तानी वातावरण में एक नस्ल तैयार हुई जिसके अन्दर उच्च मानवीय गुण थे , क्योंकि वहाँ सामाजिक जीवन और सभ्यता का कोई प्रभाव नहीं पड़ा था । यह स्थान शहर से काफी दूरी पर होने के कारण सामाजिक सभ्यता की सारी बुराईयों से दूर था । प्राकृतिक वातावरण में रहने के कारण उनके अन्दर सत्य – निष्ठा , साहस , वीरता और ईमानदारी जैसे मानवीय गुण पूरी तरह विद्यमान थे। यही सबब था कि सभ्य समाज की तुलना में उनके अन्दर यथार्थ को समझने की योग्यता बहुत अधिक थी।

हज़रत इबराहीम अपने धार्मिक प्रचार की यात्रा के बीच कभी – कभी मक्का आते और घर वालों की देख रेख करते । जब हज़रत इस्माईल बड़े हुए तो हज़रत इबराहीम ने उनको साथ लेकर मक्का में एक अल्लाह की इबादत के लिए एक छोटा – सा घर अपने हाथों से बनाया । हज़रत इबराहीम ने उस घर की देख – रेख और उसका उत्तरदायित्व हज़रत इस्माईल को सौंपा और खुदा से इस्माईल के वंश के विस्तार ( proliferation ) के लिए दुआ की । काबा पृथ्वी पर पहला घर था जो केवल एक खुदा की इबादत के लिए बनाया गया।

हज़रत इस्माईल की साठवीं पीढ़ी के अंतराल के बाद अब्दुल मुत्तलिब ने जन्म लिया । इस समुदाय का नाम कुरेश था । अरब के सारे परिवारों में करैश का परिवार सर्वाधिक आदरणीय एवं श्रेष्ठ समझा जाता था । इस परिवार में बड़े – बड़े और सम्मानित व्यक्तियों ने जन्म लिया था । उदाहरणार्थ ( अदनान , नज़ , फ़िर , कुसइ बिन किलाब ) इत्यादि । कुसइ अपने समय में ख़ाना काबा ( मक्का में खुदा का घर ) के अधीक्षक बनाए गए । इस कारण से उनके यश एवं कीर्ति में बहुत अधिक वृद्धि हुई । कुसइ ने बहुत बड़े – बड़े कार्य किए।

कुसइ से पूर्व कुरैश के पारिवारिक जन विभिन्न स्थानों पर अव्यवस्थित तौर पर थे। कुसइ ने इन सबको मक्का में काबा के निकट बसाया। उनके लिए मकान बनवाए और उनको संगठित कर एक छोटा सा साम्राज्य स्थापित किया । इससे अरब में उनको राजनैतिक प्रतिष्ठा प्राप्त हो गई। यहां से उनका ऐतिहासिक युग प्रारंभ होता है ।

काबा समस्त अरब का केंद्र था। हज के अवसर पर हज़ारों लोग यहां दर्शन के लिए आते थे । कुसइ से पूर्व यहां उनके आदर – सत्कार का कोई उचित प्रबन्ध न था । कुसइ ने कहा- इन हाजियों का आदर – सत्कार करना हमारा कर्तव्य है । इस कार्य के लिए उन्होंने नियमित धनराशि आवंटित की । इस धन से हाजियों के भोजन का प्रबंध किया जाता था।

यह कार्य उनके बाद उनके परिवार जन करते रहे । यही कारण था कि कुरैश का समूचे अरब में अत्यधिक आदर था। अरब में अधिकांश लूट – मार का रिवाज था जिसके कारण मार्ग सुरक्षित न थे । काबा के प्रबंधक होने के कारण कुरैश के काफिले को कोई नहीं लूटता था। वे शान्तिपूर्वक व्यापार की सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाते थे । अब्दुल – मुत्तलिब , जो पैगम्बर मुहम्मद ( सल्ल ० ) के दादा थे , काबा के अधिक्षक कार्यकाल में बहुत – से कार्य किए । उनमें सर्वश्रेठ कार्य यह था कि ज़मज़म का कुआँ जो बंद होकर गुम गया था उसको कठोर परिश्रम से , साफ कराया। इससे उनका सम्मान और अधिक बढ़ गया।

अब्दुल – मुत्तलिब के दस पुत्र थे जिनमें से पांच अत्यधिक प्रसिद्ध हुए। एक अब्दुल्लाह जो पैग़म्बर मुहम्मद ( सल्ल० ) के पिता थे । दूसरे अबू – तालिब जो यद्यपि इस्लाम नहीं लाए परन्तु वे अपने अंतिम समय तक आपके अभिभावक बने रहे । तीसरे हज़रत हमज़ा और चौथे हज़रत अब्बास । आपके इन दोनों चचाओं ने इस्लाम कुबूल किया । पांचवें अबू – लहब । अबू – लहब अपनी इस्लाम दुश्मनी में बहुत मशहूर हुआ ।

अब्दुल – मुत्तलिब के पुत्र अब्दुल्लाह में अरब के सारे विशिष्ट गुण थें । अब्दुल्लाह का विवाह आमिना से हुआ जो ज़ोहरा वर्ग के मुखिया वहब बिन अब्द मुनाफ़ की पुत्री थीं । वे कुरैश के एक उच्च वर्ग की श्रेष्ठ और आदरणीय स्त्री मानी जाती थीं । इन्हीं अब्दुल्लाह और आमिना से मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुल मुत्तलिब का जन्म हुआ जो मानवता के सारे उत्कृष्ट गुणों का संपूर्णतया उदाहरण थे । आपके जन्म से पूर्व ही आपके पिता अब्दुल्लाह का देहांत हो चुका था।

मुहम्मद ( सल्ल ० ) का जन्म 9 रबी अल – अव्वल ( 22 अप्रैल 571 ई ० ) हुआ । आपके जन्म का समाचार दादा अब्दुल मुत्तलिब को मिला तो वह आपको लेकर काबा गए । वहां उन्होंने नवजात शिशु के लिये अल्लाह का धन्यवाद किया और दुआएं मांगीं । आपके जन्म के सातवें दिन अब्दुल मुत्तलिब ने आपका अकीका ( बच्चा पैदा होने के बाद बाल मुंडवाने और खाना खिलाने की रीति ) किया और आपका नाम ‘ मुहम्मद ‘ रखा । अकीका के इस समारोह में समस्त कुरैश वर्ग सम्मिलित था।

मुहम्मद का नाम अरब में नया था । कुरैश ने इस असमान्य नाम रखने का कारण पूछा तो अब्दुल मुत्तलिब ने कहा- ताकि सारे संसार में मेरे बेटे की प्रशंसा की जाए ।

” मुहम्मद ( सल्ल ० ) इस प्रकार युवावस्था को पहुंचे कि अल्लाह आपकी देख – रेख कर रहा था । अज्ञानता की गंदगी से आपको बचाए हुए था । क्योंकि अल्लाह चाहता था कि वो आपको सम्मान और पैग़म्बरी प्रदान करे । यहां तक कि आप इस बुलंदी को पहुंचे कि आप अपनी क़ौम के अन्दर पौरूष गुणों में सबसे श्रेष्ठ और सदाचारिता वाले बन गए । वर्ग में प्रतिष्ठित और पड़ोसियों में सबसे अच्छे पड़ोसी बन गए । शान्त चित्त , आचरण गंभीर , सहिष्णुता तथा क्षमावान बन गए । बातचीत में सबसे अधिक यथार्थवादी ; अमानतदारी में सबसे आगे , अर्थात् दुष्टता और बुराई से आप सबसे अधिक दूर हो गए । यहां तक कि आपको मक्का में अल अमीन ( विश्वसनीय ) कहा जाने लगा । ” ( सीरत इबने हिशाम – 197 )

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