बची रहेगी हेमंत सोरेन की कुर्सी…!

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अजय भट्टाचार्य
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तीन दिन से झारखंड (Jharkhand) के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) को लेकर सियासी अटकलबाजियों का बाज़ार गर्म है। गुरुवार को बंद लिफाफे में चुनाव आयोग की रिपोर्ट को मीडिया ने ‘सूत्रों’ के हवाले से उजागर करते हुए शोर मचा दिया कि हेमंत की कुर्सी जा रही है। यह आधुनिक भारत की पत्रकारिता है जिसे किसी की जमानत से पहले कथित ‘सूत्र’ बता देते हैं कि अमुक को 14 दिन की जेल हिरासत होगी। खबर के चार-पञ्च घंटे बाद अदालत वही फैसला देती है जी ‘सूत्रों’ के हवाले से मीडिया परोस चुका था। ठीक इसी तरह चुनाव आयोग की सोरेन संबंधी रिपोर्ट को लेकर हो रहा है। बंद लिफफेकी जानकारी मीडिया को किसने लीक की? जिस लिफाफे को यह लेख लिखे जाने तक झारखंड के राज्यपाल ने खोला तक नहीं है, उनके हवाले से सोरेन को हटाने की खबरों ने भौकाल बना रखा है।

इसी साल फरवरी में भाजपा ने राज्यपाल रमेश बैस को हेमंत सोरेन पर मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए रांची के अनगड़ा में पत्थर की खदान लीज पर लेने की शिकायत की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को रांची में एक घर से दो एके -47 राइफलें जब्त कीं थी, जो कथित तौर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सहयोगी प्रेम प्रकाश के यहां से मिली। ये हथियार अवैध हैं या नहीं यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया, लेकिन केंद्रीय एजेंसी ने इन्हें अपने कब्जे में ले लिया है।
इधर हेमंत सोरेन ने कहा है कि ऐसा लगता है कि भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janata party) के नेताओं, जिनमें एक सांसद और उनकी कठपुतली पत्रकार बिरादरी ने खुद से निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट का मसौदा तैयार किया है, जो अभी सीलबंद है। मान लिया जाये कि सोरेन की विधानसभा सदस्यता जाना तय है तब भी झारखंड की गठबंधन सरकार को कोई खतरा नहीं हैं। हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है कि झारखंड के अंदर बाहरी ताक़तों का गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह ने 20 सालों से राज्य को तहस-नहस करने का संकल्प लिया था। जब उन्हें 2019 में उखाड़ कर फेंका गया तो वे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं कि हम यहां टिक गए हैं। चुनाव आयोग की अनुशंसा पर कार्रवाई करते हुए राज्यपाल हेमंत सोरेन को विधानसभा सदस्यता के लिए अयोग्य करार दे सकते हैं। इसके बाद राज्यपाल का आदेश विधानसभा अध्यक्ष को जाएगा. अयोग्य करार दिए जाने के बाद हेमंत सोरेन के पास दो विकल्प बचते हैं। सबसे पहले तो उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा। उसके बाद महागठबंधन की बैठक करके, उसमें उनके परिवार के किसी सदस्या को नेता चुना जा सकता है और उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया जा सकता है। ध्यान रहे कि हेमंत सोरेन को कथित रूप से अयोग्य करार दिया जा रहा है लेकिन उन्हें चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा रहा है. ऐसे में वह दोबारा महागठबंधन का नेता चुने जाने के बाद दोबारा मुख्यमंत्री बन सकते हैं। ऐसे में उन्हें छह महीने में चुनाव जीतना होगा। इसकी संभावना भी ज्यादा जताई जा रही है। हेमंत सोरेन की वकीलों की टीम ने अयोग्य करार दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की हुई है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा गया कि उस मीडिया रिपोर्ट से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अवगत हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की गयी है। मीडिया रिपोर्ट्स में ये बातें चल रही हैं. लेकिन, अब तक इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय तक कोई सूचना नहीं पहुंची है। न तो निर्वाचन आयोग की ओर से न ही राज्यपाल की ओर से। उधर पुराने भाजपाई और वर्तमान में जमशेदपुर पूर्वी के निर्दलीय विधायक सरयू राय ने ट्वीट कर कहा है कि भारत के निर्वाचन आयोग ने झारखंड के राज्यपाल के पास अपनी अनुशंसा भेज दी है कि हेमंत सोरेन भ्रष्ट आचरण के दोषी पाये गये हैं। फलतः ये विधायक नहीं रह सकते।

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