हे विरहणी व्यर्थ के अलाप गाना छोड़ दे… नागपुर काव्योत्सव में शब्दों की फुहार

मुंबई साहित्य

न्यूज स्टैंड18 नेटवर्क
नागपुर।
यहां के क्लार्क टाउन स्थित गोकुल हरे कृष्णा अपार्टमेंट के श्री कृष्ण धाम में वसंतपंचमी की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें नागपुर सहित मुंबई से आए कवियों ने एक से बढ़कर रचनाएं सुनाएं। वीर रस के साथ हास्य व्यंग्य और गीत-गजल में डूबी शाम का मजा उपस्थित लोगों ने खूब जी भरकर लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरल गीता के रचनाकार व वरिष्ठ पत्रकार अजय भट्टाचार्य ने सरल गीता के दोहों के साथ किया। इसके बाद नागपुर की युवा कवयित्री श्रद्धा पोफली ने वीररस की कविता से समा बांध दी। उन्होंने ‘हे विरहणी व्यर्थ के अलाप गाना छोड़ दे, वेदना के फिर वही संताप गाना छोड़ दे… पढ़कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। इसके बाद सुप्रसिद्ध शाय़र शमशाद शाद ने ‘क्या विषाद गैरों की, अपना ही गिराता है। दुश्मनी पर आए तो भाई भी गिराता है, डालियों पर देखें हैं हमने जर्द पत्ते भी, वक्त पूरा होता है वो तभी गिराता है।’ शेर के साथ खूब तालियां बटोरी। सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार मधु गुप्ता की ‘खिलते हुए गुलाब किताबों में रख दिए, हमने सभी जवाब किताबों में रख दिए, ओ आयेंगे ये कहेंगे वो कहेंगे हम, दिल के सभी हिसाब किताबों में रख दिए… इन लाइनों ने काव्य गोष्ठी को शिखर की ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इसी तरह उर्दू के प्रख्यात शाय़र शमशाद शाद की शायरी ‘सेहरा की विरानी से मर जाते हैं, कुछ बेचारे पानी से मर जाते हैं। कितनी मुश्किल में जीते हैं लोग यहां, कितनी आसानी से मर जाते हैं… ने शमा बांध दिया।
प्रा.मनीष वाजपेई ने एक से बढ़कर रचनाएं सुनाकर लोगों को लोटपोट कर दिया। जो लगती थी कभी चंद्रमुखी वो ज्वालामुखी सा अहसास करवा रही है, जिंदगी अनुभव के नए – नए पाठ पढ़ा रही है… खूब सराही गई।
देश की जानीमानी कवियित्री डॉ वसुन्धरा राय, कवयित्री सरिता सरोज, कवियित्री गौरी कनोजे व पत्रकार विजय यादव ने भी अपनी रचनाएं सुनाकर वाहवाही लूटी। इस मौके पर स्व. विश्वनाथ राय बहुउद्देशीय संस्था की ओर से आयोजक डॉ वसुंधरा राय ने सभी सम्मानित अतिथियों का उपहार चिन्ह देकर सम्मानित किया व सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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