Rajya sabha Election: घोड़ा बाजार बनता राज्यसभा चुनाव

राजनीति राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
महाराष्ट्र
की तरह राजस्थान में भी राज्यसभा का चुनाव दिलचस्प हो गया है। महाराष्ट्र में राज्यसभा की छठी सीट और राजस्थान में चौथी सीट के लिए घोडा बाजार भीतर ही भीतर गुलजार हो रहा है। उद्योगपति और मीडिया बैरन सुभाष चंद्रा ने भी राजस्थान में भाजपा के भरोसे राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है। इसलिए राजस्थान में अब चौथी सीट के लिए मुकाबला होगा। यह अलग बात है कि पहले ही कांग्रेस ने तीन और भाजपा ने एक उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी थी। ताजा घटनाक्रम में सुभाष चंद्रा की एंट्री से मुकाबला रोचक हो गया है। पिछली बार चंद्रा भाजपा की मेहरबानी से हरियाणा निर्दलीय चुनाव जीतकर आए थे। राजस्थान में भाजपा के पास अपना घोषित उम्मीदवार जिताने के बाद 30 सरप्लस वोट बचेंगे जबकि वहीं सुभाष चंद्रा को जीतने के लिए 11 अतिरिक्त वोट चाहिए। दूसरी तरफ कांग्रेस को अपना उम्मीदवार जिताने के लिए 15 अतिरिक्त वोट चाहिए। 200 सीटों वाली राजस्थान विधानसभा में राज्यसभा के एक उम्मीदवार के लिए 41 वोट चाहिए। कांग्रेस के पास 108 और भाजपा के पास 71 विधायक हैं। इसके अलावा 13 निर्दलीय, 3 आरएलपी, 2 बीटीपी, दो माकपा और एक रालोद विधायक है। भाजपा को चौथी सीट के लिए निर्दलीयों पर भरोसा है। जबकि कांग्रेस 11 निर्दलियों, 2 सीपीएम और एक रालोद के समर्थन के बूते चौथी सीट पर ताल ठोंक रही है। मतलब साफ है जो जितने निर्दलीय अपने पाले में खींच पाने में सफल होगा चौथी सीट उसी की होगी।

भाजपा के समर्थन से सुभाष चंद्रा राजस्थान में राज्यसभा चुनाव के लिए चौथे उम्मीदवार हैं। राजस्थान में राज्यसभा के लिए चार सीटें हैं. दो कांग्रेस और तीसरी भाजपा आसानी से जीत लेगी। चौथी सीट के लिए मुकाबला होगा। कांग्रेस के तीन उम्मीदवार रणदीप सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी हैं। भाजपा उम्मीदवार घनश्याम तिवाड़ी पूर्व विधायक और वसुंधरा सरकार में मंत्री रहे हैं। राजस्थान में अगले साल विधानसभा चुनाव है और जिस तरह कांग्रेस ने तीनों बाहरी उम्मीदवार उतारे हैं, उससे राज्य के कुछ कांग्रेस विधायकों में असंतोष है। कांग्रेसी विधायक खुलकर नाराजगी भी व्यक्त कर चुके हैं।
इधर महाराष्ट्र में राज्यसभा की छह सीटों के लिए सात उम्मीदवार मैदान में हैं। यहाँ जीतने के लिए हर उम्मीदवार को 42 वोट चाहिये। इस लिहाज से महाराष्ट्र विकास आघाडी के चार और भाजपा के दो उम्मीदवार आसानी से जीत सकते हैं मगर भाजपा ने तीन उम्मीदवार उतारकर छठी सीट के लिये लड़ाई को रोचक बना दिया है। वर्तमान में आघाडी के पास 169 (शिवसेना 55, राकांपा 54 और कांग्रेस 44, बविआ 3, सपा 2, प्रजपा 2, किसान मजदूर पार्टी 1 और 8 निर्दलीय) विधायक हैं। मतलब आघाडी में शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के कुल अतिरिक्त 27 वोट और बाकी सहयोगी व निर्दलीय 16 मिलकर चौथी सीट के लिए 43 वोट हैं। इसके अलावा एआईएमआईएम के 2, माकपा के 1, मनसे 1, स्वाभिमानी किसान पार्टी 1 न तो भाजपा के साथ हैं और न आघाडी के। भाजपा के 106 विधायक हैं और उसे आरएसपी 1, जनसुराज्य 1 व 5 निर्दलियों का समर्थन मिलाकर कुल 113 विधायक बनते हैं जो तीन उम्मीदवारों को जिताने वाली संख्या से 13 कम है। इन 13 वोटों के लिए घोडा बाजार सजा हुआ है। देखिये किस तरफ के घोड़े ज्यादा बिकाऊ साबित होते हैं।

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