अमृत महोत्सव में गायब स्वदेश झंडा

लेख

अजय भट्टाचार्य
आजादी
के 75 वर्ष पूरे होने की ख़ुशी में मनाये गये अमृत महोत्सव आदि के सरकारी चोंचलों के बीच सरकार बहादुर के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे नारे दम तोड़ दिए। आंध्र प्रदेश के चेनेथा कर्मिका संघम के उपाध्यक्ष पिल्ललमरी नागेश्वर राव ने आजादी के अमृत महोत्सव के सरकारी तामझाम पर सवाल उठाये हैं।
राव के मुताबिक न केवल आंध्र प्रदेश में, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी एक भी बुनकर को राष्ट्रीय ध्वज का ऑर्डर नहीं मिला। इससे ज्यादा दुख की बात यह है कि झंडे बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अधिकांश कपड़े चीन जैसे देशों से आयात किए गए हैं।

स्वदेशी का प्रतीक और पहले के झंडे पर रत्नम (चक्र) हथकरघा बुनकरों का प्रतिनिधित्व करता है। हम आजादी का अमृत महोत्सव बड़े धूमधाम से मनाते हैं, लेकिन बुनकरों को क्यों भूल जाते हैं? हम स्वदेशी आंदोलन के कारण को क्यों भूल जाते हैं, जो हमारे स्वतंत्रता संग्राम के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक था? न तो राज्य सरकार और न ही केंद्र ने राज्य स्तर पर हथकरघा बुनकर समितियों या केंद्र स्तर पर निर्माण कंपनियों के साथ राष्ट्रीय ध्वज के लिए आदेश दिया था। इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि खादी ग्रामीण उद्योग को भी कोई आदेश नहीं दिया गया।

आंध्र प्रदेश चेनेथा कर्मिका संघम की अध्यक्ष हेमा सुंदर राव के अनुसार, 30 दिसंबर, 2021 को ध्वज संहिता में संशोधन के अनुसार, हाथ से काते और हाथ से बुने हुए कपड़े के अलावा पॉलिएस्टर या मशीन से बने झंडे से बने झंडे की अनुमति है। हम सहमत हैं कि ध्वज संहिता में संशोधन झंडे बनाने के लिए कपास के अलावा मशीन से बने कपड़े की अनुमति देता है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि हथकरघा बुनकरों को झंडे के उत्पादन से पूरी तरह दूर रखा जाना चाहिए। वे अफ़सोस जताते हुए कहती हैं कि दुर्भाग्य से ऐसा ही हुआ। राज्य में हथकरघा बुनकर भी स्कूली छात्रों के लिए वर्दी के कपड़े की आपूर्ति और उत्पादन में हथकरघा पर बिजली करघों को चुनने से नाखुश हैं। राव के मुताबिक आंध्र प्रदेश राज्य हथकरघा बुनकर सहकारी समिति (एपीसीओ) ने नागरी में पावरलूम के साथ 22 करोड़ रुपये की स्कूल वर्दी सामग्री के लिए ऑर्डर देने के साथ हथकरघा बुनकरों के लिए गारंटीकृत काम खो दिया था।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं। हिंदी सामना सहित कई अखबारों के नियमित स्तंभकार हैं।)

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