Jayprakash Narayan: बीजेपी को जेपी पर प्यार क्यों उमड़ा

राजनीति लेख

अजय भट्टाचार्य
भारतीय
जनता पार्टी (Bharatiya Janata party) अपनी सुविधानुसार अपनी राजनीतिक जमीन को बचाने, बनाने, अपनाने में धुर विरोधी विचारधारा को भी गले लगाने से नहीं चूकती। राजनीतिक कूटनीति की इसी लीक पर चलते हुए अब लोकनायक जयप्रकाश नारायण (Jayprakash Narayan) भाजपा को अपने लगने लगे हैं। मंगलवार को बिहार (Bihar) के सारण जिले में लोकनायक के पैतृक गांव सीताब दियारा में पहुंचकर केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने जेपी अर्थात जयप्रकाश नारायण की जयंती मनाई। साथ ही बिहार के राजनीतिक विरोधियों पर इस दिग्गज नेता की समाजवादी विचारधारा को खत्म करने के लिए हमला भी किया। शाह ने राज्य में 2024 के लोकसभा और 2025 के राज्य चुनावों के लिए भाजपा के लिए प्रचार करने के अवसर का भी इस्तेमाल किया। बोले- जो नेता जेपी के आंदोलन से उनका नाम लेकर उभरे, वे अब सिर्फ सत्ता के लिए कांग्रेस (Congress) की गोद में बैठे हैं। आज पांच बार पाला बदलने वाले लोग राज्य के मुख्यमंत्री हैं। जेपी की 15 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण करने और ग्रामीण विकास और ‘सर्वोदय’ के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए एक शोध केंद्र की घोषणा करने के बाद सीताब दियारा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शाह बोले कि जेपी के शिष्यों ने जेपी के सिद्धांतों या उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग की राजनीति नहीं थी। समाजवादी नेता ने अपने जीवन में सत्ता के लिए कुछ भी नहीं किया। बिहार के लोगों को यह तय करना है कि क्या वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार चाहते हैं जो जेपी के दिखाए रास्ते पर चलती है या गठबंधन जो सत्ता के लिए उनके रास्ते से भटक गया है। इसी बहाने शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जेपी के समकक्ष बनाने/दिखाने की कोशिश में कहा कि मोदी जेपी के जातिविहीन समाज के सपनों को पूरा कर रहे हैं और देश में 60 करोड़ लोगों के जीवन स्तर के उत्थान के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस और आपातकाल के खिलाफ अपने आंदोलन सहित नेता के जीवन और कार्यों को भी याद किया सीताब दियारा घग्गर नदी के नदी क्षेत्रों में पड़ता है और इसके कुछ हिस्से उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बलिया जिले के अंतर्गत आते हैं। एक महीने के भीतर शाह का यह दूसरा बिहार दौरा था। सीताब दियारा में उनकी जनसभा को विभिन्न हलकों में आधुनिक भारत की शीर्ष राजनीतिक हस्तियों के नाम का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने के भाजपा के प्रयासों के एक हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। जयप्रकाश नारायण महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi), वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) और अन्य के समान लीग में आते हैं। जेपी का नाम सार्वजनिक जीवन और सरकार में ईमानदारी, पारदर्शिता और ईमानदारी के कट्टर समर्थक के रूप में जाना जाता है। यही कारण है कि भाजपा द्वारा नीतीश (Nitish Kumar) और राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janta dal)) के अध्यक्ष लालू प्रसाद (Lalu Prasad Yadav) के खिलाफ हमले करने के लिए जेपी का नाम इस्तेमाल करना मुफीद लगता है। बिहार के लोगों के मन में समाजवादी नेता के लिए एक नरम कोना है, जो अभी भी उनके विचारों में रहता है और स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आपातकाल के खिलाफ आंदोलन तक के काल्पनिक कारनामे लोककथाओं का हिस्सा बन गए हैं। समाजवाद को जी भर कर कोसने वाली भाजपा और उसके समर्थक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) की मौत पर किन शब्दों में दिवंगत नेता को याद कर रहे थे, यह सोशल मीडिया पर देखा जा सकता है। वामपंथ को गरियाने में भाजपा पूरी ऊर्जा झोंक देती है मगर अपने मतलब के लिए उसे लेनिनवादी भगतसिंह (Bhagat Singh) और फॉरवर्ड ब्लाक के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस (subhash chandra bose) को अपनाने (चुराने) में कोई गुरेज नहीं है। राष्ट्रवाद के फर्जीवाड़े में पीडीपी से गलबहियां करना भी इसी सुविधा की राजनीति का उदाहरण है।

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