Jewar airport: जेवर हवाईअड्डे की फर्जी तस्वीर

उत्तर प्रदेश फीचर

अजय भट्टाचार्य
वर्ल्ड
आर्किटेक्चर डॉट ओर्ग ने 25 जनवरी 2019 को ज़ाहा हदीद आर्किटेक्ट्स की नई बीजिंग एयरपोर्ट टर्मिनल बिल्डिंग के लिए पहली विस्तृत निर्माण तस्वीरें जारी की थीं। नया हवाई अड्डा बीजिंग और लैंगफैंग, हेबै की सीमा पर स्थित उत्तरी चीन का हवाई यात्रा केंद्र बनकर उभरा है।

जेवर एयरपोर्ट के नाम से प्रचारित तस्वीर

उस रिपोर्ट में कहा गया था कि चाइनाडेली डॉट कॉम डॉट सीएन द्वारा जारी नई तस्वीरों से पता चला था कि आंतरिक निर्माण का 80 प्रतिशत पहले ही पूरा हो चुका है और सभी बाहरी कार्य समाप्त हो चुके हैं। 700,00 वर्ग मीटर टर्मिनल भवन और 80,000 वर्ग मीटर जमीन परिवहन केंद्र को भविष्य के विकास के लिए अत्यधिक उपयोग किए जाने वाले केंद्रित, ऊर्जा कुशल और अनुकूलनीय भवन के रूप में डिजाइन किया गया है।

नई इमारत में 6-पियर रेडियल डिज़ाइन है जो यात्रियों को अंदर जाने के लिए असाधारण सुविधा और लचीलापन प्रदान करता है। आधिकारिक तौर पर बीजिंग डैक्सिंग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में नामित होने के लिए तैयार, नया टर्मिनल भवन सितंबर 201 9 में जनता के लिए खोला दिया गया। अब आप कहेंगे कि इस जानकारी को भारत में साझा करने का क्या तुक है? उसका जवाब यह है कि गुरुवार को उत्तर प्रदेश में एशिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के उद्घाटन के समय और उसके बाद से जो हवा-हवाई चल रही है जिसे दुनिया की इकलौती “विश्वगुरु” सरकार के चेले-चपाटे पूर्ण भक्तिभाव से समर्थन-समर्पण कर रहे हैं।

ज़ाहा हदीद की बीजिंग एयरपोर्ट टर्मिनल की तस्वीर

गोदी मीडिया वर्तमान केंद्रीय सत्ता प्रतिष्ठान का बड़ा काम बताते नहीं अघा रही है और भाजपा के बड़े-बड़े नेता जिस फोटो को धडाधड ट्वीट कर उत्तर प्रदेश को देश का सर्वश्रेष्ठ प्रान्त घोषित कर रहे हैं वह तस्वीर उसी चीनी एअरपोर्ट की है जिसे झूठ का कापी राईट रखने वाली सरकार अपनी उपलब्धि बताकर लाखों रोजगार बाँटने का प्रचार भी कर रही है। ज़ेवर के संभावित एयरपोर्ट का चुनाव के चलते जनता के पैसे से उद्घाटन समारोह प्रायोजित कर लिया गया। हर दूसरे दिन उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री की सरकारी खर्च पर ऐसे ही उद्घाटनों से रैली करा ली जा रही हैं। शर्मनाक यह है कि चीन की राजधानी बीजिंग के हवाई अड्डे की ईराक़ में पैदा हुईं आर्किटेक्ट जहा हदीद द्वारा बनाई गई डिज़ाइन को ज़ेवर हवाई अड्डे की डिज़ाइन बताकर केंद्र सरकार के मंत्रियों , एक सरकारी ट्विटर हैंडलऔर उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री द्वारा ट्विटर पर वायरल कर दिया गया। उप्र के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, अर्जुनराम मेघवाल, मायगवर्नमेंटहिंदी, प्रह्लाद सिंह पटेल, मायगवर्नमेंटइंडिया, सुनील यादव, पंकज सिंह,अन्नपूर्णा देवी के ट्वीट पर एक ही वाक्य लिखा था, “एशिया के सबसे बड़े एअरपोर्ट के रूप में नोएडा इंटरनेशनल एअरपोर्ट अपने साथ 35000 करोड़ का निवेश भी लाने जा रहा है। इससे एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा और क्षेत्र में विकास की गति भी तेज होगी।“ अब यहाँ यह मर पूछिए कि उप्र के मुख्यमंत्री ने जो लाखों करोड़ रुपयों के औद्योगिक एमओयू पर हस्ताक्षर किये और कराए थे उनमें से कितना निवेश उप्र में आया?
इसी तरह पिछले शुक्रवार को प्रधानसेवक मोदी ने बुंदेलखंड स्थित महोबा में इसी तरह के एक उद्घाटन समारोह किया था। उसके बाद जय-जयकारी समुदाय ने ट्वीटर पर जिस तस्वीर को चेंपा वह तस्वीर दक्षिण भारत के एक बांध की थी। भावनी बांध परियोजना से बुंदेलखंड की 3800 हेक्टेयर जमीन सिंचाई से लहलहा उठेगी और 20 गांवों के 8062 किसान इसका फायदा उठाएंगे। मगर तस्वीरों और खबरों के फर्जीवाड़े पर नजर रखने वाली एक वेबसाइट ने विकास के इस आभासी जलवे की हवा निकाल दी।

जो तस्वीर भावनी बांध की बताकर वाहवाही लूटी जा रही थी वह दरअसल 7 साल पहले बंगलुरु से प्रकाशित डेक्कन क्रॉनिकल अख़बार में छपी श्रीशैलम बांध की है। यह तेलंगाना में नागरकुरनूल जिले में कृष्णा नदी और आंध्र प्रदेश में कुरनूल जिले में बनाया गया है। उसी दिन पीएम इंडिया की वेबसाइट ने एक प्रेस विज्ञप्ति में भी इसी तस्वीर के साथ कहा गया है कि मोदी द्वारा अर्जुन सहायक परियोजना, रतौली वियर परियोजना, भावनी बांध परियोजना और मझगांव-मिर्च स्प्रिंकलर परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इससे पहले कोलकाता के एक उड़ानपुल को उप्र का बताकर विकास की मंदाकिनी बहाने पर बाबाजी की किरिकिरी हो चुकी है।

(लेखक देश के जाने माने पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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