न्यायमूर्ति ललित: भारत के अगले प्रधान न्यायाधीश

राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
भारत
के प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण ने सरकार से अपने उत्तराधिकारी के रूप में न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित के नाम की सिफारिश की है। मुख्य न्यायाधीश ने गुरुवार को सुबह न्यायमूर्ति ललित को व्यक्तिगत रूप से सिफारिश के अपने पत्र की एक प्रति सौंपी। एक अंग्रेजी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार मुख्य न्यायाधीश सचिवालय को 3 अगस्त को केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री के कार्यालय से एक संदेश प्राप्त हुआ। इसमें मुख्य न्यायाधीश से उत्तराधिकारी के नाम की सिफारिश करने का अनुरोध किया गया था।
परंपरा के अनुसार, मौजूदा मुख्य न्यायाधीश अपने उत्तराधिकारी के नाम की सिफारिश तभी करते हैं जब उन्हें कानून मंत्रालय से ऐसा करने का आग्रह किया जाता है। न्यायमूर्ति रमना 26 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिसके बाद न्यायमूर्ति ललित भारत के 49वें मुख्य न्यायाधीश का पद संभालेंगे। उनका कार्यकाल बेहद छोटा रहने वाला है और वो 8 नवंबर, 2022 तक इस पद पर बने रहेंगे। वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय के दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति ललित ने जून 1983 में एक अधिवक्ता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी।
जस्टिस ललित महाराष्ट्र के रहने वाले हैं और कई चर्चित केसों से भी जुड़े रहे हैं। इसमें काला हिरण शिकार मामले में अभिनेता सलमान खान का केस भी शामिल है। उन्होंने भ्रष्टाचार के एक मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और अपनी जन्मतिथि से जुड़े मामले में पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह का भी प्रतिनिधित्व किया है। पांच जजों की पीठ में 3-2 के बहुमत से इस पर फैसला हुआ था और जस्टिस ललित ने ‘तीन तलाक’ को असंवैधानिक करार दिया था।
न्यायमूर्ति ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत एक मामले में बंबई उच्च न्यायालय के ‘‘त्वचा से त्वचा के संपर्क” संबंधी विवादित फैसले को खारिज कर दिया था।
शीर्ष अदालत ने कहा था कि यौन हमले का सबसे महत्वपूर्ण घटक यौन मंशा है, बच्चों की त्वचा से त्वचा का संपर्क नहीं। एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में न्यायमूर्ति ललित की अगुवाई वाली पीठ ने कहा था कि त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार के पास केरल में ऐतिहासिक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रबंधन का अधिकार है। नौ नवंबर, 1957 को जन्मे न्यायमूर्ति ललित ने जून 1983 में एक वकील के रूप में पंजीकरण कराया था और दिसंबर 1985 तक बम्बई उच्च न्यायालय में वकालत की थी। वह जनवरी 1986 में दिल्ली आकर वकालत करने लगे और अप्रैल 2004 में उन्हें शीर्ष अदालत द्वारा एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में सुनवाई के लिए उन्हें केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published.