Kashmir Files: कश्मीर फाइल्स-2 कब बनेगी !

फीचर मनोरंजन

अजय भट्टाचार्य
फिल्म
मेरा विषय नहीं है। एक फिल्म रिलीज़ हुई है ‘कश्मीर फाइल्स’ नाम से जिसमें 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं (विशेषकर कश्मीरी पंडितों) के नरसंहार व प्रताड़ना का चित्रण किया गया है। 19 जनवरी 1990 की रात कश्मीर घाटी में मुस्लिम कट्टरपंथियों के आक्रमण की विभीषिका को दर्शाया गया है। निश्चित ही कश्मीरी हिदुओं के साथ जो हुआ वह घोर निंदनीय, पीड़ादायक और शर्मिंदगी से भरपूर काला इतिहास है। केंद्र में सत्तासीन राष्ट्रीय मोर्चा सरकार जिसमे भाजपा भी शामिल थी, ने कभी कांग्रेस के चहेते रहे और बाद में भाजपा के लडैते बने जगमोहन मल्होत्रा को कश्मीर का राज्यपाल बनाकर भेजा। जगमोहन के राज्यपाल बनते ही दो दिन बाद कश्मीर सुलग उठा। फ़िल्मकार ने कश्मीरी हिंदुओं के दमन पर फिल्म बनाकर पेश की है और हिंदुओं के साथ हुई क्रूरता, महिलाओं, युवतियों, बच्चियों के साथ हुए बलात्कार आदि की घटनाओं को इस फिल्म में दिखाया गया है। यह कश्मीर उपद्रव का एक चेहरा है जिसमें घाटी से कश्मीरी हिंदुओं को जिस तरह से बेदख़ल किया गया , जिस तरह उनके साथ दगाबाजी की गई और जिस तरह महिलाओं के साथ बलात्कार करके उनके शवों को और जीवित शरीरों को ही काट डाला गया उसे लिख पाना असंभव है। जिहादी इस्लामिक ताकतों ने कश्मीरी हिंदुओं पर ऐसा कहर ढाया कि उनके लिए सिर्फ तीन ही विकल्प थे – या तो धर्म बदलो, मरो या पलायन करो। उस वक़्त की केंद्र सरकार ने (जिसमें भाजपा भी शामिल थी) सारे देश से न सिर्फ इस बर्बरता को छुपाया बल्कि, तमाम तंत्र , मानवाधिकार, प्रशासन सब मुँह बंद करके बैठ गए।
महिला विषयों पर मुखरता से लिखने वाली निधि पाण्डेय उर्फ़ निधि नित्या लिखती हैं भारत का मुस्लिम आज तक उस बर्बरता और नफ़रत को काट रहा है जो उस वक़्त कश्मीर में हिंदुओं के साथ की गयी थी। आतंक और घृणा का बोझ पीढ़ियों को ढोना पड़ता है। आज का मुस्लिम समाज इस्लाम के सो कॉल्ड शुभचिन्तकों और अपने पूर्वजों की बोयी हुई नफ़रत को काट रहा है। 1990 के बाद पैदा हुआ मुसलमान बच्चा समझ ही नहीं पा रहा कि उससे इतनी नफ़रत आखिर क्यूँ की जाती है।
नफ़रत की बात यहीं खत्म नहीं हुई 1991 में घाटी में कश्मीरी हिंदुओ की रक्षा करने पहुंची फ़ौज के भीतर जो नफरत और बदले की आग भड़की हुई थी उसकी परिणीति…
कुनान पोशपोरा के रूप में सामने आई जिसका ज़िक्र कश्मीर फाइल्स में नहीं किया गया है…. डायरेक्टर में यदि वाकई पूरा सच दिखाने की हिम्मत है तो उनको कश्मीर फाइल्स पार्ट टू बनाना चाहिए। या उनको इसी फिल्म में पूरा सच दिखाना चाहिए था। कुनान पोशपोरा वाकिया भारतीय फौज पर लगा एक दाग है, जिस के मुताबिक भारतीय फौजीयों की एक टुकड़ी ने 1991 में जम्मू-कश्मीर के कुनान और पोशपोरा नाम के दो गावों के औरतों के साथ गैंगरेप किये थे। सब से छोटी रेप विकटिम की उम्र सिर्फ 14 साल थी। पुलिस रिपोर्ट में 23 औरतों ने अपने साथ रेप किये जाने की शिकायत दर्ज करवायी थी। 2007 में 40 औरतें जम्मू-कश्मीर ह्युमन राइटस कमीश्नन के पास इंसाफ की गुहार ले कर पहुँची थी। फौज और सरकार इस इल्ज़ाम को बेबुनियाद बताते हैं, जबकि घटना पर पहुँचने वाले पहले सरकारी अफसर और उस वक्त के कुपवाड़ा के डिप्टी कमिश्नर एस एम यासिन अपनी रिपोर्ट में लिखते हैं कि फौज ने “दरिंदो की तरह सलूक किया था।”
पर कश्मीर फाइल्स में इस दरिंदगी का कोई ज़िक्र नहीं है। फ़ौज के ख़िलाफ़ लिखना या बोलना देशद्रोह कहा जाएगा इसलिए फ़िल्म का अंत करते समय डायरेक्टर ने नहीं बताया कि कश्मीरी हिंदुओ के साथ हुई बर्बरता का बदला फ़ौज ले चुकी है। उस नफ़रत की कीमत भी औरतों ने चुकाई थी। हर धर्म का आदमी आखिरी बदला लेने के लिए औरतों का ही इस्तेमाल करता है । डायरेक्टर हिंदुओं के दिल में बदले की आग भड़का कर छोड़ देता है। पर लेखक सौरभ एम पांडे और विवेक अग्निहोत्री और निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने फ़िल्म के अंत तक ये नहीं बताया कि उस समय की केंद्र सरकार ने कुनान पोशपोरा भी छुपाया था ताकि सेना की इमेज खराब न हो। डायरेक्टर नहीं बताता की उनकी औरतों पर हुए बलात्कार का बदला लिया जा चुका है अब बस कश्मीरी हिंदुओ की घर वापसी बाकी है।
कश्मीर फाइल्स घाटी में हिंदुओं के साथ हुए अत्याचार का नंगा सच है पर कहानी का एक हिस्सा है। कश्मीर फाइल्स पार्ट टू बनाने का साहस अब कौन डायरेक्टर करता है मुझे बस इसका इंतजार है।
न्याय आज तक न उन कश्मीरी हिन्दू औरतों को मिला जिनको नोचा गया, काटा गया न न्याय कुनान पोशपोरा की उन औरतों को और 14 साल की बच्ची को मिला जिसे नोचा गया औऱ जिसकी इज़्ज़त तार-तार की गयी।
जाइये कश्मीर फाइल्स देखिये और अपने खून को और गर्म कीजिये। पर साथ ही कुनान पोशपोरा को भी ज़हन में रखिये। इसलिए नहीं कि हमारी फ़ौज ने बदला ले लिया था बल्कि इसलिए कि इतनी ही चीखें और दर्द हम उनकी औरतों को दे चुके हैं। एक वीडियो वायरल हुआ एक हिंदू का जिसने कश्मीर फाइल्स देखने के बाद कहा कि मैं दोषी भारत के सेक्युलर को मानता हूँ , वे गद्दार हैं यदि मेरा सगा भाई भी सेक्युलर होगा तो मैं उसे छोड़ दूंगा। भावना के आवेग में तर , हर हिन्दू थियेटर से बाहर आकर सेक्युलर हिंदुओं को कोस रहा है कि उन्होंने इन मुस्लिमों को स्पोर्ट किया और पाल रखा है। आप भी भर-भर कोसिये सेक्युलर हिन्दू और सेक्युलर मुसलमान को पर ये वे लोग हैं जिन्होंने हज़ार-हज़ार औरतों और बच्चियों की इज़्ज़त इस नफ़रत की बली चढ़ जाने से बचा रखी है।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं। मुंबई से प्रकाशित हिंदी दैनिक “दोपहर का सामना” के नियमित स्तंभकार हैं।)

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