Kerala: वलिया किनार के दिन सुधरे

फीचर राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
केरल
में कोचीन साम्राज्य (मूल रूप से पेरुम्बदप्पु स्वरूपम के रूप में जाना जाता है) के एकमात्र अवशेष पेरुंबदप्पु वलिया किनार को अब चार साल और तीन महीने के लंबे प्रयास के बाद पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किया जा रहा है। मलयालम में किनार का मतलब कुआं होता है। जबकि वलिया का अर्थ विशाल होता है। मालापुरम में वन्नेरी के पास आठवीं शताब्दी के वलिया किनार अर्थात बड़े कुएं की पहचान उस क्षेत्र के पास की गई, जहां कभी पेरुंबदप्पु स्वरूपम की प्रमुख जागीर स्थित थी। स्वरूपम एक शासक का घर है जो क्षेत्रीय क्षेत्रों को नियंत्रित करता है।
एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित खबर के मुताबिक 2015 में केरल सरकार ने कुएं को मलबे से भरने के कदमों पर स्थानीय निवासियों के विरोध के बाद कुएं को एक संरक्षित स्मारक घोषित किया। निवासी इस कुएं से पानी लेते थे। हालांकि, कुएं के पास एक जमीन के मालिक ने इसे निर्माण कचरे से भरने की कोशिश की। इसलिए स्थानीय नागरिकों कुएं की रक्षा के लिए ने वलियाकिनार संरक्षण समिति का गठन किया और इस कुएं को भरे जाने के खिलाफ आवाज उठाई। समिति के सदस्य वी मोहम्मद के अनुसार समिति का उद्देश्य भव्य पुराने कुएं की रक्षा करना था। पुरातत्व विभाग ने मार्च 2018 में कुएं की सुरक्षा के लिए प्रक्रिया शुरू की। यह 8.5 मीटर के व्यास के साथ एक अनूठा कुआं है। इसकी फिर से खुदाई करने के लिए तमिलनाडु से अनुभवी श्रमिकों को लाया गया तथा जेसीबी और क्रेन के उपयोग को कम से कम प्रयोग किया। पजहस्सिराजा पुरातत्व संग्रहालय कोझीकोड के प्रभारी अधिकारी के कृष्णराज ने वलियाकिनार की रक्षा के लिए परियोजना का नेतृत्व कर रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि 13 वीं शताब्दी के अंत तक कालीकट के ज़मोरिन की आक्रामक ताकतों के हमलों का सामना करने के बाद पेरुम्बदप्पु स्वरूपम के सदस्य कोडुंगल्लूर के पास तिरुवनचिकुलम में स्थानांतरित हो गए थे। जब वे बाद में कोचीन में स्थानांतरित हो गए, तो पेरुम्बदप्पु स्वरूपम कोचीन का राज्य बन गया। कृष्णराज के मुताबिक कुएँ की खुदाई के दौरान, पुरातत्व विभाग को कोई प्राचीन वस्तुएँ नहीं मिलीं जो स्वरूपम का हिस्सा थीं। मगर एक स्मारक की सफलतापूर्वक रक्षा करना जो अन्यथा इतिहास से मिटा दिया गया होता, एक बड़ी उपलब्धि है।“

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