खिराज_ए_अक़ीदत: 22,रबीउलअव्वल, सभी सूफी सिलसिलों से जुड़े हैं मौलाना शाह फ़ज़ले रहमा (र.अ)

इस्लाम के पन्ने से

हज़रत मौलाना शाह फ़ज़ले रहमा (र.अ) मल्लावां से गंजमुरादाबाद आकर जिस मस्जिद के प्रांगड़ में आकर ठहरे वहाँ मुरादशेर रह ० की मजार पहले से थी। नेविल ने उन्नाव के गजेटियर में लिखा है कि मुरादशेर रह ० मुगल बादशाह औरंगज़ेब के जमाने में इस स्थान पर आए और उनके नाम से ये गाँव बसा था।

हज़रत मौलाना शाह फ़ज़ले रहमा गंजमुरादाबादी (र.अ) ने 22 रबीउल अव्वल 1313 हिजरी में पर्दा किया था। और तब से अब तक इसी तारीख को उनका उर्स मनाया जाता है। एक दिन पहले नातिया मुशायरा आयोजित होता है जिसमें देश विदेश के शायर और जायरीन शामिल होते हैं। और अगले दिन से कई दिन चलने वाला भव्य मेला यहाँ लगता आ रहा है, अब भले ही यह छोटा हो गया।

हजरत मौलाना शाह फजले रहमा गंजमुरादाबादी (र.अ) का जन्म पहले रमजान मुबारक को 1208 हिजरी में हुआ था। वह अल्लाह और हमारे पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से अधिक प्रेम करते थे, ठीक उसी तरह जैसे हमारे पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और उनका परिवार (अहले बैत) अल्लाह से प्यार करते थे। जब भी वह चाहते कि उन्हे पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के दीदार हो तब वह उन्हें अपने सामने पाते।

उन्होंने अपना पूरा जीवन इस्लाम, सुन्नत, प्रेम और मानवता के गुण सिखाने में व्यतीत किया। उन्होंने अपना पूरा जीवन मानव जाति के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उनके पास कादरी, चिश्ती, नक्शबंदी और सोहरवर्दी सिलसिला की खिलाफत थी। वह सिलसिला-ए-अरबिया सहित इन सभी चार सिलसिलों से खून का रिश्ता भी रखते हैं। उन्होंने सिलसिला-ए-मदारिया का इल्म अपने पीर साहब से लिया लेकिन उनकी मुख्य रुचि सिलसिला-ए-नक्शबंदिया में थी। कई बार उन्हें पंजतन पाक की जियारत हुई सहाबा-ए-कराम (र.अ), गौस-ए-पाक (र.अ) को वह नानाजान बुलाते, मुजद्दिद अलफे सानी (र.अ) और कई महान हस्तियों की उन्हें जियारत हासिल थी।

वह हज़रत मखदूम शेख अहलुल्लाह मियाँ (र.अ) के पुत्र और मुहम्मद बरकतुल्लाह मियां (र.अ) के पोते थे। बचपन से ही उन्होने खेलकूद में समय बर्बाद नहीं किया। उन्होंने खुद को पूरी तरह से अल्लाह को समर्पित कर दिया।

हजरत मौलाना शाह फजले रहमा गंजमुरादाबादी (र.अ) हज़रत अबूबक्र सिद्दीक (र.अ) की 31 वीं पीढ़ी में आते हैं अपने पिता की ओर से हसनी और हुसैनी सैयद थे अपनी मां की ओर से। उनका जन्म मल्लावा शरीफ़ में हुआ था जो अब जिला हरदोई उत्तर प्रदेश में एक कस्बा है । गंजमुरादाबाद शरीफ से नौ किमी दूर बहुत प्रसिद्ध सूफ़ी मखदूम मिस्बाह-उल-आशिकीन उर्फ़ मगन मियां (र.अ)का मजार शरीफ है । वह अल्लाह और उसके पैगंबर (सल०अलैही वसल्लम) से बहुत प्रेम करते थे। उनका चेहरा पैगंबर (सल०अलैही वसल्लम) के समान था, जिसके कारण कई औलिया अल्लाह उनसे मिलने आते थे। हजरत मौलाना शाह फजले रहमा गंजमुरादाबादी (र.अ) हज़रत मखदूम मिस्बाह-उल-आशिकीन (र.अ) की नवीं पीढ़ी में से हैं। हज़रत मौलाना शाह फ़ज़ले रहमा गंजमुरादाबादी (र.अ) मुश्किल से 11 वर्ष के होंगे जब उनके पिता का निधन हो गया।

उनका जीवन बहुत साधारण था। वह बाजरे की रोटी पर गुजारा करते। वह मिट्टी के घर मे रहते थे। कब्ज की वजह से वह हुक्का पीते थे। उनके कई मुरीदों ने उन्हें महंगे कपड़े भेट किए लेकिन उन्होने वे कपड़े हमेशा लौटा दिए। उनके पास एक चमत्कारी शक्ति थी जिससे वे अपनी दुआओं से लोगों को शिफा पहुंचाते थे। सिर्फ पानी देकर उन्होंने कई जानलेवा बीमारियों से लोगों को निजात दी।

रईस खान
क़ौमी फरमान, मुंबई

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