Kolkata BJP: कोलकाता में जमीन से गायब थी भाजपा

फीचर राजनीति

अजय भट्टाचार्य
कोलकाता
नगरनिगम चुनाव के नतीजों का विश्लेषण करते समय भाजपा और वाम दलों के प्रदर्शन की तुलना पर कुछ बिंदुओं पर विचार करने की आवश्यकता है। कोलकाता कभी भी भाजपा के लिए सबसे मजबूत गढ़ नहीं रहा क्योंकि उसे 2021 के विधानसभा चुनावों में शहर में लगभग 29 प्रतिशत वोट मिले थे। पार्टी को राज्य भर में अप्रैल-मई में हुए मतदान का लगभग 39 प्रतिशत वोट मिला, जबकि ग्रेटर कलकत्ता में उसे लगभग 35% वोट मिले। इसका मतलब है कि शहर भाजपा के लिए कमजोर जगह है। दूसरें शब्दों में बेहतर यही कहा जा सकता है कि भाजपा कोलकाता शहर में कमजोर हो गई है। अगर भाजपा का पतन और वामपंथ का तथाकथित उछाल जुड़ा होता, तो वामपंथियों को भगवा खेमे से हारे हुए वोटों का एक बड़ा हिस्सा हासिल होता। विधानसभा चुनावों की तुलना में भाजपा को अपने वोटबैंक का करीब 20 फीसदी का नुकसान हुआ है। लेकिन वामपंथियों को उस हद तक फायदा नहीं हुआ है। हालांकि लाभ हुआ है, लेकिन तृणमूल की तुलना में यह पर्याप्त नहीं है, जिसने छह महीने पहले मिले वोट की तुलना में अपने वोट शेयर में लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि की।

वाममोर्चा कोलकाता में संगठनात्मक रूप से भाजपा से हमेशा श्रेष्ठ रहा है। वास्तव में, मतदान के दिन, सीपीएम नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर उतरते हुए और कथित कदाचार और हिंसा के खिलाफ सक्रिय रूप से विरोध करते हुए देखे गए, जबकि भाजपा नेता शायद ही कभी शहर में अपनी छाप छोड़ पाए। भाजपा के कुछ नेताओं की सोच थी/है कि जहां संख्या का विश्लेषण महत्वपूर्ण है, वहीं व्यापक पहुंच पहल को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि पार्टी को लोगों के बीच देखा जा सके।

कोविड-19 लॉकडाउन के चरम के दौरान, भाजपा नेता लोगों के साथ नहीं मिले, जबकि सीपीएम रेड वालंटियर्स के अभिनव विचार के साथ आई और पार्टी के युवा सदस्यों ने संकटग्रस्त लोगों की मदद करने में उल्लेखनीय काम किया। उन्होंने (सीपीएम) महामारी के दौरान लोगों के साथ अपने बंधन को ताजा किया, जो भाजपा नहीं कर सकी। हाँ भाजपा की मशीनरी सोशल मीडिया पर अपने राष्ट्रीय नेताओं की उपलब्धियों का जश्न मना रही थी। जमीन पर कोई काम नहीं किया और यह नतीजे साबित करते हैं कि लोगों ने भाजपा को खारिज कर दिया है। तृणमूल के कई नेताओं ने शहर में सबसे मजबूत विपक्ष के रूप में वापस आने के लिए वामपंथियों को बधाई दी। पार्टी के महासचिव कुणाल घोष ने कहा कि लोगों द्वारा यह स्वागत योग्य जनादेश है कि उन्होंने वामपंथ को मुख्य विपक्ष के रूप में चुना है, जिससे भाजपा जैसी अपवित्र ताकत को हरा दिया गया है। वामपंथी नेताओं को एक नई शुरुआत की उम्मीद थी। मगर फ़िलहाल उन्हें वोटों की बढ़ोत्तरी भर से संतोष करना पड़ेगा। इसलिये कोलकाता में मतों की दृष्टि से नंबर दो पर आने के बावजूद वामदल आगामी एक-दो महीने में 110 से अधिक निकाय चुनाव पर फोकस कर रहे है, और नंबर दो होने का जश्न मनाने से बच रहे हैं। जब तक वे इन निकाय चुनावों के परिणाम नहीं देखते, हम यह दावा नहीं कर सकते कि वाम मोर्चे के पुनरुत्थान की कीमत पर बंगाल में भाजपा का पतन हो गया है।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

Leave a Reply

Your email address will not be published.