kolkata municipal election: भाजपा की फिर शर्मनाक हार

राजनीति लेख

अजय भट्टाचार्य
कोलकाता
नगरनिगम चुनाव के नतीजों ने देश में सबसे बड़ी पार्टी का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी को शर्मनाक हार का तोहफा दिया है। करीब छह महीने पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा को कोलकाता में 29 फीसदी वोट मिले थे जो नगरनिगम चुनाव में घटकर 9 फीसदी ही रह गये। इसके अलावा पिछले निगम चुनाव में 7 सीटें जीतने वाली भाजपा इस बार सिर्फ तीन पर सिमट गई। कोलकाता भाजपा के अंत:पुर से छनकर आ रही खबरें बताती हैं कि निगम चुनाव में भाजपा का कोई भी बड़ा नेता प्रचार के लिए नहीं उतरा और स्थानीय नेतृत्व दावा करता रहा कि 20-25 वार्ड पार्टी जीतेगी और मुख्य विपक्षी दल बनेगी। भाजपा के विजयी तीन प्रत्याशियों मीना देवी पुरोहित, सजल घोष और विजय ओझा की जीत भी उनकी निजी जीत मानी जा रही है पार्टी की नहीं। क्योंकि मीना देवी और विजय ओझा भाजपा के नये शीर्ष नेता नरेंद्र मोदी के उदय से बहुत पहले अपने वार्ड जीतते रहे हैं।

यह अलग बात है कि भाजपा के बड़े नेता केएमसी चुनाव में सरकारी संरक्षण में गडबडी का आरोप लगाकर हार की शर्म को छिपाना चाहते हैं पर पार्टी के भीतरी सूत्र कोलकाता की हार को पार्टी के अस्तित्व को खत्म होने का संकेत मान रहे हैं। अभी छोटे-बड़े 110 स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं और उन पर कोलकाता की हार का असर जरुर दिखेगा। कोलकाता में वामपंथियों का वोट का हिस्सा 11 प्रतिशत से अधिक हो गया है जबकि छह महीने पहले इसे कांग्रेस और आईएसएफ के साथ गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ने पर लगभग इतना ही प्रतिशत मिला वोट था। निकाय चुनाव के नतीजों ने भाजपा की अस्वीकृति का संकेत दिया है क्योंकि वामपंथी और कांग्रेस संयुक्त रूप से लगभग 80 प्रतिशत सीटों पर दूसरे स्थान पर आए हैं। बंगाल में विपक्ष के क्षेत्र में बहुत बदलाव हो रहा है। विश्वनाथ चक्रवर्ती जैसे कई राजनीतिक विश्लेषक इस चुनाव के विपक्षी क्षेत्र में एक पुनर्गठन और वामपंथी पुनरुत्थान की शुरुआत के संकेत देख रहे हैं। चुनाव परिणामों के विश्लेषण से पता चलता है कि 142 में से 116 भाजपा उम्मीदवारों ने अपनी जमानत खो दी। वाम दलों के लिए यह संख्या 97 है।

भाजपा को सबसे तगड़ा झटका वार्ड नं. 42 में लगा है जहाँ पिछले 27 वर्षों की भाजपाई सत्ता का पतन हो गया। यहां से तृणमूल उम्मीदवार महेश शर्मा ने जीत हासिल की। तृणमूल के महेश शर्मा ने यहां भाजपा उम्मीदवार व पिछले 27 वर्षों से पार्षद बनती आ रहीं सुनीता झंवर को 728 वोटों से हराया। यहां भाजपा को कुल 2,625 वोट मिले जबकि तृणमूल को 3,353 वोट मिले हैं। भाकपा के प्रदीप कुमार सिंह यहां से अपनी जमानत तक नहीं बचा पाये और केवल 27 वोट उन्हें मिले। वार्ड नं. 42 में मिली जीत को तृणमूल अपनी बड़ी जीत मान रही है क्योंकि इस वार्ड से पिछले 27 वर्षों से भाजपा जीतती हुई आयी है। इसके अलावा भाजपा यानी बड़ाबाजार की पार्टी। इस टैग से उबरने के लिए भाजपा ने कई कोशिशें की।

गत विधानसभा चुनाव में भी कई बंगाली उम्मीदवारों को टिकट देकर पार्टी ने ये साबित करने की कोशिश की कि भाजपा केवल बड़ाबाजार की पार्टी नहीं है। हालांकि इस बार कोलकाता नगर निगम के चुनाव में उस बड़ाबाजार की जनता ने भी भाजपा को एक बार के लिए सावधान कर दिया है क्योंकि इस बार तृणमूल ने बड़ाबाजार के भाजपा के किले में सेंधमारी कर ली है। वार्ड नं. 42 में तो तृणमूल ने भाजपा का किला ढहा ही दिया, इसके अलावा वार्ड नं. 22 में भी भाजपा को तृणमूल ने कड़ी टक्कर दी। इस वार्ड से तृणमूल उम्मीदवार स्वयं प्रकाश पुरोहित भाजपा की मीना देवी पुरोहित से 1,523 वोटों के अंतर से हार गये। गत मई महीने में संपन्न विधानसभा चुनाव में वार्ड 22 से भाजपा को 4,239 और तृणमूल को 1,122 वोट मिले थे यानी विधानसभा चुनाव में भाजपा 3,117 वोटों से आगे थी। वहीं इस बार भाजपा की जीत का अंतर आधा हो गया है। इसी तरह वार्ड नं. 25 में गत विधानसभा चुनाव में भाजपा आगे थी। यहां से भाजपा को 6,216 और तृणमूल को 4,371 वोट मिले थे यानी इस वार्ड से भाजपा को 1,845 वोटों से जीत मिली थी। इस बार निगम चुनाव में इस वार्ड से तृणमूल उम्मीदवार राजेश सिन्हा ने जीत दर्ज की। उन्हें इस वार्ड से 6,966 वोट मिले जबकि भाजपा के सुनील हर्ष को 2,849 वोट हासिल हुए यानी तृणमूल ने 4,117 वोटों से जीत दर्ज की। कुल मिलाकर बड़ाबाजार में पहली बार इस निगम चुनाव में तृणमूल ने भाजपा के गढ़ में सेंध लगायी। बड़ा बाजार इलाके में आता है जहां 70% कारोबारी लोग रहते हैं और भाजपा का गढ़ माना जाता है।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

Leave a Reply

Your email address will not be published.