राकांपा, मनसे की आपत्ति के बाद ‘महाराष्ट्र हिंदी साहित्य अकादमी’ राष्ट्रभाषा की श्रेणी से बाहर

मुंबई

मुंबई। एनसीपी नेता जितेंद्र अव्हाड व महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अनिल शिदोरे की आपत्ति के बाद राज्य सांस्कृतिक विभाग ने हिंदी को राष्ट्रभाषा की श्रेणी से बाहर कर दिया है। यह निर्णय ऐसे समय पर लिया गया है, जब राज्य में भाजपा की सरकार है और मुंबई महानगर नगर पालिका का चुनाव सामने है।
हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने के अध्यादेश में गलती की आलोचना के बाद राज्य सरकार ने आखिरकार इसमें संशोधन कर दिया है। संस्कृति विभाग ने राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के पुनर्गठन के लिए संशोधित शासनादेश जारी कर दिया है।
हिंदी, जो देश में सबसे अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है, को महाराष्ट्र सरकार द्वारा राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया गया था। इसके साथ ही कांग्रेस कार्यकाल में राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी का गठन किया गया था। इस सम्बन्ध में जारी शासनादेश में हिन्दी को राष्ट्रभाषा होने का प्रमुखता से उल्लेख किया गया था।
राज्य सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के पुनर्गठन के अध्यादेश में कहा गया था कि, हिंदी राष्ट्रभाषा होने के कारण राज्य में हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए हिंदी साहित्य अकादमी की स्थापना की गई है।
सरकारी अध्यादेश में हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित करने की एनसीपी और एमएनएस ने आलोचना की। वरिष्ठ भाषाविद डॉ. गणेश देवी, एनसीपी नेता जितेंद्र अव्हाड व महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अनिल शिदोरे ने आलोचना की। जिसपर संज्ञान लेते हुए संस्कृति विभाग ने ‘हिन्दी राष्ट्रभाषा है’ को हटाते हुए संशोधित अध्यादेश जारी किया है।
महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी की स्थापना 1982 में तत्कालीन विधायक तथा हिन्दी साहित्यकार व पत्रकार डॉ राममनोहर त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई थी। किंतु आवश्यक अनुदान, कर्मचारी और कार्यालय के अभाव में कोई काम नहीं हो सका और राममनोहर त्रिपाठी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। पुनः 1986 में प्रा. राम मेघे की अध्यक्षता में अकादमी का पुनर्गठन हुआ, जो महाराष्ट्र में शिक्षा मंत्री थे। ‘महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी’ का आधारभूत उद्देश्य है हिन्दी के मंच से राष्ट्रीय एकता के लिए काम करना। इस उद्देश्य को दृष्टि में रखकर ‘हिन्दी अकादमी’ हिन्दी भाषा एवं साहित्य की प्रोन्नति के लिए केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित योजनाओं का यथारूप राज्य में कार्यान्वन करती है।

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