Maharashtra politics: अभी कुछ और बाकी है…!

मुंबई राजनीति

अजय भट्टाचार्य
गुरुवार
की शाम एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र का नया मुख्यमंत्री बनवाकर भाजपा ने महाविकास आघाडी और विशेषकर शिवसेना के खिलाफ एक मोर्चा फतह कर लिया है। बाहरी तौर पर लग रहा है कि भाजपा की मुंबई से लेकर दिल्ली तक की भीतरी राजनीति का नतीजा है कि देवेंद्र फड़नवीस को उपमुख्यमंत्री बनना पड़ा है। दरअसल सरकार पलटना भाजपा की पहली प्राथमिकता थी वह पूरी हो चुकी है। दूसरी प्राथमिकता बागी शिवसेना विधायकों की वैधता स्थापित करने और तीसरी शिवसेना को दो फाड़ करने की है जिसमें शिवसेना का चुनाव चिन्ह भी हथियाना शामिल है। सुप्रीम कोर्ट में 11 जुलाई को 16 बागियों की योग्यता के साथ-साथ निवर्तमान विधानसभा उपाध्यक्ष नरहरि झिरवल के तत्संबधी नोटिस का फैसला भी होना है। भले फ्लोर टेस्ट में वर्तमान गुट सफल हो मगर फ्लोर टेस्ट के बाद भी अदालत ने फैसले दिए हैं और फ्लोर टेस्ट को असंवैधानिक करार दिया है। उत्तराखंड में यह प्रयोग हुआ था जब अदालत ने गवर्नर के फैसले को तो नहीं रोका मगर फैसले के बाद पूरी प्रक्रिया को ही अवैध घोषित कर हरीश रावत की छिन चुकी गद्दी वापस करवा दी थी। शिवसेना के बागियों की योग्यता के अलावा भी फ्लोर टेस्ट के बाद एक नई जंग अदालत में देखने को मिल सकती है। वह है व्हिप जारी करने के अधिकार से संबंधित। मतलब तमाम क़ानूनी पेचीदगियों के बीच भाजपा नहीं चाहती थी कि कहीं अदालत में बात बिगड़े और पार्टी की फिर किरकिरी हो। इसलिये एकनाथ की लाटरी लग गई। इस बीच एक नये घटनाक्रम पर भी ध्यान देना जरुरी है। गुरुवार की शाम नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद राकांपा सुप्रीमो शरद पवार ने प्रेस कांफ्रेंस की और बताया कि उन्हें इन्कम टैक्स विभाग का प्रेमपत्र यानी नोटिस मिला है। इसलिये ही कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र के सियासी ड्रामे का क्लाइमेक्स अभी बाकी है। इसके पीछे की वजह है गुरुवार की देर रात राकांपा नेता और पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे की सागर बंगले में देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात। धनंजय मुंडे ने देर रात उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। फडनवीस के सागर बंगले में करीब रात साढ़े बारह बजे से एक बजे तक आधे घंटे की मीटिंग हुई है। इससे राजनीतिक गलियारों में काफी हलचल मची हुई है। कई लोग सोच रहे हैं कि यह कैसा नया राजनीतिक मुद्दा है। हालांकि धनंजय मुंडे ने किसी नई संभावना से इंकार किया और कहा कि उन्होंने उपमुख्यमंत्री चुने जाने को लेकर फडनवीस से मुलाकात की थी। मुंडे और फडनवीस के बीच हुई इस मुलाकात से राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। धनंजय मुंडे अजित पवार के करीबी हैं। 2019 में जब अजित पवार ने देवेंद्र फडनवीस के साथ शपथ ली थी। तब धनंजय मुंडे अजित पवार गुट के साथ ही थे। हालांकि बाद में उन्होंने शरद पवार खेमे में वापसी कर ली थी।
जहाँ तक शिंदे को मुख्यमंत्री बनाने का सवाल है उसमे भी कुछ राजनीतिक सवाल उपजे हैं। ढाई साल के बाद सरकार बनाने पर अगर बागी शिवसेना नेता को ही मुख्यमंत्री क्यों बनाया और अब कथित ‘त्याग’ का ढिंढोरा पीट रही है भाजपा? 2019 में शिवसेना ने यही तो कहा/माँगा था कि ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री शिवसेना का हो! अब आखिर ऐसा क्या हो गया कि भाजपा के रणनीतिकारों में अदम्य त्याग भावना जागी और बागी पर प्रेम उमड़ पड़ा!
इसमें भी एक कहानी हवा में तैर रही है। वह यह कि बागियों को मनाने की कोशिश में शिवसेना नेतृत्व जब मुख्यमंत्री पद भी छोड़ने और राकांपा-कांग्रेस शिंदे को मुख्यमंत्री पद देने को तैयार हो गये तब गुवाहाटी में बैठे शिंदे के भी तेवर बदल गये थे। बहुचर्चित वडोदरा में अमित शाह, फड़नवीस, शिंदे मुलाकात में शिंदे ने साफ कर दिया था कि अब तो उनकी मूल पार्टी भी मुख्यमंत्री बनाने को तैयार है। तब उन्हें ईडी का भावी ट्रेलर बताया गया और शिंदे घरवापसी से इंकार कर शिवसेना को बालासाहेब के आदशों पर आगे बढ़ाने के लिए भाजपा के झूले में सवार हो गये।

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