कांटो भरी होगी मल्लिकार्जुन खड़गे की राह

राजनीति लेख

विजय यादव
लंबे
समय बाद गांधी परिवार से अलग कोई कांग्रेस अध्यक्ष बना है। मल्लिकार्जुन खड़गे को बुधवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस ने बकायदा मतदान कराया। खड़गे के सामने शशि थरूर खड़े थे, जिन्हे सफलता नहीं मिली।
देश में मोदी लहर के बाद कांग्रेस लगातार कमजोर होती जा रही है। जीते हुए राज्य भी कांग्रेस के हाथ से निकलते जा रहे हैं। मध्यप्रदेश, गोआ और गठबंधन वाली महाराष्ट्र इसके उदाहरण है। इस स्थिति में कांग्रेस को फिर से मजबूत करके की एक बड़ी जिम्मेदारी मल्लिकार्जुन खड़गे की होगी। खड़गे को गांधी परिवार का वफादार शिपाही माना जाता है। यही वजह है कि, शशि थरूर की अपेक्षा खड़गे को ज्यादा पसंद किया गया और मल्लिकार्जुन खड़गे बुधवार को पार्टी के नए अध्यक्ष निर्वाचित हो गए। खड़गे ने अपने प्रतिद्वंद्वी शशि थरूर को 6,825 मतों के अंतर से पराजित किया। इसी के साथ खड़गे अब कांग्रेस के नए अध्यक्ष होंगे। अध्यक्ष पद के चुनाव में खड़गे ने 7897 वोट हासिल किए जबकि शशि थरूर को 1,072 वोट ही मिले। इनमें से 416 वोट अवैध करार दिए गए। कांग्रेस के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के प्रमुख मधुसूदन मिस्त्री ने मल्लिकार्जुन खड़गे को निर्वाचित घोषित किया।
इस जीत के बाद राहुल गांधी का भी बयान आया कि अब हमारा रोल भी खड़गे तय करेंगे। राहुल गांधी इन दिनों भारत जोड़ो यात्रा पर हैं। वर्तमान में यात्रा जिस प्रदेश कर्नाटक प्रदेश से गुजर रही है वहां जल्द ही विधानसभा चुनाव होना है। आप यह संयोग समझें या राजनीतिक रणनीति की कांग्रेस के नव निर्वाचित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक से आते हैं। चुनाव के समय पर खड़गे का पार्टी अध्यक्ष बनना निश्चित कांग्रेस के लिए फायदेमंद होगा। उसके साथ ही लगातार टूटती कांग्रेस को बचाए रखने की भी बड़ी जिम्मेदारी खड़गे की होगी। पार्टी सूत्रों के अनुशार संभवतः मल्लिकार्जुन खड़गे यहां खरे साबित नही हों। क्योंकि पार्टी के भीतर इन्हे गर्म मिजाज का कहा जाता है। मुंबई के कुछ कार्यकर्ताओं और नेताओं का अपना अनुभव है कि खड़गे किसी साधारण कार्यकर्ता से प्रेम भाव से बात नही करते। अगर इन्होंने अपने इस स्वभाव में बदलाव नहीं लाया तो आगामी मनपा चुनाव में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद नही की जा सकती।
ज्ञात हो कि राज्य प्रभारी के रूप में खड़गे के प्रति कार्यकर्ताओं के अच्छे अनुभव नहीं है। अब देखना होगा कि, मल्लिकार्जुन खड़गे गांधी परिवार के साथ साथ पार्टी के प्रति भी कितने वफादार साबित होते हैं। यह आने वाला वक्त ही तय करेगा।

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