महाराष्ट्र के दंगल में ममता भी कूदीं

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अजय भट्टाचार्य
महाराष्ट्र
में जारी सियासी दंगल में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी कूद पड़ी हैं। उन्होंने बागी विधायकों पर तंज कसा है। ममता ने कहा है कि असम की जगह बागी विधायकों को बंगाल भेज देना चाहिए, उनकी अच्छी खातिरदारी की जाएगी। ममता कहती हैं कि महाराष्ट्र में अभी जो हो रहा है, वो हैरत में डालने वाला है। इन विधायकों को असम की जगह बंगाल भेज देना चाहिए, हम उनकी अच्छी खातिरदारी करेंगे। भारत में अब लोकतंत्र काम भी करता है, इस पर शक है। कहां है लोकतंत्र? क्या ऐसे ही चुनी हुई सरकारों पर बुलडोजर चल जाएगा? हमे लोगों के लिए न्याय चाहिए, उद्धव ठाकरे के लिए न्याय चाहिए। इनका क्या है, अभी महाराष्ट्र में सरकार गिरा रहे हैं, फिर दूसरे राज्यों में भी कोशिश करेंगे। ममता ने भाजपा को चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसा समय भी आएगा जब वे सत्ता में नहीं रहेंगे, जब कोई दूसरा सरकार में होगा। उनका कहना है कि आज आप सत्ता में हैं तो पैसों के साथ खेल रहे हैं, जरा सोचिए जब आप सत्ता में नहीं होंगे, तब क्या होगा? इससे पहले गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस की असम इकाई ने गुवाहाटी के जिस होटल में शिवसेना के बागी विधायक ठहरे हुए हैं वहां विरोध प्रदर्शन किया गया था । होटल के बाहर बड़ी संख्या में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता जमा हुए और भाजपा विरोधी नारे लगाने लगे। इनका कहना था कि विधायकों की खरीद-फरोख्त की जा रही है जिसे रोका जाए। पुलिस ने इन्हें हिरासत में ले लिया है। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व असम तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष रिपुन बोरा कर रहे थे। विरोध में शामिल तृणमूल कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाए कि असम की भाजपा सरकार अपने सारे संसाधनों का इस्तेमाल कर रही है ताकि महाराष्ट्र सरकार को गिराया जा सके। रिपुन बोरा ने कहा कि असम भयंकर बाढ़ की चपेट में है। राज्य के बाढ़ पीड़ितों की मदद की बजाय असम सरकार एक दूसरे राज्य की सरकार को अस्थिर/गिराने की साजिश में व्यस्त है। यह शर्मनाक है।

दूसरी तरफ असम के विपक्षी दल कांग्रेस ने भी शुक्रवार को महाराष्ट्र के बागी शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे और उनका समर्थन करने वाले विधायकों को राज्य के “अधिक हित” में जल्द से जल्द बाढ़ प्रभावित असम छोड़ने की सलाह दी, यह तर्क देते हुए कि उनके प्रवास ने न केवल उनकी छवि को “खराब” किया है राज्य लेकिन राहत कार्यों में भी बाधा डाल रहा था। असम कांग्रेस ने शिंदे को एक पुलिस अधिकारी के माध्यम से भेजे गए एक पत्र में अपनी सलाह से अवगत कराया, जब उसके नेताओं और सदस्यों ने पांच सितारा होटल के पास विरोध प्रदर्शन किया। शिंदे को लिखे अपने पत्र में, असम कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा “यहां आपकी उपस्थिति के समर्थन” ने असम और असमिया लोगों की छवि को “खराब” किया है।
इधर ने शनिवार को यह जानना चाहा कि गुवाहाटी और सूरत में होटलों के बिलों का भुगतान कौन कर रहा है।
शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी, जो राज्य में शिवसेना और कांग्रेस के साथ सत्ता साझा करती है, ने आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से “काले धन” के स्रोत का पता लगाने के लिए भी कहा। राकांपा के मुख्य प्रवक्ता महेश तापसे ने पूछा, “सूरत और गुवाहाटी के होटलों के साथ-साथ चार्टर्ड फ्लाइट का बिल कौन चुका रहा है? क्या यह सच है कि हॉर्स ट्रेडिंग रेट 50 करोड़ रुपए है?”

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