पुलिस राज कि ओर बढ़ता तंत्र

लेख समाचार

अजय भट्टाचार्य
सत्ता
जब खुद को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस को असीमित अधिकार देती है तब कानून की आड़ में पुलिस राज स्थापित होना लाजिमी है। गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी मामले में असम की बारपेटा अदालत की टिप्पणी से भाजपा या भाजपा शासित राज्यों की पुलिस पर कोई फर्क पड़ा हो, ऐसा नहीं लगता। यदि ऐसा होता तो उत्तर प्रदेश में कथित अपराधी के घर दबिश देने गई पुलिस उसकी बेटियों को इतनी बुरी तरह से नहीं पीटती की एक बच्ची की मौत हो जाती। मगर यह हुआ है। बुलडोजर ब्रांड राजनीति का हासिल यही है कि जनता और वैचारिक विरोधियों डराने के जितने भी हथकंडे हो सकते हैं, उनका इस्तेमाल करो।
बहरहाल हरियाणा के कैथल जिला के पूंडरी थाना में हैरान कर देने वाला बलात्कार का मामला दर्ज हुआ है। दर्ज किये गए मामले में 25 वर्षीय युवती के आरोप हैं कि गांव बालू के गुरदेव ने घर में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी दी। मजे की बात यह है कि युवती के नाम से थाने में डाक माध्यम से यह शिकायत पहुंची थी। पुलिस ने मामले को ‘गंभीरता’से लेते हुए आनन-फानन में केस दर्ज कर दिया।
मामले में नया मोड़ तब आया जब चिट्ठी में दिए गए मोबाइल नंबर पर फोन करके युवती को मेडिकल व 164 के लिए बुलाया तो युवती ने कहा कि उसके साथ कोई बलात्कार नहीं हुआ है, न ही उसने किसी के खिलाफ कोई शिकायत दी है। कोई उसके नाम से थाने में फर्जी शिकायत भेज रहा है। पहले महिला थाना में भी ऐसी ही शिकायत भेजी थी। केस दर्ज होने से बालू निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट 46 वर्षीय गुरदेव का कहना है कि गलत लोगों के खिलाफ मुहिम छेड़ी हुई है। जिसकी रंजिश में उसके खिलाफ फर्जी केस दर्ज करवाए जा रहे हैं। 2017 में भी एक युवती ने उसके खिलाफ बलात्कार के आरोप लगाए थे।
युवती के मोबाइल नंबर पर भी कॉल करके महिला एएसआई सुदेश ने पीडि़ता से कहा कि उसकी भेजी चिट्ठी मिली है और मेडिकल करवाना है। पूरी बात सुनने के बाद युवती ने कहा कि उसके साथ कुछ नहीं हुआ है। युवती थाने में पहुंची और पुलिस को लिखित में देकर गई की उसने कोई चिट्ठी नहीं भेजी और न ही उसके साथ दुष्कर्म हुआ है। महिला थाना पुलिस ने शिकायत वहीं बंद कर दी। महिला थाना में केस दर्ज नहीं हुआ तो वहीं शिकायत 25 अप्रैल को उसी युवती के नाम से पूंडरी थाना पुलिस को भी मिली। पुलिस ने उसी दिन गुरदेव के खिलाफ दुष्कर्म की धारा 376 व जान से मारने की धारा 506 के तहत केस दर्ज कर लिया। केस दर्ज होने के अगले दिन गुरदेव के पूंडरी थाना से मामले की महिला जांच अधिकारी की कॉल पहुंची की उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ है।
गुरदेव का आरोप है कि उसने गांव से अवैध कब्जे हटवाने के लिए मुहिम छेड़ी हुई है। सीएम विंडो पर शिकायत दी थी कि गांव की बिढ़ाण पट्टी में गली की जमीन पर लोगों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। जहां से गली निकलनी चाहिए वहां की बजाय तालाब की जमीन से गली निकाली जा रही है। उसकी मांग थी कि गली की जमीन से कब्जा हटवाया जाए। इसके अलावा जहां गलत होता है वह शिकायत कर देता है। उसे शक है कि इसी रंजिश में उसके खिलाफ फर्जी केस दर्ज करवाया गया। जिस दिन उस पर बलात्कार करने का आरोप है वह पूरा दिन एक केस के सिलसिले में कोर्ट में था। कोर्ट परिसर की सीसीटीवी फुटेज निकलवाने के लिए आवेदन किया हुआ है। सवाल यह है कि एक चिट्ठी को ब्रह्मवाक्य मानकर बिना जांच या पूछताछ के मामला क्यों दर्ज किया गया?

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