Morbi Bridge: पैसे की लालच में ले ली लोगों की जान, जाने कौन है Oreva…

समाचार

विजय यादव
गुजरात
के मच्छू नदी का मोरबी ब्रिज दुर्घटना शायद ही कोई भविष्य में भूल पाए। जिस पुल पर कुछ क्षण पहले लोग मौज मस्ती कर रहे थे, वह अचानक जानलेवा बन गया। देखते ही देखते 134 लोगों को निगल गया।
दुर्घटना के बाद मिली प्रथम जानकारी के अनुशार ब्रिज की क्षमता 100 से 150 लोगों की थी, इसके बावजूद 600 से ज्यादा टिकट बेचा गया। जब इसकी देखरेख करने वाली Oreva कंपनी संचालकों को पता था क्षमता से अधिक लोगों के पुल पर चढ़ने से दुर्घटना हो सकती है तो अधिक टिकट क्यों बेचा गया?
यह पुल पिछले 6 महीने से बंद था। कुछ दिन पहले ही इसकी मरम्मत की गई थी। हादसे से 5 दिन पहले 25 अक्टूबर को यह मोरबी ब्रिज आम लोगों के लिए खोल दिया गया। रविवार को यहां भीड़ क्षमता से ज्यादा हो गई। यही भारी भीड़ दुर्घटना की वजह बताई जा रही है। ओरेवा को पैसा कमाने की इतनी ज्यादा जल्दबाजी थी कि, उसने मरम्मत के बाद फिटनेस सर्टिफिकेट तक लेना उचित नहीं समझा। कंपनी संचालकों को पता था कि, दिवावली और छठ पूजा पर यहां भीड़ अधिक होगी, जिससे कंपनी मोटी कमाई कर सकता है। इसी लालच में Oreva ने लोगों की जान ले ली। सरकार की ओर से एक FIR दर्ज की गई है, लेकिन उस एफआईआर में Oreva का नाम नहीं है।
एक सवाल यह भी उठता है कि, जब ब्रिज की देखभाल करने वाली कंपनी ने फिटनेस सर्टिफिकेट नही लिया है तब उसे आम लोगों के लिए खोलने कैसे दिया गया? अगर नगर पालिका समेत संबंधित विभाग इस बात से इंकार करते हैं कि, उन्हे ब्रिज के खोले जाने की जानकारी नहीं थी तो इसका साफ मतलब है कि कहीं ना कहीं बड़े अधिकारी भी इसमें शामिल हैं अथवा Oreva कंपनी की मजबूत राजनीतिक पकड़ के चलते किसी ने रोकने की हिम्मत नहीं जुटाई। ऐसे कई अनगिनत सवाल हैं जिसका जवाब गुजरात की सरकार को देना होगा।
खबर लिखे जाने तक हादसे में मृतकों की संख्या सोमवार सुबह बढ़कर 190 तक पहुंच गई थी। इनमें 25 बच्चे हैं। मृतकों में महिलाओं और बुजुर्गों की संख्या भी ज्यादा है। 170 लोग रेस्क्यू किए गए हैं। हादसा रविवार शाम 6.30 बजे का है। 143 साल पुराना पुल ब्रिटिश शासन काल में बनाया गया यह ब्रिज 765 फीट लंबा और महज 4.5 फीट चौड़ा था।

कौन है ओरेवा ग्रुप कंपनी?

गुजरात के कारोबारी रहे स्वर्गीय ओधवजी पटेल ओरेवा समूह के संस्थापक हैं। इसके 45 देशों में व्यवसाय हैं और इसमें 7,000 लोग कार्यरत हैं, जिनमें से 5,000 महिलाएं हैं, जो विभिन्न व्यवसायों जैसे कि घड़ी (Ajanta) बनाने से लेकर किसानों के लिए बिजली की बचत करने वाले कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप और क्ले-थ्रो विट्रिफाइड भी बनाता है।

File Photo: तात्कालिक मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ Oreva के संस्थापक स्वर्गीय ओधवजी पटेल।


पटेल को ‘दीवार घड़ियों’ (Ajanta group) के सबसे बड़े कारोबारी के रूप में याद किया जाता है। अक्टूबर 2012 में उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे जयसुख ओधवजी ओरेवा समूह के प्रमुख बने। लगभग 800 करोड़ रुपये के कारोबार के साथ, समूह मोरबी और कच्छ में अपने संयंत्रों में ओरेवा ब्रांड स्नैक्स के अलावा घरेलू और बिजली के उपकरण, कैलकुलेटर और सिरेमिक उत्पादों का भी निर्माण करता है।
2020 में जयसुख को अहमदाबाद पश्चिम के सांसद किरीट सोलंकी द्वारा नव नक्षत्र सम्मान व्यवसाय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कंपनी का मुख्यालय थलतेज सर्कल, एसजी हाईवे, अहमदाबाद में स्थित है।
मोरबी नगरपालिका एजेंसी के प्रमुख संदीपसिंह जाला ने मीडिया को बताया है कि कंपनी ने पुल को फिर से खोलने से पहले अधिकारियों से फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं लिया। ओरेवा समूह को पुल को फिर से खोलने से पहले नवीनीकरण विवरण देना था और गुणवत्ता की जांच करानी थी। लेकिन ऐसा नहीं किया। सरकार को इसकी जानकारी नहीं थी।

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