Muharram: यौम- ए-आशूरा की फज़ीलत

लेख

क़ुरआन ए करीम में अल्लाह तआला ने महीनों की तादाद बारह बयान फ़रमाई है जिनमें चार महीने हुरमत वाले हैं ।
हुरमत के महीनों में अल्लाह के नज़दीक मोहर्रम भी है । इसी महीने में आशूरा का दिन भी है , जिसमें इबादत करने वाले के लिए अजीम सवाब मुक़र्रर किये गये है । हमने शैख़ अबू नसर से हज़रत इब्ने अब्बास का यह क़ौल नक़्ल किया है कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया जिसने मोहर्रम के किसी दिन रोज़ा रखा उसके हर रोज़ा के एवज़ तीस दिन के रोज़ा का सवाब मिलेगा ।

मैमून बिन मेहरान ने हज़रत इब्ने अब्बास का यह क़ौल नक़्ल किया है कि आंहज़रत सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया है जिसने मोहर्रम की दस तारीख़ यानी यौम ए आशूरा का रोज़ा रखा उसको दस हज़ार फरिश्तों , दस हज़ार शहीदों और दस हज़ार हज और उमरा करने वालों का सवाब दिया जाएगा ।जिसने आशूरा के दिन किसी यतीम के सर पर हाथ फेरा अल्लाह तआला उसके सर के बाल के एवज़ जन्नत में उसके दरजा बुलंद करेगा , जिसने आशूरा की शाम को किसी मोमिन का रोज़ा खुलवाया गोया उसने अपनी तरफ से तमाम उम्मत ए मोहम्मदिया का रोज़ा खुलवाया और सारी उम्मत का पेट भरा ।

सहाबा किराम ने अर्ज़ किया या रसूल अल्लाह ! क्या अल्लाह तआला ने आशूरा के दिन को तमाम दिनों पर फ़ज़ीलत दी है , हुजुर ने फ़रमाया हां , अल्लाह तआला आसमानों , जमीन , पहाड़ों , समंदरों को आशूरा के दिन पैदा फ़रमाया , लौह व क़लम को भी आशूरा के दिन पैदा किया । हज़रत आदम अलैहिस्सलाम आशूरा के दिन पैदा हुए , हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को जन्नत में आशूरा के दिन दाख़िल फ़रमाया , हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम आशूरा के दिन पैदा हुए , उनके बेटे का फिदया कुरबानी आशूरा के ही दिन दिया गया , फ़िरऔन को आशूरा के दिन ( नील नदी में ) ग़रक़ाब किया , हज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम की तकलीफ आशूरा के दिन दूर फ़रमाई । हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की तौबा आशूरा के दिन ही क़बूल फ़रमाई , हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम की लग़जिश आशूरा के दिन माफ़ फ़रमाई , हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम आशूरा के दिन पैदा हुए और क़यामत आशूरा के दिन ही बरपा होगी ।

एक और हदीस में अल्लाह के नबी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया है कि अल्लाह ने इसी दिन अर्श व कुर्सी , सितारों और पहाड़ों को पैदा फ़रमाया । जिब्रील और दूसरे मलाइका को भी आशूरा के दिन पैदा फ़रमाया गया है ।हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम को आशूरा के दिन ही आसमान पर उठाया गया , हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम को जिन्न व इंस पर हुकूमत उसी दिन अता हुई और आसमान से पहली बारिश इसी दिन हुई ।

हदीस के मुताबिक जिसने आशूरा के दिन गुस्ल किया वह मरजुलमौत के सिवा किसी बीमारी में मुब्तला न होगा , जिसने आशूरा के दिन पत्थर का सुर्मा आंखों में लगाया तमाम साल उसको आशोबे चश्म नहीं होगा , उस दिन किसी की अयादत की गोया उसने तमाम औलादे आदम की अयादत की , जिसने आशूरा के दिन किसी को एक घूंट पानी पिलाया उसने गोया एक लम्हा को अल्लाह की नाफरमानी नही की । जिसने आशूरा के दिन चार रकअत नमाज़ इस तरह पढ़ी कि हर रकअत में एक दफा सूरह फ़ातिहा और पचास मरतबा सूरह एख़लास पढ़ी अल्लाह तआला ने उसके पचास बरस गुज़िश्ता और पचास बरस आइंदा ग़ुनाह माफ़ फ़रमाएगा , मलाए आला में उसके लिए नूर के महल तामीर कराएगा ।

यह लेख़ हज़रत सय्यदना शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी रह० की लिखी हुई किताब “ग़ुनियतुत्तालिबीन ” से पेश किया गया है ।

पेशकरदा- रईस खान

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