दार्जिलिंग में अड़ी नेपाली छड़ी

राजनीति समाचार

अजय भट्टाचार्य
पश्चिम बंगाल
में दार्जिलिंग पहाड़ों को नियंत्रित करने वाली अर्ध-स्वायत्त परिषद गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन (जीटीए) के चुनाव में एक तिहाई से ज्यादा सीटों पर छड़ी/बेंत का बोलबाला है। नेपाल की राजनीति से बरास्ता जीटीए दार्जिलिंग तक छड़ी की यात्रा रोचक है। नेपाल के काठमांडू और धरन में छड़ी के सहारे अपेक्षाकृत कमजोर वर्ग के निर्दलीय उम्मीदवार मेयर बने हैं। पहाड़ियों की राजनीति में तभी से छड़ी शुभ हो गई।
जीटीए के कुल 45 में से 18 निर्वाचन क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवारों की चुनाव चिह्न के तौर पर पहली पसंद छड़ी/बेंत है। उनके पास चुनने के लिए 20 अन्य प्रतीक चिह्न थे। निर्दलीय उम्मीदवारों को लगता है कि यह चुनाव चिन्ह उन्हें नेपाल में 13 मई को हुए काठमांडू और धरान निकाय चुनावों की तरह आगे ले जाएगा।
काठमांडू में स्थापित राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को धूल चटाकर निर्दलीय उम्मीदवार, 32 वर्षीय बालेन शाह, मेयर चुने गये हैं। एक रैपर और स्ट्रक्चरल इंजीनियर शाह की तरह ही धरान में एक निर्दलीय और सामान्य नागरिक 38 वर्षीय हरका राय संपांग भी मेयर चुने गए। दोनों का चुनाव चिन्ह छड़ी था। जीटीए चुनावों में एक निर्दलीय उम्मीदवार रेशमा गुरुंग के अनुसार शाह और संपांग की सफलताओं ने उन्हें अपने चुनाव चिन्ह के रूप में छड़ी चुनने के लिए भी प्रेरित किया। रोंगो-झलधाका-तोएडे निर्वाचन क्षेत्र (45) से संतोष ख्वाश और तुकवर निर्वाचन क्षेत्र (4) से रेशमा गुरुंग जैसे निर्दलीय उम्मीदवारों ने काठमांडू चुनाव के दौरान बालेन द्वारा इस्तेमाल किए गए सटीक नारे का भी इस्तेमाल किया है।
बालन के नारे का अनुवाद है, ‘बुजुर्गों को टहलने/चलने के लिए छड़ी उपयोगी है, लेकिन इसका इस्तेमाल भ्रष्टाचारियों को सुधारने के लिए बेंत की तरह भी किया जा सकता है।‘ जीटीए चुनावों में भ्रष्टाचार एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभर रहा है। रेशमा गुरुंग ने स्वीकार किया कि वह नेपाल चुनाव परिणामों के परिणाम से प्रेरित थीं।
बकौल गुरुंग हां, मैं विशेष रूप से हरका संपांग (धरन में) से प्रेरित था। उन्होंने हमें उम्मीद दी कि बिना पैसे या बाहुबल के निर्दलीय भी परिवर्तन कर सकते हैं। धरन के मेयर कार किराए पर देते हैं जबकि उनकी पत्नी जीविका के लिए किराने की दुकान चलाती हैं। उनका अभियान सादगी का उदाहरण था। खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाली गुरुंग नवंबर तक तुकवर में भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा की महिला विंग की कमान संभाल रही थीं। वे कहती हैं कि अगर मैं जीत भी जाती हूं, तो भी मैं स्वतंत्र रहूंगी और लोगों की सेवा करूंगी। जीटीए चुनाव का मतदान 26 जून को होगा। सिलीगुड़ी महाकुमा परिषद और छह नगर पालिकाओं के छह वार्डों के लिए उस दिन राज्य में भी मतदान होगा।

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