महाराष्ट्र सत्ता संघर्ष पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई एक नवंबर को

मुंबई समाचार

नई दिल्ली। महाराष्ट्र सत्ता संघर्ष को लेकर सुप्रीम कोर्ट (supreme court) में अगली सुनवाई अब सीधे 1 नवंबर को होगी। अयोग्यता याचिका व अन्य मुद्दों पर मंगलवार को हुई सुनवाई के बाद राज्य में सत्ता संघर्ष को सुलझाने के लिए एक महीने का इंतजार करना होगा।
एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व में शिवसेना के 40 विधायकों और 12 सांसदों के विद्रोह के बाद असली शिवसेना (Shivsena) कौन है? यह विवाद खड़ा हो गया है। बागी विधायकों ने दावा किया है कि असली शिवसेना शिंदे गुट की है क्योंकि विधायिका में बहुमत शिंदे गुट के पक्ष में है। शिवसेना ने बागी विधायकों की अयोग्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका पर अन्य मुद्दों के साथ एक नवंबर को सुनवाई होगी।
मंगलवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से जहां शिंदे गुट को बड़ी राहत मिली वहीं उद्धव ठाकरे (Uddhav Thakare) को झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के काम पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इससे चुनाव आयोग (Election comission) के लिए पार्टी के चुनाव चिह्न पर फैसला लेने का रास्ता साफ हो गया है। इसी के चलते अब तक शिंदे गुट और ठाकरे के बीच धनुष्य बाण पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में चल रही लड़ाई चुनाव आयोग तक पहुंच चुकी है।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने फैसले के बाद कहा है कि, केंद्रीय चुनाव आयोग योग्यता के आधार पर फैसला करेगा। लोकतंत्र में बहुमत का बहुत महत्व होता है। चुनाव आयोग के समक्ष जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह सभी नियमों, मानदंडों और योग्यता पर विचार करने के बाद किया जाएगा। शिवसेना सांसद अनिल देसाई ने प्रतिक्रिया दी है कि अदालत का यह फैसला शिवसेना के लिए झटका नहीं है।

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