Bihar: जहरीली शराब कांड, पीड़ितों पर नीतीश सख्त

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अजय भट्टाचार्य
शराबबंदी को लेकर बिहार की राजनीति में बवंडर उठा हुआ है जिसमें शराबबंदी कानून संशोधन विधेयक से और तड़का लगा दिया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद में शराबबंदी कानून संशोधन विधेयक पर बात करते हुए कहा कि ज़हरीली शराब से जिन लोगों की मौत हुई हैं, उनको कोई राहत नहीं दी जाएगी। शराब के मुद्दे पर बात करते हुए नीतीश बोले कि जो बापू जी की बात को नहीं मानते हैं… वे हिंदुस्तानी नहीं हैं। वे महापापी और महाअयोग्य हैं। उनके लिए कोई सहानुभूति नहीं। दुनिया भर में शराब का कितना बुरा असर है। राज्य में शराबबंदी के कारण लोग अब सब्जी खरीद रहे हैं। पहले राज्य में सब्जी का इतना उत्पादन नहीं होता था। जो पहले पैसे शराब पीने में बर्बाद करता था। वो अब पैसा बर्बाद नहीं करेगा और यही सब काम में लाएगा। देखिए उनके घर में कितना अच्छा भोजन होगा। जरा महिलाओं से पूछें।
दरअसल शराबबंदी के बाद बिहार में शराब माफिया ने जड़ें जमाई हैं जिसका नतीजा यह है कि अवैध शराब धड़ल्ले से बिक रही है और कई बार तो कुछ पुलिस कर्मी भी इस कारोबार से जुड़े पाए गये। नीतीश को इस शराब बंदी से यह फायदा हुआ कि महिला मतदाताओं का झुकाव जदयू कि तरफ हो गया। चूँकि शराब से सबसे ज्यादा ओराभावित महिलाये ही होती हैं इसलिये शराबबंदी से उन्हें घरेलू मोर्चे पर सुकून मिला। शराब पर उड़ने वाले पैसे घर में आने लगे। अलबत्ता भाजपा राजस्व उगाही कि दुहाई देकर कतिपय प्रतिबंधों के साथ बिहार में शराब की बिक्री चाहती है।
बिहार विधानसभा में बुधवार को निषेध एवं उत्पाद शुल्क संशोधन विधेयक, 2022 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया है। अब इस कानून के तहत राज्य में पहली बार शराबबंदी कम सख्त बनाया गया है। संशोधित कानून के अनुसार, पहली बार अपराध करने वालों को जुर्माना जमा करने के बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट से जमानत मिल जाएगी और यदि अपराधी जुर्माना राशि जमा करने में सक्षम नहीं है तो उसे एक महीने की जेल का सामना करना पड़ सकता है। इसके अनुसार, जब किसी को शराबबंदी कानूनों का उल्लंघन करते हुए पुलिस पकड़ेगी तो आरोपी को उस व्यक्ति का नाम बताना होगा जिसने शराब उपलब्ध करवायी।

नीतीश कुमार सरकार ने बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत अप्रैल 2016 में राज्य में शराबबंदी लागू कर दी थी। प्रतिबंध के बाद से बड़ी संख्या में लोग केवल शराब पीने के आरोप में जेलों में बंद हैं। उल्लंघन करने वालों में अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और गरीब लोगों में से हैं। भारत के प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण ने पिछले साल कहा था कि 2016 में बिहार सरकार के शराबबंदी जैसे फैसलों ने अदालतों पर भारी बोझ डाला है। अदालतों में तीन लाख मामले लंबित हैं। लोग लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं और अब शराब के उल्लंघन से संबंधित अत्यधिक मामले अदालतों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। शराबबंदी वाले बिहार में अब तक करीब 823 लोगों की गिरफ्तारी की गई है।

गोपालगंज जिला तो जहरीली शराब के लिए कुख्यात रहा है। शराबबंदी लागू होने के बाद गोपालगंज में 15 अगस्त 2016 को नगर थाने के खजूरबानी में जहरीली शराब से 19 लोगों की मौत हुई थी। पिछले साल 20 फरवरी को विजयीपुर थाने के मझवलिया में जहरीली शराब से 6 लोगों की जान गई थी जबकि 02 नवंबर को महम्मदपुर थाने के महम्मदपुर गांव में 21 लोगों की मौत हुई थी। हालाँकि प्रशासन ने 14 लोगों के मरने की पुष्टि की थी। 10 नवंबर को समस्तीपुर के सरायरंजन थाना इलाके के नरघोंघी खैरवन टोला में जहरीली शराब से हुई मौत के बाद जिले में शराब से मौत का आंकड़ा 9 पहुंच गया था। हाल ही में बिहार में शराबबंदी कानून के बाद गोपालगंज में जहरीली शराब से सामूहिक मौत का यह तीसरा मामला सामने आया था।

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