ओवैसी को आघाड़ी में नो इंट्री

मुंबई राजनीति

अजय भट्टाचार्य
शिवसेना
ने एआईएमआईएम की महाराष्ट्र विकास आघाडी में शामिल होने की मंशा पर पानी फेरकर भाजपा की मशीनरी को धक्का पहुँचाया है। उत्तर प्रदेश में हार के बाद अब महाराष्ट्र में अपनी जमीन मजबूत करने की जुगाड़ में एआईएमआईएम सांसद इम्तियाज जलील ने कहा था कि उनकी पार्टी कांग्रेस और राकांपा के साथ गठबंधन के लिए तैयार है, जो महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व वाली महा विकास अघाडी सरकार का हिस्सा हैं। सांसद के इस प्रस्ताव को शिवसेना से मामने से इंकार कर दिया है। शिवसेना ने एआईएमआईएम के साथ गठबंधन की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि वह इसे महाराष्ट्र में एमवीए गठबंधन में चौथे भागीदार के रूप में स्वीकार नहीं करेगी। शिवसेना सांसद संजय राउत के मुताबिक इस तरह के गठबंधन के बारे में सोचना एक बीमारी के बराबर है। हम उस पार्टी के साथ कैसे गठबंधन कर सकते हैं जो औरंगजेब की कब्र के सामने घुटने टेकती है। इसके बारे में सोचो भी मत। यह सोचना एक बीमारी के समान है। शिवसेना छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों पर चलती है और भविष्य में भी ऐसा करेगी। इसके अलावा राउत ने दावा किया कि भाजपा और एआईएमआईएम एक गुप्त गठबंधन में थे। आपने इसे यूपी में भी देखा होगा। इसलिए, ऐसी पार्टी (भाजपा के साथ गुप्त गठबंधन के साथ) से हम दूरी बनाए रखते हैं। महाराष्ट्र में तीन दलों की सरकार (शिवसेना, कांग्रेस और राकांपा) है। चौथी पार्टी नहीं आएगी। एआईएमआईएम के इम्तियाज जलील सांसद हैं। मैं उनसे दिल्ली में मिला था लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम गठबंधन कर रहे हैं। असल में यह अटकलें तब हवा में उछलीं जब राकांपा नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री राजेश टोपे इम्तियाज के घर पहुंचे थे। कहा जाता है तभी जलील ने एआईएमआईएम की इच्छा उन्हें बताई थी। इम्तियाज की मां के निधन के कुछ दिनों बाद शुक्रवार को टोपे उनसे मिलने आए थे। एआईएमआईएम के प्रस्ताव को लेकर शिवसेना के संभावित रुख पर औरंगाबाद से सांसद ने कोई भी स्पष्ट जवाब देने से इनकार कर दिया था। जलील ने कहा, “हकीकत यह है कि ये पार्टियां मुस्लिमों के वोट चाहती हैं। सिर्फ राकांपा ही क्यों? कांग्रेस भी कहती है कि वह धर्म निरपेक्ष है और उसे भी मुस्लिम वोट चाहिए। हम उसके साथ भी हाथ मिलाने को तैयार हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा देश का काफी नुकसान कर चुकी है और एआईएमआईएम उसे हराने के लिए सब कुछ करने को तैयार है।
जलील के अनुसार उनकी पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के साथ भी गठबंधन के बारे में बात की थी, लेकिन वे मुसलमानों के वोट चाहते थे, पर असदुद्दीन ओवैसी को नहीं, जो पार्टी के प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में भी ये पार्टियां (कांग्रेस और राकांपा) मुसलमानों के वोट चाहती हैं, लेकिन एआईएमआईएम को नहीं। गठबंधन का उनका प्रस्ताव क्या औरंगाबाद नगर निगम तक सीमित है, के जवाब में जलील ने कहा कि एआईएमआईएम का भावी कदम कांग्रेस और राकांपा से मिली प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। नहीं तो हम अकेले जा सकते हैं। हम उन्हें गठबंधन का मौका दे रहे हैं, क्योंकि वे हमें भाजपा की ‘बी’ टीम कहते हैं। जलील के प्रस्ताव की खबर पर कल भाजपा का आईटी सेल सक्रिय हुआ और सोशल मीडिया पर मीम की बाढ़ आ गई। लेकिन राउत के बयान ने भाजपा के खिलंदड़ों का खेल ही बिगाड़ दिया।

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