अखिलेश यादव के आरोप पर चुनाव आयोग ने मांगा सबूत, भारी पड़ सकता है बड़बोलापन

उत्तर प्रदेश समाचार

लखनऊ। अखिलेश यादव को अब बड़बोलापन भारी पड़ने लगा है। चुनाव आयोग ने इनके एक बयान पर सबूत मांग लिया है। अभी तक इन तक पहुंचने वाली है मुसीबत को ढाल बनकर थाम लेने वाले नेताजी मुलायम सिंह यादव के निधन के साथ ही यह तय हो गया है कि अब आगे से इन्हे बिना सोच विचार के कुछ भी बोलना परेशानी में डाल सकता है।
उनके एक बयान पर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। चुनाव आयोग ने उनके उस बयान पर सबूत मांगा है, जिसने उन्होंने कहा था कि, यादव और मुस्लिम समुदायों के मतदाताओं के नाम जानबूझकर लगभग 20,000 नाम सभी विधानसभा से हटा दिए गए हैं।
इसी बयान पर चुनाव आयोग ने एसपी प्रमुख को 10 नवंबर तक सबूत आयोग को सौंपने को कहा है ताकि मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
चुनाव आयोग ने दावों को मजबूत करने के लिए सपा नेता से विधानसभावार विलोपन के आंकड़ों पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा है। चुनाव आयोग की कार्रवाई अखिलेश यादव द्वारा इस साल फरवरी-मार्च में उत्तर प्रदेश चुनाव में हेरफेर करने का आरोप लगाने के बाद आई है।
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर उत्तर प्रदेश के चुनाव में हेरफेर करने का आरोप लगाया था। उनकी यह टिप्पणी 30 सितंबर को सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करने के दौरान आई थी।
अखिलेश ने चुनाव आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि राज्य में हालिया विधानसभा चुनाव के दौरान प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में उनकी पार्टी के कम से कम 20,000 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाए।
अखिलेश यादव ने सार्वजनिक संबोधन के दौरान जोर देकर कहा था “चुनाव आयोग ने भाजपा और उसके पन्ना प्रमुखों के निर्देश पर लगभग हर विधानसभा सीट पर यादवों और मुसलमानों के वोटों को जानबूझकर 20,000 कम कर दिया। मैंने पहले भी कहा है और मैं फिर से कहूंगा कि जांच की गई, तो यह पाया गया कि हमारे 20,000 वोट खारिज कर दिए गए और कई लोगों के नाम हटा दिए गए। कुछ लोगों को एक बूथ से दूसरे बूथ पर स्थानांतरित कर दिया गया।

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