भाजपा से सीखे विपक्ष

राजनीति राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
राजनीति
में वही नेता और डाल सफल होता है जो खुद को हमेशा सक्रिय रखे। इसके अलावा जिसके पास भविष्य की राजनीति का स्पष्ट खाका और दृष्टिकोण हो। भारत की वर्तमान राजनीति के विपक्ष को यह गुण भाजपा से सीखना चाहिये। इसी साल हिमाचल और गुजरात में विधानसभा चुनाव हैं। भाजपा और उसका शीर्ष नेतृत्व इन दोनों राज्यों में तो सक्रिय है ही, अगले साल मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना में होने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति बनाने के साथ-साथ 2024 के लोकसभा चुनाव जीतने की व्यूह रचना पर काम शुरू कर चुका है। उसके मुकाबले विपक्ष कहाँ है, यह विपक्ष को सोचना चाहिये। स्वस्थ लोकतंत्र के लिए मजबूत विपक्ष बहुत जरुरी है वरना सत्ता निरंकुश हो जाती है। केंद्र में तीसरी बार सत्ता में आने के लक्ष्य के साथ भाजपा ने अभी से तैयारी चालू कर दी है। इस तैयारी के तौर पर ही भाजपा ने ऐसे स्थानों पर सांगठनिक शक्ति बढ़ाने का लक्ष्य लिया है जहां पार्टी पराजित हुई है। उन केंद्रों में जीतकर नरेंद्र मोदी सरकार गढ़ने हेतु सीटें बढ़ाने का उनका लक्ष्य है।
महाराष्ट्र में ठाकरे की सरकार गिरने के बाद अब भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा ने उन 144 सीटों पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसे वह अब तक जीत नहीं पाई है। इन 144 सीटों में वे लोकसभा क्षेत्र भी शामिल हैं जिन्हें भाजपा एक या दो बार पहले जीत चुकी है, लेकिन 2019 में हार गई। भाजपा ने देश के विभिन्न राज्यों में 144 सीटें जीतने के लिए चार नेताओं की समिति गठित की है जिसमें राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, राष्ट्रीय सचिव और उत्तर प्रदेश के बस्ती निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हरीश द्विवेदी, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा और राज्यसभा सांसद नरेश बंसल शामिल हैं। भाजपा ने नए मिशन को लोकसभा यात्रा योजना का नाम दिया है। विनोद तावड़े को दक्षिण भारतीय राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है। दक्षिण भारत में कर्नाटक को छोड़कर अन्य राज्यों में भाजपा का बहुत कम प्रभाव है। अन्य राज्यों में भाजपा की उपस्थिति नाममात्र की है। ऐसे में तवाड़ के सामने बड़ी चुनौती है। हरीश द्विवेदी को महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी दी गई है। जबकि संबित पात्रा बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड सहित उत्तर पूर्व भारतीय राज्यों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। नरेश बंसल को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश का प्रभार सौंपा गया है।
पश्चिम बंगाल का जिम्मा मोदी कैबिनेट के 13 सदस्यों को मिला है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में देश भर में 303 और पश्चिम बंगाल से भाजपा ने 18 सीटें जीती थी। आसनसोल के सांसद रहे बाबुल सुप्रियो और बैरकपुर के सांसद अर्जुन सिंह तृणमूल में चले गये हैं। अर्जुन सिंह ने सांसद पद नहीं छोड़ा है, ऐसे में कागजों पर भाजपा के 17 सांसद हैं। अब आगामी लोकसभा चुनाव को लक्ष्य कर आसनसोल समेत 19 सीटों पर भाजपा जोर दे रही है। देश की 144 सीटों को विभिन्न क्लस्टरों में बांटा गया है और पश्चिम बंगाल में 5 क्लस्टर हैं। 4 क्लस्टरों में 4 करके और एक क्लस्टर में 3 लोकसभा सीटें शामिल हैं। इन क्लस्टरों की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र कुमार, प्रतिमा भौमिक, धर्मेंद्र प्रधान, स्मृति ईरानी, पंकज चौधरी को दी गयी है। इनमें से प्रत्येक को अलग-अलग लोकसभा सीटों का जिम्मा भी दिया गया है। बाकी सीटों की जिम्मेदारी में और 8 केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट, रामेश्वर तेली, राजकुमार रंजन सिंह, एसपी सिंह बघेल, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कपिल मोरेश्वर पाटिल, कैलाश चौधरी व हरदीप सिंह पुरी हैं। उसी के अनुसार, पार्टी की ‘लोकसभा प्रवास योजना’ में शामिल होने के लिए कई केंद्रीय मंत्री पश्चिम बंगाल में डेरा डाले हुए हैं। महीने के अंत तक उड्डयन मंत्री ज्तोतिरादित्य सिंधिया भी बंगाल परिक्रमा पर दमदम लोकसभा इलाके में 3 दिनों के प्रवास पर रह सकते हैं। फ़िलहाल स्मृति ईरानी, कपिल पाटिल, रामेश्वर तेली बंगाल यात्रा कर चुके हैं।

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