विपक्ष शून्य लोकतंत्र चाहती है भाजपा

राजनीति राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
पटना
में भारतीय जनता पार्टी के सभी मोर्चों की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के बयान और भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने पर जारी तिरंगा यात्रा के विरोधाभास को समझने की जरूरत है। जिस दल के पितृ संगठन ने तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज मानने से आजादी के 52 साल बीतने तक लगातार इंकार किया वह पार्टी अब देशभक्ति दिखाने के लिए तिरंगे की आड़ लेकर खड़ी है। पार्टी अध्यक्ष कहता है कि भविष्य में देश भर में भाजपा के सिवा कोई दूसरा राजनीतिक दल नहीं बचेगा। मतलब दूसरे अर्थों में भाजपा को अपने सिवा कोई दूसरा दल देश में नहीं चाहिये। विपक्ष को कुचलने के लिए जो हथकंडे पर्दे के पीछे से अपनाये जा रहे हैं उन्हें सारा देश देख रहा है। महाराष्ट्र के बाद झारखंड में सरकार गिराने का खेल खुलते ही पार्टी का पूरा तंत्र जुट गया कि इसमें पार्टी की भूमिका उजागर न हो जाये। असम से तार जुड़ते ही ईडी को इस मामले की जाँच में घुसेड़ना बंगाल पुलिस की अपराध अन्वेषण शाखा की जाँच को प्रभावित करना है। मामले की जाँच के लिए वारंट के साथ दिल्ली पहुंची सीआईडी टीम को ही बंधक बना लिया गया। यह आजादी के अमृतकाल की विषैली झांकी नहीं तो और क्या है? दिल्ली में बाधा डालने के बाद असम में भी बंगाल सीआईडी के अधिकारियों को ‘रोका’ गया। हावड़ा में गिरफ्तार झारखण्ड के 3 विधायकों का सीसीटीवी फुटेज गुवाहाटी एयरपोर्ट प्रबंधन से मांगने के समय सीआईडी के इंस्पेक्टर समेत 4 अधिकारियों को रोकने का आरोप असम पुलिस पर है। बुधवार को दिल्ली पुलिस ने बंगाल सीआईडी टीम के वारंट की सत्यता जानने के बहाने जाँच में बाधा खड़ी की। बीते शनिवार की रात झारखण्ड के 3 विधायकों की गाड़ी से लगभग 50 लाख रुपये बरामद होने के बाद उन्हें पश्चिम बंगाल राज्य पुलिस की ओर से गिरफ्तार कर लिया गया था। इस घटना की जांच के दौरान सीआईडी के अधिकारी सीसीटीवी फुटेज की बरामदगी के लिए गुवाहाटी एयरपोर्ट पर गये थे। यहां अचानक असम पुलिस आ गयी और सीआईडी अधिकारियों को इस दौरान रोकने का आरोप है। सीआईडी की ओर से दावा किया गया कि जांच में आये अधिकारियों को जबरन गाड़ी में ले जाया गया। सीआईडी सूत्रों के अनुसार, गत सप्ताह गुरुवार को उक्त 3 विधायक गुवाहाटी गये थे। अगले दिन यानी शुक्रवार को वह सभी कोलकाता आये। ऐसे में एक रात के लिए क्यों वे विधायक गुवाहाटी गये थे, पूछताछ में विधायकों द्वारा संतोषजनक उत्तर नहीं मिल पाया। इसकी जांच में ही सीआईडी अधिकारियों की टीम गुवाहाटी एयरपोर्ट पर गयी थी। इससे पहले सीआईडी को दिल्ली के साउथ कैम्पस थाना इलाके में सिद्धार्थ मजूमदार नाम के एक व्यवसायी का पता चला। वहां भी उन्हें दिल्ली पुलिस से बाधा का सामना करना पड़ा। सीआईडी का दावा है कि साउथ कैम्पस थाना को पहले ही इसकी जानकारी दी गयी थी और सीआईडी अधिकारियों के पास सर्च वारंट भी था। इसके बावजूद उन्हें उनका काम करने से रोका गया। इसके बाद एडीजी रैंक के 3 अधिकारी और 2 आईजी रैंक के अधिकारी दिल्ली रवाना हुए और मामले को हल किया। सीआईडी ने दावा किया कि व्यवसायी सिद्धार्थ मजूमदार के घर पर वे रेड करने के लिए गये थे। टीम में सीआईडी के एक इंस्पेक्टर के अलावा एएसआई और एसआई शामिल थे। सीआईडी ने ट्वीट कर आरोप लगाया कि उन्हें थाने में रोककर रखा गया। सीआईडी अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार विधायक दिल्ली में उक्त व्यवसायी के पास गये थे। समझने वाली बात यह है कि जहाँ-जहाँ पुलिस और अन्य विधि प्रवर्तन एजेंसियां भाजपा शासन के तहत कार्यरत हैं उनका उपयोग निजी सेना की तरह कर भाजपा देश में किस तरह का लोकतंत्र स्थापित करना चाहती है।

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