Padma Shri: मजाक बनते पद्म सम्मान

फीचर राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
इस
साल शामिल बंगाल के सभी तीन लोगों ने पद्म पुरस्कार को स्वीकार करने से इनकार कर केंद्र की भाजपा सरकार को बड़ा झटका दिया है। सवाल यह है कि प्रोटोकॉल के तहत, पुरस्कार विजेताओं को अग्रिम रूप से पुरस्कार के बारे में सूचित किया जाता है और सूची की घोषणा उनके द्वारा पुरस्कार को स्वीकार किए जाने के बाद ही की जाती है। तो क्या जिन लोगों ने यह पुरस्कार लेने से मना किया है क्या पुरस्कार घोषित करने से पहले उनकी सहमति नहीं ली गई थी। यदि हाँ तो बिना उनकी सहमति के उन्हें पुरस्कार घोषित क्यों किया गया? या फिर पुरस्कार के प्रति यह असम्मान वर्तमान सत्ता प्रतिष्ठान के खिलाफ असहमति का प्रतीक है!
पश्चिम बंगाल से जहां पार्टी को पिछले साल चुनावी हार का सामना करना पड़ा था वहां भाजपा व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कट्टर आलोचक रहे पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य इस सम्मान को स्वीकार करने से मना करने वाले सबसे पहले व्यक्ति थे। इसके बाद राज्य के दो प्रख्यात कलाकारों, तबला वादक पंडित अनिंद्य चटर्जी और प्रख्यात गायिका संध्या मुखोपाध्याय ने भी पद्म पुरस्कार को ठुकरा दिया। आठ दशकों तक गायन करियर रखने वाली 90 वर्षीय संध्या मुखोपाध्याय ने चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री को यह कहते हुए लेने से इनकार कर दिया कि यह उनके कद के किसी व्यक्ति के लिए नहीं बल्कि एक जूनियर कलाकार के लिए उपयुक्त है। मुखोपाध्याय की बेटी सौमी सेनगुप्ता के अनुसार जब दिल्ली से पुरस्कार के लिए फोन आया, तो उनकी मां ने वरिष्ठ अधिकारी से कहा कि उन्हें इस उम्र में पुरस्कार की पेशकश पर “अपमान” महसूस हुआ। पद्मश्री एक जूनियर कलाकार के लिए अधिक योग्य हैं, न कि ‘गीताश्री’ संध्या मुखोपाध्याय के लिए। ऐसा उनके परिवार और उनके गीतों के प्रेमियों को महसूस होता है। बंगाल के बेहतरीन गायकों में से एक, संध्या मुखोपाध्याय ने 2011 में पश्चिम बंगाल का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार “बंग विभूषण” प्राप्त किया था, और आधी सदी पहले 1970 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्वगायिका के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। पंडित अनिंद्य चटर्जी ने भी कहा कि उन्होंने पुरस्कार के लिए दिल्ली से फोन आने पर इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। साल 2002 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रख्यात तबलावादक चटर्जी ने मीडिया से कहा कि मैंने विनम्रता से मना कर दिया। मैंने धन्यवाद कहा, लेकिन मैं अपने करियर के इस चरण में पद्मश्री प्राप्त करने के लिए तैयार नहीं हूं। मैंने उस चरण को पार कर लिया है। बुद्धदेव भट्टाचार्य, जिन्हें तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना था, ने तुरंत एक बयान जारी कर इस सम्मान को अस्वीकार किया। बंगाली में जारी इस बयान में कहा गया कि मैं पद्म भूषण के बारे में कुछ नहीं जानता। किसी ने मुझे इसके बारे में कुछ नहीं बताया। अगर वास्तव में उन्होंने मुझे पद्म भूषण दिया है, तो मैं इसे अस्वीकार करता हूं। इससे पहले ईएमएस नंबूदरीपाद ने भी पद्म पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया था। 2013 में गायिका सिस्तला जानकी ने पद्मभूषण सम्मान को लेने से मना कर दिया था। वहीं आपातकाल के दौरान जेल में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र कपूर ने 2016 में पद्म सम्मान लेने से इनकार कर दिया था। इसी साल तमिल लेखक एवं निर्देशक बी. जयमोहन ने भी इसको लेने से मना कर दिया था। ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक की बहन गीता मेहता ने 2019 में पद्मश्री सम्मान लेने से इनकार कर चुकी हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी किसानों के विरोध के समर्थन में 2020 में पद्म विभूषण लौटा दिया था। वहीं राजनेता लक्ष्मी चंद जैन के परिवार ने मरणोपरांत सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर दिया क्योंकि वह राजकीय सम्मान स्वीकार करने के खिलाफ थे। इतिहासकार रोमिला थापर ने दो बार पद्म पुरस्कार लेने से मना कर चुकी हैं, जबकि सिविल सेवक के सुब्रह्मण्यम ने भी पुरस्कार से इनकार कर दिया था। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस वर्मा के परिवार ने भी पद्म भूषण को ठुकरा दिया था।
2016 में तमिल लेखक बी जयमोहन, शेतकारी संगठन के संस्‍थापक शरद जोशी के परिवार और वीरेंद्र कपूर तथा 2015 श्री श्री रविशंकर, योगगुरु बाबा रामदेव, सलमान खान के पिता सलीम खान और दाऊदी बोहरा समुदाय के प्रमुख सैयदना मोहम्‍मद बुरहानुद्दीन ने पद्म सम्‍मान लेने से मना कर दिया था।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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