President Election: हारी बाजी नहीं लड़ेंगे पवार

लेख समाचार

अजय भट्टाचार्य
राष्ट्रपति
रामनाथ कोविंद का उत्तराधिकारी चुनने के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष की अपने-अपने स्तर पर कोशिशें तेज हो गई हैं। भाजपा नीत राजग राष्ट्रपति चुनाव आराम से जीतने की स्थिति में है, क्योंकि कुल मतों का लगभग 50 फीसदी हिस्सा उसके पास है। इस बीच विपक्ष को एकजुट करने में जुटीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को दिल्ली में विपक्षी नेताओं की बैठक बुलाई जिसमें कमोबेस हर दल के प्रतिनिधि पहुंचे थे। बैठक के झारखंड के लोकसभा सांसद विजय हंसदक ने पुष्टि की कि बनर्जी ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए शरद पवार के अलावा दो और नामों का उल्लेख किया है। इन दो नामों पर चर्चा से पहले यह समझना होगा कि क्या शरद पवार राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का जोखिम उठाएंगे? शायद नहीं। वजह यह है कि राजग के उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 13 हजार मत गठबंधन के पास कम पड़ रहे हैं जो बीजू जनता दल या वाईएसआर कांग्रेस की मदद से पूरे हो सकते हैं। ऐसे में संभावित हार वाली लड़ाई शरद पवार भला क्यों लड़ेंगे! इसलिये बीते सोमवार की शाम मुंबई में अपनी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की एक बैठक में शरद पवार ने कथित तौर पर कहा, “मैं दौड़ में नहीं हूं, मैं राष्ट्रपति पद के लिए विपक्षी उम्मीदवार नहीं बनूंगा।” पवार ने कांग्रेस को अपने इनकार से औपचारिक रूप से अवगत नहीं कराया, जो कथित तौर पर पिछले सप्ताह इस तरह का प्रस्ताव लेकर पवार के पास पहुंची थी। पवार को विश्वास नहीं है कि विपक्ष उम्मीदवारी को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक संख्या जुटा लेगा। वह एक हारी हुई लड़ाई लड़ने के इच्छुक नहीं है। वैसे भी राज्यसभा चुनावों में महाराष्ट्र में भाजपा ने शिवसेना के संजय पवार को हराकर एक सीट हासिल की है। भाजपा अपने उम्मीदवार को कई निर्दलीय विधायकों द्वारा निर्वाचित कराने में सफल रही, जिन्होंने शिवसेना को समर्थन देने का वादा किया था। ऐसी स्थिति में कब कौन सी पार्टी भाजपा के खेमे में नजर आये, कहा नहीं जा सकता। वैसे राजनितिक हलकों में यह चर्चा आम है कि कांग्रेस और शिवसेना उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष की आम सहमति के उम्मीदवार के रूप में चाहते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोनिया गांधी के सन्देश के साथ पिछले गुरुवार को पवार से उनके मुंबई स्थित आवास पर मुलाकात की थी। इसके बाद रविवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह का फोन भी उनके पास आया था। मल्लिकार्जुन खड़गे ने शिवसेना अध्यक्ष और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे तथा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से इस मसले पर बात की थी। इधर सांसद विजय हंसदक के अनुसार ममता बनर्जी ने शरद पवार के अलावा दो और नामों फारूक अब्दुल्ला और गोपालकृष्ण गांधी के नाम का जिक्र किया है। इन दो नामों पर पार्टी के किसी अन्य नेता ने इस बैठक में कोई राय नहीं व्यक्त की। राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर राकांपा सुप्रीमो शरद पवार दूसरी बैठक की तैयारी कर रहे हैं। विजय हंसदक के मुताबिक नए नामों पर अगली बैठक में विचार किया जाएगा। इससे पहले शरद पवार ने बुधवार को ट्विटर पर लिखा था कि, “दिल्ली में हुई बैठक में भारत के राष्ट्रपति के चुनाव के लिए एक उम्मीदवार के रूप में मेरा नाम सुझाने के लिए मैं विपक्षी दलों के नेताओं की ईमानदारी से सराहना करता हूं। हालांकि, मैं यह बताना चाहता हूं कि मैंने विनम्रतापूर्वक मेरी उम्मीदवारी का प्रस्ताव मना कर दिया है।” तृणमूल कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई बैठक में 17 विपक्षी दलों के नेताओं ने भाग लिया था। राष्ट्रपति के लिए 18 जुलाई को चुनाव होंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है।

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