सिंगापुर शिखर सम्मेलन के राजनीतिक निहितार्थ

फीचर

अजय भट्टाचार्य
दिल्ली
के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 31 जुलाई से शुरू होने वाले विश्व शहरों के शिखर सम्मेलन के लिए उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा सिंगापुर जाने की अनुमति से इनकार कर दिया गया है। भाजपा का दावा है कि इस बैठक के लिए जाने वाली “भारत की एकमात्र मेयर” सूरत के हेमाली बोघावाला होंगी। मतलब साफ है कि दिल्लीशाही को यह गवारा नहीं है कि कोई गैर भाजपा शासित राज्य या निगम अपने शहर की तारीफ कर सके। इस लिहाज से इंदौर का महापौर भी जा सकता था क्योंकि पिछले तीन-चार सैलून से इंदौर सबसे स्वच्छ शहर की सूचि में सबसे ऊपर है। फिर सूरत ही क्यों? सीधा जवाब है गुजरात चुनाव।
‘आप’ सूरत नगर निगम में मुख्य विपक्षी दल है, जिसने पिछले साल के चुनावों में 120 में से 27 वार्डों पर कब्जा किया था। तब से आप के 27 पार्षदों में से चार ने भाजपा में शामिल होने के लिए इस्तीफा दे दिया है। दुनिया में सबसे अच्छे शहरों में से एक के रूप में शिखर सम्मेलन को देखा जाता है। केजरीवाल यह तर्क देते रहे हैं कि केंद्र नहीं चाहता कि वह दिल्ली में अपनी सरकार की उपलब्धियों के बारे में बात करें। यह संयोग मात्र है कि जिस दिन दिल्ली के उपराज्यपाल ने केजरीवाल की अर्जी ख़ारिज की उस दिन केजरीवाल सूरत में ही थे। केजरीवाल ने अब विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर दौरे की मंजूरी मांगी है। विरोधाभास यह है कि महज तीन महीने पहले, जब केजरीवाल ने अपने नवनिर्वाचित पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ अहमदाबाद में रोड शो किया था, तब भाजपा सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री जीतू वघानी ने आप के संयोजक को बर्खास्त करने की मांग की थी और उन्हें “एक बड़े महापौर” से ज्यादा कुछ नहीं कहा था। बोघावाला 31 जुलाई से 3 अगस्त तक सिंगापुर शिखर सम्मेलन – आठ ऐसे विश्व शहरों की बैठक में भाग लेंगे, जिसमें सूरत के नगर आयुक्त बी एन पाणि, स्थायी समिति के अध्यक्ष परेश पटेल और सिटी इंजीनियर आशीष दुबे शामिल होंगे। मेयर को सिंगापुर सरकार ने आमंत्रित किया था।

गुजरात में अपने चुनाव प्रचार के लिए सूरत को तवज्जो देते हुए आप ने यहां पाटीदार बहुल सीटों पर अपनी बढ़त मजबूत करने की सोची-समझी कोशिश की है। आप के गुजरात प्रमुख गोपाल इटालिया सूरत से लेउवा पाटीदार हैं और पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के हार्दिक पटेल के पूर्व सहयोगी हैं। हाल ही में पार्टी ने अपने पूरे राज्य निकाय का कायाकल्प किया लेकिन इटालिया को नहीं छुआ। आप ने भी सीधे तौर पर अपने ‘दिल्ली मॉडल’ को ‘गुजरात मॉडल’ के खिलाफ खड़ा किया है। दिल्ली के डिप्टी सीएम और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने हाल ही में अपने गुजरात समकक्ष वघानी के निर्वाचन क्षेत्र भावनगर में सरकारी स्कूलों का चक्कर लगाया, ताकि केजरीवाल सरकार द्वारा राजधानी में लाए गए “अंतर” को रेखांकित किया जा सके। भाजपा ने दिल्ली सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों का “आकलन” करने के लिए 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के जवाबी दौरे के साथ जवाब दिया। सूरत नगर निगम में विपक्ष के नेता ‘आप’ पार्षद धर्मेश भंडारी के मुताबिक केजरीवाल “एक वैश्विक नेता” के रूप में उभरे हैं और उनकी तुलना में सूरत की मेयर हेमाली बोघावाला के पास कोई बड़ा अनुभव नहीं है क्योंकि वह केवल डेढ़ साल के लिए पद पर हैं। राज्य भाजपा ने अपनी टीमों को दिल्ली भेजा और बेतरतीब ढंग से स्कूलों का चयन (मूल्यांकन के लिए) किया गया, लेकिन उन्हें अभी भी एक भी गलती नहीं मिली। इससे पता चलता है कि सरकार कैसे काम करती है। भंडारी कहते हैं कि केजरीवाल की लोकप्रियता न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में बढ़ रही है, और भाजपा सरकार उनसे ईर्ष्या करती है। दिल्ली में आप सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में किए गए कार्यों की दुनिया भर में सराहना हुई है।

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