Punjab Election: चंडीगढ़ के नतीजे और पंजाब

लेख

अजय भट्टाचार्य

 क्या
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव के नतीजों में पंजाब विधानसभा चुनावों के भावी परिणामों की झलक दिखती है? अगले एक-दो महीनों में पंजाब सहित 5 राज्यों के चुनाव कार्यक्रम घोषित हो जायेंगे। जाहिर है 35 सदस्यीय चंडीगढ़ नगर निगम में 14 सीटें जीतकर आम आदमी पार्टी के हौसले बुलंद हैं। लेकिन इन नतीजों के आधार पंजाब में आम आदमी पार्टी अगर खुद को सबसे आगे समझ रही है तो यह उसका दिवास्वप्न ही साबित होगा। क्योंकि गुजरात के सूरत में भी आप का प्रदर्शन थोड़ा बेहतर थे मगर उसके बह हुए अहमदाबाद नगर निगम चुनाव के नतीजों में आप कहीं नजर नहीं आई थी। चंडीगढ़ निकाय चुनाव के परिणाम पर नजर डालें तो 14 आप, 12  भाजपा, 8 कांग्रेस और एक सीट पर अकाली दल को सफलता मिली है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव बाद आप किसके साथ मिलकर निगम की कमान संभालेगी? क्योंकि सभी पार्टियाँ चुनाव प्रचार के दौरान एक-दूसरे पर जमकर कीचड़ उछाल चुकी हैं।चंडीगढ़ नगर निगम के कुछ चुनिन्दा क्षेत्रों के परिणामों पर नजर डालें तो वार्ड नंबर-15 (धनास) में आम आदमी पार्टी के रामचंद्र यादव ने कांग्रेस के धीरज गुप्ता को 178 वोटों से हराया है। भाजपा यहां तीसरे नंबर पर रही। इधर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की सीट से चुनाव लड़ रहे विजय राणा और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चावला के बेटे सुमित चावला भी चुनाव हार गये हैं। इसके अलावा भाजपा की ओर से जीत के प्रबल दावेदार हीरा नेगी, सुनीता धवन को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस प्रत्याशी सतीश कैंथ भी अपनी सीट बचाने में कामयाब नहीं रहीं।

भाजपा की महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष सुनीता धवन को आप की तरुणा मेहता ने 1516 वोटों से पराजित किया। वहीं वार्ड नंबर 34 से कांग्रेस के गुरप्रीत सिंह जीते  जबकि वार्ड नंबर 22 से आप की अंजू कौटियाल ने जीत दर्ज की। वार्ड नंबर-10 से नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र सिंह बबला की पत्नी हरप्रीत कौर बबला ने भाजपा की राशि भसीन को 3103 वोटों से हराया है।
वार्ड 14 से भाजपा के कुलजीत संधू ने जीत दर्ज की है। उन्होंने आप के कुलदीप सिंह कुक्की को लगभग 260 मतों से हरा दिया है। इधर वार्ड नंबर 2 से भाजपा उम्मीदवार महेश इंदर सिंह सिधू महज 11 वोट से जीते। उन्हें 2072 वोट मिले जबकि दूसरे स्थान पर रहे  कांग्रेस उम्मीदवार हरमोहिंदर सिंह को 2061 वोट मिले। वार्डों की संख्या 2016 में 26 से बढ़कर अब 35 हो गई है। परंपरागत रूप से, हर पांच साल में होने वाले नगरपालिका चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलती थी, लेकिन आम आदमी पार्टी के आ जाने से इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो गया।
अब विधानसभा चुनावों की बात करें तो कांग्रेस, अकाली दल (बादल), आप और कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस, अकाली दल (ढींढसा) और भाजपा का गठबंधन मैदान में होने के अलावा 22 किसानों के संगठन संयुक्त समाज मोर्चा बनाकर चुनाव में उतर रहे हैं। जाहिर है किसान आंदोलन के चलते जो मतदाता भाजपा ने नाराज बताया जा रहा है उसका असर अब भाजपा पर कमोबेस कम पड़ेगा। शहरी क्षेत्रों में भाजपा की खासी पैठ है और गठबंधन में भाजपा की कोशिश रहेगी कि शहरी इलाकों की सभी नहीं तो ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़े। यह अलग बात है कि चंडीगढ़ भी शहरी क्षेत्र है जहाँ भाजपा को एक चौथाई सीटें ही मिली हैं। इसलिये अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि चंडीगढ़ के नतीजे विधानसभा चुनाव नतीजों का पूर्वाभास हैं। फिर स्थानीय और विधानसभा चुनावों के मुद्दे और क्षेत्र ज्यादा बड़े और अलग होते हैं।

(लेखक देश के जाने माने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।) 

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