दिल्ली व हरियाणा पुलिस पर सवाल!

लेख समाचार

अजय भट्टाचार्य
क्या
तेजिंदर सिंह बग्गा को गिरफ्तार करने में पंजाब पुलिस से कोई चूक हुई? यह सवाल इसलिए उठता है क्योंकि दिल्ली पुलिस की टिप पर हरियाणा पुलिस ने कुरुक्षेत्र में बग्गा को पंजाब पुलिस की गिरफ्त से आजाद कराया और दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया। अब बग्गा की गिरफ्तारी के लिए पंजाब की मोहाली अदालत ने जो वारंट जारी किया है उससे दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा पुलिस भी सवालों के घेरे में है। अदालत ने कहा, ‘आरोपी (बग्गा) को जबरन पंजाब पुलिस से गैरकानूनी तरीके से छुड़ाया गया। पंजाब पुलिस के डीएसपी दिल्ली पुलिस को जनकपुरी थाने में गिरफ्तारी की सूचना देने गए, लेकिन दिल्ली पुलिस ने कोई डायरी एंट्री नहीं की। आरोपी को पर्याप्त मौके दिए गए कि वह जांच में शामिल हों लेकिन वह फिर भी जांच में शामिल नहीं हुआ। इसलिए गैर जमानती वारंट जारी करना जरूरी है। मोहाली कोर्ट ने पंजाब पुलिस को निर्देश दिए हैं कि तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को गिरफ्तार करके कोर्ट के सामने पेश किया जाए। इस मामले में 23 मई को अगली सुनवाई होगी।

वैसे किसी दूसरे राज्य में जाकर अपराधी को पकड़ने के लिए पुलिस के कुछ नियम कायदे हैं। इनमें सबसे पहले किसी भी राज्य की पुलिस को दूसरे राज्य का दौरा करने से पहले उस स्थानीय पुलिस स्टेशन से संपर्क स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए जिसके अधिकार क्षेत्र में उसे जांच करना है। उसे शिकायत/एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) की अनुवादित प्रतियां और अन्य दस्तावेज, राज्य की भाषा में अपने साथ ले जाना चाहिए, जहां वह जाना चाहती हैं। गंतव्य पर पहुंचने के बाद सबसे पहले पुलिस अधिकारी को सहायता और सहयोग के लिए अपने दौरे के मकसद से संबंधित पुलिस स्टेशन को सूचना देनी चाहिए। संबंधित थाना प्रभारी उसे सभी कानूनी सहायता प्रदान करें। ‘गिरफ्तार व्यक्ति को राज्य से बाहर ले जाने से पहले उसे अपने वकील से परामर्श करने का अवसर दिया जाना चाहिए। वापस लौटते समय, पुलिस अधिकारी को स्थानीय पुलिस स्टेशन का दौरा करना चाहिए और डेली डायरी में जानकारी लिखनी चाहिए, जिसमें राज्य से बाहर ले जाए जा रहे व्यक्ति (व्यक्तियों) का नाम और पता लिखा हो, अगर कोई सामान हो तो इसकी जानकारी भी उसमें दी जाए। पीड़ित का नाम भी बताया जाना चाहिए। इसके अलावा गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को अगर जरूरत हो तो निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करने की कोशिश की जानी चाहिए और व्यक्ति को मामले के अधिकार क्षेत्र वाले मजिस्ट्रेट के सामने 24 घंटे के भीतर पेश किया जा सकता है। चूंकि गिरफ्तार व्यक्ति को उसके राज्य से बाहर ऐसे स्थान पर ले जाया जाना है, जहां उसका कोई परिचित न हो, उसे अपने साथ (यदि संभव हो), उसके परिवार के सदस्य/परिचित को अपने साथ रहने की अनुमति दी जा सकती है, जब तक कि उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाये। परिवार का ऐसा सदस्य उसके लिए कानूनी सहायता की व्यवस्था कर सकेगा। गिरफ्तार व्यक्ति को जल्द से जल्द न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए, यह समय 24 घंटे से ज्यादा का नहीं होना चाहिए। इसमें यात्रा का समय शामिल नहीं होता। ताकि, गिरफ्तारी किए गए युवक और हिरासत को जरूरत पड़ने पर न्यायिक आदेश द्वारा उचित ठहराया जा सके। 24 घंटे की अवधि से ज्यादा किसी व्यक्ति को पुलिस हिरासत में नहीं रखा जा सकता। दिल्ली पुलिस का दावा है कि पंजाब पुलिस ने तजिंदर बग्गा को गिरफ्तार करते समय दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया। जबकि पंजाब पुलिस का कहना है कि उन्होंने सभी नियमों का पालन किया है। ये दिशानिर्देश दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 2019 में पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि की गिरफ्तारी पर विवाद के बाद जारी किए गए थे। जहां यह आरोप लगाया गया था कि उन्हें बेंगलुरु में गिरफ्तार किया गया था और बिना किसी ट्रांजिट वारंट के दिल्ली लाया गया था।

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