तेजप्रताप को राबड़ी का सहारा

फीचर राष्ट्रीय

अजय भट्टाचार्य
राबड़ीदेवी
के सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड पर तेजस्वी यादव द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी के साइड इफेक्ट रोज सामने आ रहे हैं। लालू प्रसाद के बड़े लाल की वजह से इफ्तार पार्टी में आरजेडी नेता रामराज यादव की कथित पिटाई की आरोप लगने के बाद तेज प्रताप यादव सुर्खियों में बने हुए हैं। पिटाई का आरोप लगने के बाद तेजप्रताप पर जब दबाव बना तो उन्होंने इस्तीफे का विक्टिम कार्ड खेला। लेकिन उनके इस्तीफे की धमकी को जब किसी ने तवज्जो नहीं दी तो वह अपना लाव लश्कर लेकर मंगलवार की रात राबड़ी देवी के आवास पहुंच गए है। कार्यकर्ता की पिटाई का आरोप लगने के बाद तेजप्रताप पर जब दबाव बना तो उन्होंने इस्तीफा का विक्टिम कार्ड खेला।लेकिन उनके इस्तीफे की धमकी को जब किसी ने तवज्जो नहीं दी तो वह अपना नाव लश्कर लेकर मंगलवार की रात राबड़ी देवी के आवास 10 सर्कुलर रोड पहुंच गए है। खबर है कि तेजप्रताप यादव अब अपनी मां राबड़ी देवी के साथ ही रहेंगे, उन्होंने अपना स्टैंड रोड आवास छोड़कर अपनी मां राबड़ी देवी के आवास में रहना शुरू कर दिया है। राबड़ी आवास पर अक्सर उनका आना-जाना होता था लेकिन अब वह 10 नंबर आवास में ही रहने के लिए आ गए हैं।

दरअसल तेजप्रताप यादव पर पिटाई का आरोप लगने के बाद राजद पर उनपर कार्रवाई करने का दबाव है। अगर तेजप्रताप के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती तो कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाता है। इधर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाबु जगदानन्द सिंह ने स्पष्ट कर दिया कि तेजप्रताप पर कार्रवाई उनके अधिकार में नहीं है। जिसके बाद कहा जा रहा है कि लालू प्रसाद अब तेजप्रताप के खिलाफ बड़ा फैसला ले सकते हैं। लालू प्रसाद कुछ करें इससे पहले ही तेजप्रताप मां के पास पहुंच गए हैं।
इससे पहले तेजप्रताप ने अपने ट्वीट में लिखा कि मैं हमेशा अपने के पिता के नक्शे कदम पर चलने का प्रयास किया है और पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया। अब जल्द ही अपने पिता से मिलकर पार्टी से इस्तीफा देंगे। इससे पहले यह खबर भी आयी थी कि तेजप्रताप ने पार्टी के टिकट पर विधान परिषद का चुनाव लड़े अनिल सम्राट पर भी हाथ उठा दिया था। अनिल सम्राट की ओर से भी तेजप्रताप को उसी अंदाज में जवाब देने की बात सामने आयी थी। इस घटना के बाद तेजप्रताप के ट्वीट ने बिहार की राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी।
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यह मौटे तौर पर लालू प्रसाद यादव के विरासत पर कब्जे को लेकर चल रही जंग की बानगी है। तेजप्रताप ] छोटे भाई तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। अक्सर वे इसकी चर्चा करते हुए कहते हैं कि हमने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को अर्जुन बनाया है और वह खुद कृष्ण की तरह सारथी की भूमिका में हैं। लेकिन, तेजप्रताप कृष्ण की भूमिका में अपने को उपेक्षित महसूस करते हैं। तेजप्रताप के लोगों का कहना है कि तेजप्रताप जब सरकार में अपनी भूमिका पर समझौता कर रहे हैं तो संगठन में उनकी मजबूत भूमिका होनी चाहिए। ऐसा नहीं होने से वे नाराज हैं। तेजस्वी यादव पार्टी को अपने तरीके से चलाना चाहते हैं और तेज प्रताप अपने तरीके से। पिता के समर्थन की वजह से तेजस्वी की संगठन पर अधिक पकड़ है। तेज प्रताप आए दिन पार्टी लाइन से अलग हटकर बयानबाजी करते हैं, जिससे तेजस्वी यादव को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। तेज प्रताप यादव ने जगदानंद सिंह के खिलाफ लंबे समय से मोर्चा खोल रखा है। तेज अपने भाई तेजस्वी से इस मुद्दे पर मदद चाहते हैं, लेकिन तेजस्वी का इस मुद्दे पर तेजप्रताप को कोई समर्थन नहीं मिला। खुद लालू प्रसाद यादव जगदानंद सिंह के साथ मजबूती से खड़े रहे। इससे तेज प्रताप यादव आहत हैं। पार्टी में सम्मान नहीं मिलने के बाद पिता की पार्टी से अलग अपना एक संगठन बना चुके तेजप्रताप अपने करीबियों के साथ यादव छात्र जनशक्ति परिषद नाम का संगठन चला रहे हैं। तारापुर में विधान सभा उपचुनाव के दौरान उन्होंने अपने करीबी संजय कुमार को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था।

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