राहुल गांधी ने ली बंजारा समाज की सुधि, नांदेड़ में किए मुलाकात

समाचार

विजय यादव
नांदेड़।
सामाजिक, राजनीतिक, शिक्षा जैसे तमाम अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे बंजारा समाज को अब देश के प्रतिभाशाली नेता राहुल गांधी से सामाजिक समानता की उम्मीद है। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी महाराष्ट्र के नांदेड़ में बंजारा समाज के युवा नेता धनराज राठोड से मिले। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के नेतृत्व में बंजारा समाज से हुई इस मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने सिर्फ इनकी मांगों को ही नहीं सुना बल्कि इनके पारंपरिक वस्त्र को धारण कर समाज के प्रति अपना पूर्ण प्रेम जताया।
महाराष्ट्र के देगलूर में भारत जोड़ो पदयात्रा के पहुंचने पर ऑल इंडिया बंजारा सेवा संघ के राष्ट्रीय सचिव व महाराष्ट् कांग्रेस (OBC) महासचिव धनराज राठोड की ओर से राहुल गांधी को सामुदायिक पोशाक पहनाकर उनका अभिनंदन किया।
धनराज राठोड ने बताया कि बंजारा समाज पूरे देश में है और हर राज्य में अलग-अलग आरक्षण मिल रहा है। सभी राज्यों में बंजारा समाज को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल करने की मांग राहुल गांधी से की। बंजारा समाज की मांग है कि, आरक्षण देश के सभी राज्यों में एक जैसा हो। राहुल गांधी ने इस समस्या व मांग को समझने और न्याय देने का वादा किया।
इस अवसर पर राज्य के तीनों पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, पृथ्वीराज चव्हाण, सुशील कुमार शिंदे, प्रदेश अध्यक्ष नानाभाऊ पटोले, विधायकदल नेता बाला साहेब थोरात समेत तमाम गणमान्य नेता उपस्थित थे।

बंजारा समाज का परिचय

देश में बंजारा समाज की लगभग आबादी 9 करोड़ है। इसके बावजूद बंजारा समाज आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक व शिक्षा से कमजोर है। इस समाज का कोई विधायक, सांसद व मंत्री नही है।
बंजारों की उत्पत्ति एक बहुचर्चित विषय रहा है। एक राय है कि ये राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र से हैं। यह पुर्व कालके राजपूत में से एक है, उनके गोत्र भी राजपुताना से मिलते है। जैसे मेघावत, राणावत, वरतीया, झारावत, झरपला, मुडावत, खेतावत, रणसोत, लाखावत, मालोत, सपावत ,धारावत आदि। आज भी भारत के सभी प्रदेश में गौर बंजारा संस्कृती में राजपुताना जैसी शैली पायी जाती है।

बंजारा समाज का इतिहास

19 वीं शताब्दी में बंजारा समाज ने जब ब्रिटिश सरकार का विरोध जताया, तब ब्रिटिश औपनिवेशिक अधिकारियों ने 1871 के आपराधिक जनजाति अधिनियम के दायरे में डाल दिया। जिससे उन्हें अपने पारंपरिक व्यवसायों को छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। इनमे से कुछ लोग पहाड़ों और पहाड़ी क्षेत्रों के पास बस गए, जबकि अन्य जंगलों में चले गए।

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