Rajasthan New Cabinet: मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भी नाराजगी बरकरार

फीचर राजनीति

अजय भट्टाचार्य
राजस्थान
में अशोक गहलोत मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद नेताओं की नाराज़ी भी खुलकर सामने आने लगी है। खेरवाड़ा से कांग्रेस विधायक दयाराम परमार मंत्री न बनाए जाने से खासे नाराज हैं। परमार ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से पूछा है कि उन्हें क्यों मंत्री नहीं बनाया गया। परमार ने गहलोत को लिखी चिट्ठी में कहा है कि, ‘ऐसा लगता है कि मंत्री बनने के लिए कुछ विशेष योग्यताओं की जरूरत होती है। कृपया मुझे बताएं कि वे योग्यताएं क्या हैं ताकि मैं भविष्य में मंत्री बनने के लिए उन्हें हासिल कर सकूं।’ राज्यमंत्री बनाए गए पायलट गुट के बृजेन्द्र ओला भी कैबिनेट मंत्री न बनाने से खुश नहीं हैं। अलवर के कठूमर से विधायक बाबू लाल बैरवा की नाराजगी भी खुल कर सामने आ गई वे शपथ ग्रहण समारोह में ही नहीं पहुंचे। नए मंत्रिमंडल में कई जिलों को अभी भी प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। धौलपुर, नागौर और सीकर ऐसे ही जिले हैं जहां से किसी भी कांग्रेस विधायक को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। भरतपुर को मंत्रिमंडल पुनर्गठन में सबसे बड़ी सौगात चार मंत्रियों के रूप में मिली है। इसके अलावा 13 निर्दलीय विधायकों में से एक को भी जगह नहीं मिली है। गत वर्ष सियासी संकट के समय निर्दलीय विधायकों ने गहलोत सरकार को बचाने में अहम भूमिका निभाई थी। उसके बाद ही हाल ही में अशोक गहलोत ने एक कार्यक्रम में कहा था कि वे निर्दलीयों विधायकों के सहयोग को कभी नहीं भूल सकते। लेकिन अब मंत्रिमंडल में निर्दलीय विधायकों को जगह नहीं मिलने से उनमें मायूसी छायी हुई है। कांग्रेस से बाहर के विधायकों में से केवल बसपा से आये विधायक राजेन्द्र गुढा को राज्यमंत्री बनाया गया है। बसपा की टिकट पर जीते राजेन्द्र गुढा और पांच अन्य विधायक चुनाव के कुछ समय बाद ही कांग्रेस में शामिल हो गये थे।
इधर गहलोत के नव नियुक्त सलाहकार रामकेश मीणा ने सचिन पायलट पर हमला बोला है। मीणा का कहना है कि पायलट के राजस्थान में रहने से कांग्रेस को नुकसान होगा। पायलट बाहरी हैं। कांग्रेस हाईकमान सचिन पायलट को राजस्थान से बाहर भेजें। कांग्रेस हाईकमान ने सचिन पायलट की मांगों को मान लिया है। कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं को मंत्रिमंडल में जगह दे दी है। अब पायलट राजस्थान छोड़ दें।
रामकेश मीणा के अनुसार 2018 के विधानसभा चुनाव में पायलट के रहते ही कांग्रेस को 50 सीट का नुकसान हुआ। पायलट रहे तो 2023 के विधानसभा चुनाव में भी नुकसान होगा। रामकेश मीणा निर्दलीय विधायक हैं। सचिन पायलट के विरोध के चलते ही गहलोत सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों को गहलोत मंत्रिमंडल में शामिल नहीं कर पाए। निर्दलीयों की नाराजगी दूर करने के लिए रामकेश समेत दो निर्दलीय विधायकों को अशोक गहलोत का सलाहकार नियुक्त किया गया है।
जहाँ तक मंत्रियों के विभागों का सवाल है तो आलाकमान ने भले ही मंत्रिमंडल के विस्तार में दोनों खेमों को बराबर साधने का प्रयास किया हो लेकिन विभागों के बंटवारे के मामले में गहलोत खेमा भारी रहा है। गहलोत खेमे के मंत्रियों के पास सीधे तौर पर आमजन से जुड़े और बड़े बजट वाले विभाग आये हैं। जबकि पायलट खेमे के मंत्रियों को उनके मुकाबले कम महत्व और कम बजट वाले विभाग मिले हैं। वहीं वित्त और गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास ही हैं। पायलट खेमे के हेमाराम चौधरी- वन मंत्री, रमेश मीणा – पंचायतीराज मंत्री, विश्वेंद्र सिंह – पर्यटन मंत्री, ब्रजेंद्र ओला – परिवहन राज्य मंत्री और मुरारी मीणा – कृषि विपणन राज्य मंत्री बनाये गये हैं।


राजनीतिक नियुक्तियों पर नजर
राजस्थान मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित पुनर्गठन पूरा होने के बाद अब सबकी निगाहें राजनीतिक नियुक्तियों पर हैं। मंत्रिमंडल में जगह पाने वाले विधायकों को संसदीय सचिव व मुख्यमंत्री के सलाहकार जैसी राजनीतिक नियुक्तियों में समायोजित किया जाएगा जिसकी शुरुआत छह विधायकों को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त करने से हो चुकी है। राज्य में विधानसभा की 200 सीटें हैं और उसके हिसाब से अधिकतम 30 मंत्री बनाए जा सकते हैं और यह संख्या अब पूरी हो गई है। अब संसदीय सचिव, बोर्ड कॉरपोरेशन के चेयरमेन पदों पर विधायकों को समायोजित किया जायेगा। बाकी आकांक्षी विधायकों, कार्यकर्ताओं व पार्टी का समर्थन करने वाले निर्दलीय विधायकों को इन पदों पर समायोजित किया जाएगा।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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