Ram Rahim : बलात्कारी बाबा पर मेहरबान सरकार

लेख समाचार

अजय भट्टाचार्य
इससे
बड़ा इनाम और इज्जत अफजाही क्या हो सकती है जब बलात्कार और हत्या के सजायाफ्ता मुजरिम बाबा राम रहीम को हरियाणा सरकार ने जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान कर दी है। पंजाब चुनाव से ठीक पहले फरलो पर रिहा किए गए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को खालिस्तानियों से जान का खतरा बताकर इसी आधार पर हरियाणा सरकार की ओर से जेड प्लस की सुरक्षा प्रदान की गई है। बताया जा रहा है कि गुरमीत राम रहीम ने पिछले छह फरवरी को चिट्ठी के जरिए हाईकोर्ट को खालिस्तान समर्थकों से जान का खतरा होने की सूचना दी थी। सवाल यह है कि यदि राम रहीम को सचमुच जान का खतरा है तो उसे जेल से रिहा करने की जरुरत क्या थी? जनता को इतना मुर्ख समझने की यह कारस्तानी भाजपा ही कर सकती है। कश्मीर में अलगाववादियों के साथ सरकार बनाने से लेकर मणिपुर मेघालय तक नजर डालिए तो पाएंगे की चाल, चरित्र पर चेहरे को भाजपा ने सत्ता के लिए अपनी सुविधानुसार बदला है। बाबा राम रहीम को सुरक्षा उसी बदले हुए चरित्र का बेशर्म चेहरा है जिसका चरित्र साधू के वेश में शैतान का है।
राम रहीम को फरलो पर रिहा करने का फैसला हरियाणा के महाधिवक्ता से कानूनी सलाह लेने के बाद किया गया जिसमे पिछली 25 जनवरी को हरियाणा सरकार को दी गई अपनी सलाह में महाधिवक्ता ने कहा था कि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को हरियाणा कैदी के अच्छे बर्ताव अधिनियम के तहत खूंखार अपराधी की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को हत्याओं की घटनाओं में सह-अभियुक्तों के साथ साजिश रचने के लिए दोषी ठहराया गया है। जबकि डेरा प्रमुख की रहस्यमय गुफा का काले कारनामों से अपराधशास्त्र के पन्ने भरे पड़े हैं। उधर, डेरा सच्चा सौदा को हरियाणा सरकार की ओर से फरलो पर रिहा किए जाने को लेकर पंजाब के समाना विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार परमजीत सिंह सोहाली ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। अदालत में दाखिल याचिका में उन्होंने हरियाणा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। याचिका में कहा गया है कि पंजाब में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राम रहीम को राजनीतिक लाभ लेने के लिए फरलो पर रिहा किया गया है। राम रहीम का पंजाब की कई सीटों पर गहरा प्रभाव है और ऐसे में उसकी फरलो से पंजाब में शांति भंग हो सकती है। राम रहीम की फरलो से चुनाव की निष्पक्षता भी प्रभावित होगी। राम रहीम को जब सजा सुनाई गई थी, तब भी पंचकूला में भारी हिंसा हुई थी। ऐसे में हरियाणा सरकार का यह निर्णय पूरी तरह से गलत है। दुष्कर्म और हत्या जैसे संगीन मामले में दोषी होने के चलते हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स अधिनियम के तहत उसे फरलो का अधिकार नहीं है। इस संबंध में अवकाशप्राप्त आईपीएस अधिकारी विजय शंकर सिंह की टिप्पणी भी ध्यान देने योग्य है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लिखा है, ‘8 साल में यह भी एक नया विकास है कि समाप्त हो चुके खालिस्तानी आतंकी फिर से खुफिया एजेंसियों को दिखने लगे हैं। रहा सवाल सुरक्षा का तो सुरक्षित रहने का अधिकार, हर नागरिक की तरह राम रहीम को भी है। पर जब इसे खतरा है और खतरे का अनुमान (थ्रेट परसेप्शन) इतना है कि, इसे जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा देनी पड़ रही है तो सरकार इसे फरलो पर बाहर क्यों रखे हुए हैं ? सरकार को चाहिए कि इसकी फरलो रद्द कर इसे जेल भेज दे। ऐसे गम्भीर थ्रेट परसेप्शन को देखते हुए, जेल से सुरक्षित जगह इस व्यक्ति के लिये तो बाहर नहीं ही होगी।‘
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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