हार के बाद बंगाल भाजपा में रार

राजनीति समाचार

अजय भट्टाचार्य
आसनसोल
और बालीगंज उपचुनाव हारने के बाद बंगाल भाजपा में घमासान मचा हुआ है। शनिवार को मुर्शिदाबाद के भाजपा विधायक गौरीशंकर घोष ने प्रदेश भाजपा के सचिव पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इसके साथ ही बहरमपुर के विधायक कंचन मैत्र ने भी पार्टी की कमेटी छोड़ने की घोषणा कर दी। दोनों ही नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व पर रोष जाहिर किया और कहा कि ज़िलों में प्रदेश नेतृत्व अयोग्य लोगों को ज़िम्मेदारी दे रहा है। कई बार कहने के बावजूद प्रदेश नेतृत्व द्वारा इस मुद्दे को गम्भीरता से नहीं लिया जा रहा है। दोनों विधायकों का दावा है कि प्रदेश नेतृत्व की अनुभवहीनता के कारण ही आसनसोल और बालीगंज में पार्टी को करारी हार मिली। गौरी शंकर और कंचन ने विधानसभा चुनाव के बाद सभी उपचुनाव में पार्टी की हार का ज़िम्मेदार भी प्रदेश नेतृत्व को ठहराया। उनके साथ ही मुर्शिदाबाद के दो और नेताओं बानी गंगोपाध्याय और दीपंकर चौधरी ने भी प्रदेश कार्यकारिणी से इस्तीफ़ा दे दिया । यहाँ उल्लेखनीय है कि उपचुनाव के नतीजे सामने आने के साथ ही भाजपा सांसद सौमित्र खां ने प्रदेश नेतृत्व पर हमला बोला था। इसके बाद रविवार को दो विधायकों ने प्रदेश कमेटी से इस्तीफ़ा दे दिया। गौरी शंकर घोष के मुताबिक ज़िलाध्यक्ष अपने अनुसार संगठन चला रहे हैं। ऐसे लोगों को ज़िम्मेदारी दे रहे हैं जिनका तृणमूल से सम्पर्क है। इसे लेकर कई बार कहने पर भी कुछ नहीं हुआ। इस कारण अब राज्य कमेटी में रहने का कोई मतलब नहीं है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार पार्टी में काफ़ी मतभेद होने की बात मानते है और पूरे मामले पर सबसे बात करने कि कोशिश में लगे है। दो बार मुर्शिदाबाद के ज़िलाध्यक्ष रह चुके गौरी शंकर घोष पार्टी के पुराने नेता हैं। प्रदेश के नेता मानते हैं कि ज़िले में संगठन के विस्तार में उनकी अहम भूमिका रही है। गत विधानसभा चुनाव में इस ज़िले से पार्टी को दो सीटें भी मिलीं थी। पिछले कुछ समय से पार्टी से मतभेद के कारण उनकी दूरियाँ बढ़ गयी थीं। विधायकों की बैठक में भी ज़िला कमेटी को लेकर उन्होंने रोष ज़ाहिर किया था। लेकिन इस प्रकार इस्तीफ़े की बात किसी ने नहीं सोची थी। केवल इस्तीफ़ा ही नहीं बल्कि रविवार को गौरी शंकर घोष ने यह भी चेताया कि जिले में भाजपा को टिकाए रखने के लिए ज़रूरत पड़ने पर वह अलग संगठन बनाएँगे।
गौरी शंकर समेत कई नेताओं के इस्तीफ़े को लेकर भाजपा नेता अनुपम हाजरा भी मुखर हुए हैं। उन्होंने फ़ेसबुक पर पोस्ट किया, एक साथ इतने इस्तीफ़े क्यों, इस बारे में प्रदेश नेतृत्व को गम्भीरता से सोचने की आवश्यकता है। अभी तक जिनको इतना महत्व दिया गया, वे सब पार्टी छोड़कर चले गए और जो अब तक पार्टी के साथ खड़े थे, वे इस्तीफ़ा दे रहे हैं। कुछ मेरे जैसे लोग हैं जो भाजपा के खराब समय में पार्टी में शामिल हुए और अभी वे लोग ही सवालों का सामना कर रहे हैं कि मैदान में उतरिए, केवल सोशल मीडिया पर भाषण देने से क्या होगा। इसके बावजूद मुझ जैसे लोग प्रदेश भाजपा से दूर रहकर दिल्ली अथवा अन्य राज्य में पार्टी का काम करना पसंद करते हैं।
प्रदेश भाजपा में चल रही उठापटक के बीच सोमवार को सिलीगुड़ी के भाजपा विधायक शंकर घोष ने ह्वाट्स ऐप ग्रुप छोड़ दिया। इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं कि क्या भाजपा में विद्रोह की आंच तेज हो गयी है। हालांकि शंकर घोष का कहना है कि ये ह्वाट्स ऐप ग्रुप अधिक एक्‍टिव नहीं था जिस कारण उन्होंने ये ग्रुप छोड़ा है। उल्लेखनीय है कि अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत से शंकर घोष वाममोर्चा से जुड़े हैं। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हो गये थे। अपने राजनीतिक गुरु अशोक भट्टाचार्य के खिलाफ चुनाव लड़कर जीत हासिल की। मजा यह है कि सिलीगुड़ी नगर निगम के चुनाव में अपने ही वार्ड में शंकर घोष को हार का सामना करना पड़ा था। उन्‍हें प्रदेश भाजपा का सचिव बनाया गया था, लेकिन भाजपा के सभी जिलों व राज्‍यों के पर्यवेक्षकों को लेकर तैयार ह्वाट्स ऐप ग्रुप छोड़ने के कारण पार्टी के साथ ही समूचे राजनीतिक गलियारे में हलचल मच गयी है।

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