चूहे के बिल से निकला सोना

मुंबई

अजय भट्टाचार्य
नेकी
कर दरिया में डाल कहावत बनी ही इसलिये थी/है कि अच्छे काम का प्रतिफल अच्छा ही होता है। इसी सोमवार यानि 13 जून को एक घर में नौकरानी का काम करने वाली सुंदरी पलानीबेल अपनी गाढ़ी कमाई से बनाया सोना गिरवी रखने बैंक जा रही थी। रास्ते में उसे दो बच्चे भूखे दिखे तो उसने अपने पास मौजूद वडापाव की थैली उन बच्चों को दे दी और बस पकड़कर बैंक चली गई।
कुछ देर बाद सुंदरी को याद आया कि सोना जिस पर्स में रखा था वह पर्स भी उस थैली में ही था जो उसने उन भूखे बच्चों को दी थी। तुरंत भाग कर सुंदरी वापस उस जगह पहुंची लेकिन बच्चे और उनकी मां वहां से जा चुके थे। सुंदरी तेजी से भागते हुए दिंडोशी पुलिस स्टेशन पहुंची और अपनी सोने से भरी पर्स ढूंढने की अपील की। सोने की तलाश में जब पुलिस वहां पहुंची और कचरे के ढेर में बहुत खोजा लेकिन सोने वाली थैली नहीं मिली। मौके पर लगे सीसीटीवी के जरिए पुलिस उस गरीब परिवार तक पहुंची। बच्चों की मां ने बताया कि उन्हें पाव नहीं खाना था इसलिए थैली कचरे में फेंक दिया। तब पुलिस ने वहां लगे सीसीटीवी फुटेज को और खंगाला तो एक थैली हिलती हुई दिखी और फिर चूहा उसे नाले में ले जाते दिखा। जिसके बाद उस नाले में घुसकर पुलिस ने सोना बरामद कर लिया। पाव खाने के लिए चूहा थैली को नाले में अपने बिल में ले गया था। दिंडोशी पुलिस ने 10 तोला सोना खोने की शिकायत मिलने के कुछ घंटे बाद ही उसे चूहे के बिल से खोज निकाला। बरामद सोने की कीमत 5 लाख रूपये बताई जा रही है। दिंडोशी पुलिस के सब इंस्पेक्टर चन्द्रकान्त घार्गे के अनुसार पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक जीवन खरात के मार्गदर्शन में एक टीम ने कचरे के ढेर में थैली की तलाश शुरू की लेकिन वह वहां नहीं मिली फिर पुलिस ने उस कचरे के ढेर के पास लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच की तो पता चला कि जिस कचरे की थैली की तलाश पुलिस कर रही है वह एक चूहे के कब्जे में है। वास्तव में एक चूहा उस थैली में घुसकर उसमें रखे वडापाव को खा रहा था और इधर उधर घूम रहा था फिर उस थैली को लेकर नाले में घुस गया। पुलिस ने नाले में बने चूहे के बिल से थैली बरामद की तो उसने सोने गहने वैसे ही रखे हुए थे। खुद की गलती से अपना खोया सोना वापस पाकर सुंदरी ही बहुत खुश है। उसने दिंडोशी पुलिस को धन्यवाद कहा है। उसका कहना है कि अगर उसे सोना वापस नहीं मिलता तो वह खुदकुशी कर लेती।
उपरोक्त घटना के दो पहलू हैं जो नेकी कर दरिया में डाल कहावत पर पुनर्विचार की आवश्यकता पर बल देते हैं। श्रीमद भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने दान, पात्र और क्षेत्र का उल्लेख किया है। मतलब हम जिस व्यक्ति को दान दे रहे हैं, क्या वह उस दान को पाने का अधिकारी है? सुंदरी ने जिन बच्चों को भूखा जानकर वडा पाव की थैली उन्हें टिका दी उन्हें उसकी जरूरत थी ही नहीं। अक्सर हम यही करते हैं कि किसी को देखकर उसके जरुरतमन्द होने का अंदाजा लगा लेते हैं और उसे कुछ भी मदद/दान दे देते हैं जो वास्तव में उन्हें नहीं चाहिये होती। इसलिये दान करें पर देखकर नहीं, सही पहचान कर।

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