गांव में सड़क नही, घर तक जाने के लिए सेना का रिटायर्ड जवान खरीदेगा हेलीकॉप्टर

मुंबई समाचार

न्यूज स्टैंड18 नेटवर्क
शेगांव (महाराष्ट्र)
। आजादी के 75 साल बाद भी आज देश के तमाम गांव सड़क मार्ग से नही जुड़ सके हैं। इन 75 साल में चहुं मुखी विकास का दावा करने वाली सरकार का भी 8 साल शामिल है। आज भी गांव वालों को कच्चे रास्तों और पगडंडियों का इस्तेमाल करना पड़ता है।
केंद्रीय मंत्री इस वर्ष रोजाना 50 किलोमीटर सड़क बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं, पिछले वर्ष प्रतिदिन 37 किमी सड़क बनाई गई। इसके बावजूद गांव का आम जनमानस पक्की सड़क से नही जुड़ सका।
बीमार पत्नी को सड़क नही होने की वजह से समय पर अस्पताल नही पहुंचा सकने वाले दशरथ मांझी ने छेनी हथौड़ी से पहाड़ तोड़कर रास्ता बना दिया था। बिहार के गया जिले के गलहौर घाटी के मजदूर दशरथ मांझी को इस सनक की वजह से लोगों ने पागल तक करार दे दिया था। दशरथ 1960 से लेकर 1982 तक एक पहाड़ को छेनी और हथौड़ी से काटते रहे थे। रोज घर से सुबह निकलते और शाम को पहाड़ी से घर आते। दशरथ की जिद थी कि पहाड़ काटकर रास्ता बनाएंगे। आखिरकार 22 साल में उन्होंने 25 फीट ऊंची, 30 फीट चौड़ी और 360 मीटर लंबी पहाड़ी काटकर सड़क बना डाली थी।
यह जरूरी नहीं की हर कोई दशरथ मांझी बन जाय। महाराष्ट्र, शेवगांव तहसील के सालवडगांव के एक रिटायर्ड आर्मी मेजर दत्तू भापकर ने सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए अनोखा रास्ता खोजा है। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए सरकारी अनुदान की मांग की है।
उन्होंने कहा, हमारी बस्ती तक जाने के लिए रोड नहीं है इसलिए हम हेलीकॉप्टर खरीदेंगे। अब देखना यह होगा कि, मेजर दत्तू भापकर की यह मांग सरकार पहुंच पाती है या नहीं। पहुंच भी गई तो सरकार इसे कितनी गंभीरता से लेती है।

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