संघं मुस्लिम शरणं गच्छामि !

लेख

अजय भट्टाचार्य
बिहार
के सीमांचल सहित पीएफआई ठिकानों पर कल देशव्यापी एनआईए छ्पों के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह जब ‘नीतीश-तेजस्वी देश को मुस्लिम राष्ट्र बनाना चाहते हैं’ का देश राग अलाप रहे थे तब उनकी पार्टी कि पितृ संस्था के मुखिया मोहन भागवत दिल्ली में मुस्लिम बुद्धिजिवियों और इमामों से मिलने कस्तूरबा गांधी मार्ग स्थित मस्जिद में महरहूम मौलाना डॉ जमील इल्यासी की मज़ार पर पर फूल चढ़ा रहे थे। मौका था डॉ जमील इलियासी की बरसी का। उनके साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के इंद्रेश, रामलाल और कृष्णगोपाल भी थे। बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच संघ ने मुसलमानों में घुसपैठ तेज की है और मुसलमानों से संपर्क बढ़ाया है और भागवत ने समुदाय के नेताओं के साथ कई बैठकें की हैं। पिछले साल भी मुंबई के एक होटल में भागवत ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों के एक समूह के साथ मुलाकात की थी। इससे पहले सितंबर 2019 में भागवत ने दिल्ली स्थित संघ कार्यालय में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना सैयद अरशद मदनी से भी मुलाकात की थी। पिछले महीने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग सहित कई अन्य मुस्लिम बुद्धजीवियों से मिलकर भागवत ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ़ नुपुर शर्मा के बयान ज्ञानवापी मस्जिद के मुद्दे पर भी चर्चा की थी। अब यह गिरिराज सिंह ही बता सकते है कि संघ प्रमुख मुसलमानों की मजार पर मत्था क्यों टेक रहे हैं!
डॉ इलियासी की मजार पर चादर-फूल चढ़ाने के बाद हुई बैठक में इमाम उमर इलियासी और शोएब इलियासी भी मौजूद थे। डॉ इमाम उमर इलियासी ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के प्रमुख हैं। मोहन भागवत लगभग एक घंटे मस्जिद में रुके। डॉ जमील इलियासी के बेटे शोएब इलियासी के अनुसार मोहन भागवत का आना मुल्क के लिए बड़ा संदेश है। हमारे लिए ये खुशी का मौका है। मोहब्बतों का पैगाम है। इसे इतना ही देखा जाना चाहिए। इसमें नहीं पड़ना चाहिए कि मोहन भागवत मस्जिद क्यों गए आदि। मुल्क के लिए ये सुखद परिस्थिति है। इससे मोहब्बत का एक पैगाम जाता है। मोहन भागवत ऐसे नहीं हैं, जैसी कि उनकी छवि पेश की जाती है। उन्होंने श्रीमदभागवत गीता पर लिखी मेरी किताब को देखा और सराहा। वे एक पारिवारिक कार्यक्रम के तहत यहां आए थे। मुस्लिम समुदाय के कुछ बुद्धिजीवियों ने संघ प्रमुख मोहन भागवत से पिछले महीने 22 अगस्त को कुछ बुद्धजीवियों मुलाकात की थी। इस दौरान हिंदू-मुस्लिम के बीच सौहार्द के लिए काम करने पर सहमति बनी। मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने इस मुलाकात के लिए वक्‍त मांगा था। बातचीत के दौरान भागवत ने गौकशी और हिंदुओं को काफ़िर कहने पर आपत्ति जताई थी। दूसरी ओर, मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने हर मुसलमान को शक की निगाह से देखने पर अपनी चिंता का इजहार किया था। ध्यान रहे तेलंगाना में भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री का पसमांदा मुसलमानों के लिए प्रेम उमड़ा था। मतलब साफ है भाजपा को शक है कि अगम चुनाव में कहीं हिंदू साथ न छोड़ दे। इसलिए अब तक जिस मुसलमान को गरिया कर भाजपा वोट बटोरती रही है, उसके पितृ संगठन को उसी मुसलमान को भाजपा का वोट बैंक बनाने के लिए मजार चूमना पड़ रहा है।

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