Shivsena crisis: तीर कमान पर घमासान

लेख

अजय भट्टाचार्य
सुप्रीम
कोर्ट द्वारा शिवसेना के संदर्भ में चुनाव चिह्न संबधी मामले को चुनाव आयोग द्वारा ही हल किये जाने के फैसले के बाद मीडिया का एक बड़ा तबका उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के लिए ‘बड़े झटके’ के रूप में स्थापित कर रहा है या कोशिश में है कि शिवसेना का मनोबल टूटे। महाराष्ट्र में शिवसेना के टूटने और सत्ता संघर्ष के बाद यह सवाल उठने लगा है कि पार्टी और पार्टी के चुनाव चिह्न तीर कमान या धनुष बाण का मालिक कौन है। एकनाथ शिंदे गिरोह ने पार्टी चुनाव चिन्ह पर अपना दावा किया है वहीं मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। लेकिन अब कोर्ट ने गेंद चुनाव आयोग के पाले में ये कहते हुए फेंक दी है कि चुनाव आयोग इस पर फैसला लेगा। अगर आयोग का फैसला उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना के खिलाफ जाता है, तो वह फिर से सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। मुंबई महानगर पालिका के चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं रह गया है, इसलिए उद्धव ठाकरे टीम प्लान बी पर भी काम पर लग गई है।
खबर है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने धनुष-बाण नहीं मिलने पर नए चुनाव चिह्न से लड़ने की तैयारी कर ली है। शिवसेना का चुनाव चिन्ह अगर जब्त भी हो जाता है तो या एकनाथ शिंदे के पास चला गया तो इसे उद्धव ठाकरे को चुनाव आयोग की तरफ से लगा सबसे बड़ा झटका माना जा सकता है। चुनाव आयोग के पास यह तय करने का अधिकार है कि शिवसेना से कौन संबंधित है। इस संबंध में मातोश्री मुश्किल में थी। शिवसेना का धनुष बाण किसे मिलेगा? ये अब चुनाव आयोग के पास है। शिवसेना की राजनीति के जानकारों के अनुसार शिवसेना को मनपा चुनाव में इस समझ के साथ लड़ना होगा कि यह पहला चुनाव है। साथ पार्टी के नए चुनाव चिह्न से लड़ने की तैयारी भी एक कदम हो सकता है और इसके लिए सोशल मीडिया नया संकेत देने के लिए ठाकरे की इंटरनेट, सोशल डिजिटल मीडिया टीम तैयार है। वैसे भी शिवसेना पहला चुनाव बिना चुनाव चिन्ह के लड़ा था। 1967 में शिवसेना ने प्रजा समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया था और तब शिवसेना में 42 पार्षद चुनकर आये थे। आगामी एक नवंबर को चुनाव आयोग क्या फैसला ले सकता है? इसको लेकर तीन संभावनायें हैं। पहली यह कि ठाकरे नीत शिवसेना के ही पास धनुष-बाण चिह्न रह सकता है। दूसरी संभावना यह है कि धनुष-बाण चिन्ह शिंदे समूह को जा सकता है और तीसरी संभावना जो ज्यादा प्रबल है वह यह कि धनुष-बाण चिन्ह को जब्त कर दोनों धड़ों को नये चुनाव चिह्न दिए जा सकते हैं।

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