Silver coin: सावधान! कहीं आप भी दीपावली पर नकली चांदी का सिक्का तो नही खरीद रहे? ऐसे करें असली-नकली की पहचान

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दीपावली पर लक्ष्मी पूजा के लिए बड़ी संख्या में लोग गणेश और लक्ष्मी प्रतिमा अंकित चांदी का सिक्का खरीदते हैं। इस सिक्के की पूजा करने के बाद अपनी तिजोरी में रख देते हैं। धार्मिक मान्यता व आस्था के चलते इस सिक्के को लोग बेचते नहीं। सालों साल यह घर में ही पड़ा रहता है। यह बात नकली सिक्का बनाने वालों को बखूबी पता है। इसी का फायदा उठाकर ज्यादातर ज्वेलर्स नकली सिक्का आपको असली चांदी बताकर बेच देते हैं। अमूमन यह नकली चांदी के सिक्के गिलट या जर्मन सिल्वर से बनाए जाते हैं। जिसकी कुल कीमत 900 से 1000 रुपए किलो होता है।
इसी तरह नकली चांदी से सिक्के बनाने वाली एक फैक्टरी का दैनिक भास्कर ने खुलासा किया है। भास्कर ने अपनी खबर में बताया है कि, बाजार में चांदी के सिक्कों के हूबहू नकली सिक्के बन और बिक रहे हैं। महज 400 रुपए किलो वाली गिलट धातु और एक हजार रुपए किलो वाले जर्मन सिल्वर से फैक्ट्रियों में इन्हें तैयार कर मार्केट में बेचा जा रहा है, लेकिन कीमत 55 हजार रुपए किलो वाली चांदी की वसूली जा रही है।
चांदी में मिलावट कर नकली सिक्के बनाने और बेचने का ये खेल जयपुर, अजमेर, कोटा और जोधपुर जैसे बड़े शहरों में धड़ल्ले से हो रहा है। कई सीक्रेट फैक्ट्रियों में सिक्के ढालने की बड़ी-बड़ी मशीनों पर दिन-रात सैकड़ों किलो नकली चांदी के सिक्के ऑर्डर पर तैयार हो रहे हैं। यहां से बने सिक्के ज्वेलर्स शोरूम और छोटे व्यापारियों के जरिये आपके घर में पूजा की थाली तक पहुंच रहे हैं।
सिल्वर में 30 से 40% तक गिलट या जर्मन सिल्वर मिक्स कर सिक्के तैयार किए जाते है। ऐसे सिक्कों में 40 फीसदी तक की मिलवाट वाली गिलट और जर्मन सिल्वर के असल चांदी के बराबर 55 हजार से 57 हजार रुपए के भाव लिए जाते हैं। इससे मोटा मुनाफा होता है।
अखबार ने इसके जानकारों से बातचीत के आधार पर नकली सिक्कों की जांच करने का तरीका भी बताया है। सिल्वर में 30 से 40% तक गिलट या जर्मन सिल्वर मिक्स कर सिक्के तैयार किए जाते है। ऐसे सिक्कों में 40 फीसदी तक की मिलवाट वाली गिलट और जर्मन सिल्वर के असल चांदी के बराबर 55 हजार से 57 हजार रुपए के भाव लिए जाते हैं। इससे मोटा मुनाफा होता है।
99.99% सिक्के गिलट या जर्मन सिल्वर से तैयार किए जाते हैं, लेकिन चमकदार दिखाने के लिए इन पर चांदी की पॉलिश कर दी जाती है। 800-900 रुपए किलों की मैन्युफैक्चरिंग लागत के बाद तैयार नकली सिक्कों को बाज़ार में असल चांदी के सिक्कों के बीच मिक्स कर आसानी से 55 हजार से 57 हजार रुपए के भाव से बेचा जाता है।

जर्मन सिल्वर क्या है?

जर्मन सिल्वर या निकल सिल्वर, तांबे का एक मिक्सचर मेटल है जिसमें निकल और जस्ता मिला होता है। इसमें 60 फीसदी तांबा, 20 फीसदी निकल और 20 फीसदी जस्ता होता है। इसे ‘जर्मन सिल्वर’, नई चांदी, निकल, पीतल और इलेक्ट्रम नामों से भी जाना जाता है। दिखने में ‘जर्मन सिल्वर’ चांदी जैसा होता है, लेकिन इसमें चांदी नाम मात्र की भी नहीं होती है। इसके नाम में ‘जर्मन’ इसलिए आया क्योंकि इसका विकास जर्मनी के धातु कर्मियों ने किया था।
ज्वेलरी का बिजनेस हमेशा से ही विश्वास पर होता आया है, लेकिन शहर में कई ज्वेलर सोने-चांदी की खरीद में घालमेल कर रहे हैं। इस ठगी को जांचने और रोकने का कोई तरीका नहीं है। हालत ये है कि 65, 70 व 80% शुद्धता की चांदी आती है और दुकानदार कीमत 100% की लेते हैं। उसके ऊपर से मेकिंग चार्ज अलग से लिया जा रहा है।
कैसे करें असली सिक्के की पहचान

सिक्के की खनक से पहचानें : चांदी के सिक्के की क्वालिटी और प्योरिटी उसकी ‘खनक’ सुनकर भी चेक की जा सकती है। सिक्के को लोहे के टुकड़े पर टकराने से यदि खनक की आवाज ज्यादा आए, तो माना जाता हैं कि इसमें मिलावट है।

मैग्नेट टेस्ट : घर में सामान्य तौर पर चुंबक मिल जाती हैं। चांदी में मिलावट होगी, तो वह चुंबक से आकर्षित होगी। भले ही बहुत ही कम चिपके, लेकिन असली चांदी चुंबक से बिलकुल भी आकर्षित नहीं होती।

आइस टेस्ट : बर्फ के टुकड़े से भी चांदी की परख हो सकती है। चांदी को बर्फ पर रखा जाए, तो वह तेजी से पिघलेगी। चांदी में थर्मल कंडक्टिविटी होती है, जो बर्फ को पिघलाने की रफ्तार को बढ़ा देती है।

पत्थर पर घिसकर या रगड़कर : चांदी के सिक्के को पत्थर पर रगड़ने यानी घिसने से जो लकीर बनती है, वो सफेद रंग की हो तो वो चांदी सही मानी जा सकती है। यही लकीर पीलेपन या ताम्बे के रंग जैसी दिखाई दे तो ये मिलावटी हो सकता है।
एसिड टेस्ट : सिल्वर कॉइन पर ज्वेलरी शॉप में हर समय उपलब्ध रहने वाले नाइट्रिक एसिड की एक बूंद डालने पर यदि उस जगह पर हरा या नीला रंग दिखे तो उसमें मिलावट तय है। यदि रंग सफेद या हल्का काला नजर आए तो वो सिक्का ओरिजिनल है।
साभार: भास्कर

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