ग्रीष्मा को न्याय चाहिये

लेख

अजय भट्टाचार्य
गोदी
मीडिया में एकदम गजब की शांति है। दस दिन पहले गुजरात के सूरत शहर में हुई घटना अगर महाराष्ट्र, राजस्थान अथवा किसी अन्य गैर भाजपा शासित राज्य में घटित हुई होती तो अब तक गोदी मीडिया सर पर आसमान उठा चुका होता। 21 साल की ग्रीष्म वेकारिया की आत्मा प्रधानसेवक के बहुप्रचारित-प्रसारित नारे ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की दुर्गति पर जार-जार आंसू बहा रही होगी और हिजाब के मुद्दे पर बहस करने वाली गोदी मीडिया के मुंह पर ठुक रही होगी।
गुजरात के सूरत में करीब 21 वर्षीय ग्रीष्मा वेकारिया की सिरफिरे आशिक ने एकतरफा प्यार में पिछली 12 फरवरी को सरेआम गला रेतकर हत्या कर दी। वारदात के समय मौके पर मौजूद ग्रीष्मा के चाचा ने भतीजी को बचाने का प्रयास किया तो सिरफिरे आशिक ने उन पर भी हमला कर दिया। अब गुजरात में दिल दहला देने वाली घटना तूल पकड़ती जा रही है। इसके साथ ही, इस हत्याकांड के बाद ग्रीष्मा का परिवार बेटियों की सुरक्षा को लेकर ही गुजरात सरकार पर सवाल खड़े कर रहा है। वेकारिया का परिवार लगातार सवाल कर रहा है कि उनकी बेटी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई, तो सरकार बेटियों की सुरक्षा का दावा कैसे कर सकती है?
सिरफिरे आशिक फेनिल गियानी ने ग्रीष्मा वेकारिया की उसके मां, भाई और चाचा के सामने ही गला रेतकर हत्या कर दी थी।, ग्रीष्मा के चाचा ने फेनिल को वारदात को अंजाम देने से रोकने की कोशिश भी की, तो उसने उनके पेट में भी चाकू मार दिया था। ग्रीष्मा के पिता अफ्रीका में रहते हैं। फेनिल गुयानी करीब एक साल से ग्रीष्मा के पीछे पड़ा हुआ था। उसने एकतरफा प्यार में ही इस वारदात को अंजाम दिया। हत्या वाले दिन से पहले ग्रीष्मा के चाचा ने गोयानी से दूर रहने की हिदायत दी थी। इसके बाद भी जब गोयानी ने ग्रीष्मा से मिलने की कोशिश की, तो चाचा ने उसे पकड़ने की कोशिश की। इस पर फेनिल ने उनके पेट में चाकू घोंप दिया था। इसके बाद फेनिल ने दौड़कर ग्रीष्मा को पकड़ लिया और गर्दन पर चाकू रख दिया था। आरोपी ने ग्रीष्मा के छोटे भाई को भी घायल कर दिया था। ग्रीष्मा की मां विलास वेकारिया अपनी बेटी के लिए केवल न्याय की मांग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मेरी बेटी निर्दोष थी। उसकी कोई गलती नहीं थी, फिर भी उसे मार डाला। मुझे केवल न्याय चाहिए। उसने मेरी आंखों के सामने मेरी बेटी का गला काट डाला। तेजी से खून निकलने लगा था। यह सब मैंने अपनी आंखों से देखा था। ग्रीष्मा की चाची राधिका सरकार से बेटियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए कहती हैं कि ऐसी घटनाएं जारी रहीं, तो हमारी बेटियां कैसे पढ़ पाएंगी। सरकार ने बैनर पोस्ट लगाए हैं, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।’ लेकिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो महिला सुरक्षा से जुड़े बैनर पोस्टर हटा लेने चाहिए। नारे लगाने बंद करने चाहिए। बेटी बचाओ के बैनर के बदले लगाना चाहिए कि अगर बेटी बचानी है तो उसे घर पर रखो।
इसके साथ ही, ग्रीष्मा की चाची हत्या के आरोपी फेनिल गियानी को सख्त सजा देने की मांग कर रही हैं। कहना है कि ग्रीष्मा के साथ जो हुआ वैसा देश की किसी दूसरी बेटी के साथ नहीं होना चाहिए। हमारी बेटियां कैसे सुरक्षित रहेंगी? वे तभी सुरक्षित रहेंगी, जब राज्य सरकार पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराएगी। जाने दीजिये, क्योंकि बलात्कार और हत्या के आरोपी बाबा राम रहीम को तो जेड प्लस सुरक्षा सरकार दे सकती है मगर ग्रीष्मा जैसी बच्चियां भगवान भरोसे भेड़ियों के आगे छोड़ दी गई हैं।
(लेखक देश के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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