खिराज_ए_अक़ीदत: 22,रबीउलअव्वल, सभी सूफी सिलसिलों से जुड़े हैं मौलाना शाह फ़ज़ले रहमा (र.अ)

हज़रत मौलाना शाह फ़ज़ले रहमा (र.अ) मल्लावां से गंजमुरादाबाद आकर जिस मस्जिद के प्रांगड़ में आकर ठहरे वहाँ मुरादशेर रह ० की मजार पहले से थी। नेविल ने उन्नाव के गजेटियर में लिखा है कि मुरादशेर रह ० मुगल बादशाह औरंगज़ेब के जमाने में इस स्थान पर आए और उनके नाम से ये गाँव बसा […]

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खिराज_ए_अक़ीदत 22: रबीउलअव्वल मजहब की इस्लाह और धर्म सुधार के आन्दोलनकारी शाह फ़ज़ले रहमान रह०

सूरह फातिहापहले ही पहल नाम लेता हूँ मनमोहन का जो बड़ी मया मोह का महरवाला है । सब सराहत मनमोहन को है जो सारे संसार का पालनहार ।बड़ी मयामोह का महरवाला है ।जिस के बस में चुकौती का दिन है ।हम तुझी को पूजते हैं और तेरा ही आसरा चाहते हैं । चला हम को […]

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नबी स० का नूर चमका और छा गया सारे जहान में

हज़रत इब्ने अब्बास रिवायत फरमाते हैं : ” जब नूरे मुहम्मदी स० हज़रत अब्दुल्लाह से मुन्तकिल होकर हज़रत आमना के शिकम में करार पज़ीर हुआ तो कुरैश के तमाम जानवरों को कुवते गोयाई मिल गई और वह बाहम ये मुजदा सुना रहे थे कि मुहम्मद स० माँ के पेट में मुन्तकिल हो गये । काबुल […]

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लोगों को अपना दीवाना बना लिया आखरी तक़रीर में हज़रत मोहम्मद

दस हिजरी में नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज का इरादा फ़रमाया और हर तरफ़ इत्तिला भेज दी गयी कि नबी सल्ल० हज के लिए तशरीफ़ ले जाने वाले हैं । इस इत्तिला के बाद गिरोह गिरोह करके लोग मदीना में जमा होने लगे । इस में हर दर्जे और हर तबके के लोग थे। […]

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आखिर इस्लाम पूरी दुनिया में इतनी तेजी से क्यों फैला , जानिए पैगंबर की रणनीति और नज़रिया

मदनी दौर ( मदीना ) में इस्लाम के काम को तीन मरहलों में बांटा जा सकता है। पहला मरहला इस्लामी समाज की बुनियाद रखने का मरहला , जिसमें फ़ित्ने पैदा किए गए परेशानियां बढ़ाई गई , अन्दर से रुकावटें खड़ी की गईं और बाहर से दुश्मनों ने मदीना को नेस्त व नाबूद करने के लिए […]

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मक्का के सरदारों ने की जान लेने की साजिश, नबी को छोड़ना पड़ा वतन

मुसलमानों की हिजरत मक्का से मदीना इतनी सरल न थी कि वह आसानी से सहन कर लेते। मुशरकीन ने हर प्रकार की रुकावटें मुसलमानों के लिए खड़ी कर दीं और हर तरह की परीक्षा में उनको डाल दिया। लेकिन मुहाजिरीन अपनी बात के धनी थे । और जो इरादा कर लिया था उससे पीछे हटने […]

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नबी का मक्के वालों ने क्यों किया बायकाट, क्यों तायफ वालों ने मारे पत्थर?

नबी का मक्के वालों ने क्यों किया बायकाट, क्यों तायफ वालों ने मारे पत्थर? एलाने नबुव्वत के सातवें साल में कुफ्फ़ारे मक्का ने जब देखा कि रोज़ बरोज़ मुसलमानों की तादाद बढ़ती जा रही है और हज़रते हम्ज़ा व हज़रते उमर जैसे बहादुराने कुरैश भी दामने इस्लाम में आ गए तो यह लोग आपे से […]

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इस्लाम लाने वालों पर कुरैश के अत्याचार बढ़ते गए

इस तरह कुरैश के यह दो मौकिफ ( दृष्टि कोण ) हो गए थे कि एक तरफ तो बाज़ लोग आहिस्ता आहिस्ता इस्लाम कुबूल करते जाते थे , दूसरी तरफ वह लोग थे जो अपनी बड़ाई या खानदानी उत्तमता के एहसास से काम लेते थे , इनकार करते थे और बिला सोचे गौर किये मुसलमान […]

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जब मक्के वालों ने पैगंबर ए इस्लाम पर जुल्म के पहाड़ तोड़े

और इस तरह आप भटके हुए लोगों को सही राह दिखाने लगे । आप पर ईमान लाने वालों में हज़रत खदीजा पहली औरत थीं । इसके बाद ईमान लाने वालों में आपके चचेरे भाई हज़रत अली रज़ी० , हज़रत जुबैर रजी० , हज़रत अबूबक्र रजी ० , हज़रत उस्मान रज़ी ० , हज़रत अब्दुर्रहमान इबने […]

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अन्धेरे में उजाला फैलाने का मंसब मिला पैगंबर ए इस्लाम को

मक्का में बीवी खदीजा एक बड़ी अमीर औरत थीं । लोग उनकी बड़ी इज्ज़त किया करते थे , उनका बड़ा व्यापार था । अपने रुपये से लोगों को तिजारती सफर पर भेजतीं । मुनाफ़ा में उनको भी साझी बनाती । प्यारे नबी की सच्चाई की मक्के में बड़ी चर्चा थी । लोग आपको अमीन कह […]

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