सबसे ऊँची प्रतिमा और सबसे बौना राजनेता

राजनीति समाचार

अजय भट्टाचार्य
पांच
राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आ चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी चार राज्यों में अपनी सत्ता की वापसी का जश्न मना रही है। विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद गुरुवार की शाम दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के दौरान कहा था कि इन चुनावों ने 2024 के नतीजे तय कर दिए हैं। मतलब 2024 में भी भाजपा लोकसभा चुनाव जीतेगी। मगर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मानें तो भारत की असली लड़ाई के नतीजे साल 2024 में आएंगे। प्रशांत किशोर ने एक ट्वीट करते हुए लिखा कि देश के लिए लड़ाई 2024 में लड़ी जाएगी और तभी नतीजे आएंगे, इन विधानसभा चुनावों में नहीं। ‘साहेब’ ये जानते हैं! इसलिए राज्य के परिणामों के जरिए विपक्ष के खिलाफ एक मनोवैज्ञानिक धारणा बनाने की चाल चल रहे हैं। इस झूठी कथा में मत फंसे और इसका हिस्सा मत बनें।
दरअसल प्रधानमंत्री के विजयोत्सव भाषण का अगर विश्लेषण करें तो पाएंगे यह मतदाता के प्रति धन्यवाद ज्ञापन से कहीं ज्यादा पार्टी को अगले चुनावों की तैयारी में जुटने का संदेश देना है/था। इसकी शुरुआत भी उन्होंने शुक्रवार को गुजरात के अहमदाबाद में रोड शो के साथ कर भी दी। इस दौरान लोगों ने मोदी..मोदी, जय श्री राम और भारत माता की जय के नारे लगाए। सड़कों पर दोनों तरफ मोदी का स्वागत करने के लिए लोगों की भारी भीड़ मौजूद थी। दो दिन के गुजरात दौरे में प्रधानमंत्री पंचायत महासम्मेलन में पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों से भी संवाद करेंगे। भाजपा की यही नीति उसके चुनावी जीत का महामंत्र है। इसके उलट मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को देख लीजिये भाजपा से ज्यादा उसे खुद के भीतर जन्मी दूसरी कांग्रेस से जूझना पड़ रहा है। विरोध के स्वर भाजपा में भी उठते रहते हैं लेकिन उन्हें अनसुना कर उनकी गंभीरता को नगण्य करने की कला कांग्रेस को भाजपा से सीखनी होगी। आज उत्तर प्रदेश के पूरे चुनाव में उमा भारती कहीं दिखीं ? वरुण गाँधी को हाशिये पर डालकर भाजपा ने उन्हें भी अंडे के भीतर कर दिया है। मगर कांग्रेस में! जरा सी भीतरी हलचल हुई, नेतृत्व के पसीने छुट जाते हैं। पंजाब की हार इसी का नतीजा है। आप भाजपा को जि भर कर कोस सकते हैं लेकिन बीमार ही सही उनके पास एक विचारधारा है। वे मेहनत करना जानते हैं। आखिरी दम तक चुनाव लड़ना जानते हैं। और विपक्ष कभी ममता बनर्जी की आक्रामकता तो कभी अखिलेश यादव की नई हवा पर मुग्ध नजर आता है। हमारा खुद का कोई स्टैंड है भी या नहीं या बस भाजपा विरोध में अंधे होकर यहाँ-वहां भटक रहे हैं। अब इसी यूपी चुनाव में देखिए आदित्यनाथ ठाकुर होने पर गर्व करते हैं और कहते हैं इस जाति में भगवान पैदा हुए। क्या जवाब आया अखिलेश यादव की तरफ से- कृष्ण जी तो हमारे कुलदेवता हैं। इसे कहते हैं बड़ा जवाब इसे कहते हैं नेता। जबकि आप पर जातिवादी होने का आरोप पहले से है फिर कहिए ईवीएम गड़बड़ है।
ये तो हाल हैं लिबरल और समाजवाद वालों के। बाकी
जिनके पास विचारधारा है वे अतिबौद्धिक एक खयाली क्रान्ति की उम्मीद में पिछली पांच पीढ़ियों से बैठे-बैठे खाये पिए घरों के युवाओं को नकारा बना रहे हैं और जो मध्यम या निम्न आय वर्ग के लोग इनके संपर्क में आते हैं वे बहुत जल्द इनका बुद्धिविलास पहचान के अपने रास्ते हो लेते हैं। उसपर तुर्रा ये की हम महानता की आखिरी खेप हैं। भाजपा तमाम कमियों और छल कपट के बावजूद अपनी सक्रियता और अनुशासन के दम पर हर चुनाव में इन्हें कुचल कर निकल जाती है। देवी प्रसाद मिश्र की कविता की पंक्तियाँ हैं-
‘हमारे पास सबसे ऊँची प्रतिमा है
और सबसे बौना राजनेता’
भाजपा जब कहती है कि इस देश में कोई विपक्ष नहीं है तो ठीक ही कहती है। याद रहे जब 5 राज्यों में चुनाव नतीजे घोषित हो रहे थे तबतक मोदी और शाह अगले चुनावी राज्यों त्रिपुरा और गुजरात में अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत कर रहे थे और राहुल गाँधी क्या कर रहे थे? पता कर लीजिए। इसका जवाब ढूंढने में अगले चुनाव का परिणाम आ जाएगा।

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